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इनकी कारीगरी है काबिले तारीफ: बांके बिहारी के बाद रामलला को वस्त्र पहनाने को राज्यपाल से मांगेंगे अनुमति

Mon, 30 Aug 2021 11:20 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 30 Aug 2021 11:20 PM IST
सार

अतीक ने बताया कि उनकी तमन्ना है कि अयोध्या के श्रीराम को वह अपने हाथों से पोशाक पहनाएं। इसके लिए राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के 3 व 4 सितंबर को प्रस्तावित आगमन के वक्त प्रस्ताव देंगे।

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Their workmanship is commendable, zardozi clothes, janmashtami
असद खान और शादाब खान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फर्रुखाबाद जिले की जरदोजी कारीगरी का बॉलीवुड में खासा क्रेज है। अब विश्व प्रसिद्ध अयोध्या के राजा श्रीराम को भी अतीक अहमद पोशाक पहनाएंगे। इसके लिए राज्यपाल से अनुमति मांगेंगे। उनके कारखाने में बांके बिहारी की दूसरी पोशाक तैयार हो रही है।
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करीब 10 फीट ऊंची प्रतिमा की इस पोशाक में 39 हजार की लागत आती है। अतीक चाहते हैं कि जिले के हुनरमंदों की कारीगरी विश्व पटल पर पहचानी जाए। शहर के चीनीग्रान निवासी अतीक अहमद उर्फ पप्पू के कारखाने के कारीगर भगवान बांकेबिहारी की पोशाक बनाने में जुटे हैं।
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ऑर्डर देने वाले रविवार को एक पोशाक लेकर जा चुके हैं और दूसरी बनाने में करीब 10 कारीगर जुटे हैं। वे बताते हैं कि पोशाक में चांदी का कोरा, दपका, नक्शी, जरकन, चांदी का सितारा, रेशम, मोती आदि का प्रयोग करते हैं। एक पोशाक में करीब 20 मीटर सिल्क का कपड़ा लगता है।
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पोशाक में कुल 11 हिस्से बनाए जा रहे हैं। बताया कि उनकी तमन्ना है कि अयोध्या के श्रीराम को वह अपने हाथों से पोशाक पहनाएं। इसके लिए राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के 3 व 4 सितंबर को प्रस्तावित आगमन के वक्त प्रस्ताव देंगे।

इनकी कारीगरी है काबिले तारीफ
बांके बिहारी की पोशाक बनाने में आरिफ खान, कासिम अहमद,  अखिलेश कुमार, हरिंदर कुमार, अवधेश कुमार, अनीश खान, नासिर खान, दिलशाद खान आदि लगे हैं। पोशाक बनने में करीब एक महीना लगता है।

नो लॉस नो प्रॉफिट में करते हैं काम
अतीक  बताते हैं कि वह किसी भी धार्मिक पोशाक में एक पैसा भी मुनाफा नहीं लेते। जो खर्च होता है ईमानदारी से उतना ही लेते हैं। पूरा काम नो लॉस नो प्रॉफिट पर करते हैं।

माता वैष्णो देवी का बनाएंगे चोला
अतीक माता वैष्णो देवी के दरबार में भी जा चुके हैं। कहते हैं कि वह माता की तीनों पिंडी का नाप लेकर आए थे। अब नवरात्र से पहले ही माता का चोला बनाने शुरू करेंगे। इस चोला में विशेष कारीगरी होती है। अतीक के पुत्र असद खान और शादाब खान बताते हैं कि बाबा वशी अहमद भी भगवान की पोशाकें बनाते थे।
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