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चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग में पूरी दुनिया ने सुनी कनपुरिया आवाज
Mon, 09 Sep 2019 02:43 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 09 Sep 2019 02:43 PM IST
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चंद्रयान-2 मिशन
- फोटो : PTI
पूरी दुनिया की निगाहें इसरो के जिस चंद्रयान-2 मिशन पर हैं, उसका अहम हिस्सा कानपुर के विनोद कुमार श्रीवास्तव भी रहे हैं। 22 जुलाई को जब चंद्रयान-2 मिशन चांद पर भेजा गया था तो विनोद ने दूरदर्शन पर लाइव कमेंट्री की थी, जिसे पूरी दुनिया ने सुना था। इससे पहले भी वह लगातार छह बार ऐसे बड़े मिशनों का आंखों देखा हाल सुना चुके हैं।
37 साल तक इसरो में विभिन्न पदों पर काम करने वाले आर्यनगर निवासी विनोद शनिवार को घर लौट आए हैं। ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि चंद्रयान-2 ने दुनिया में इतिहास रच दिया है। बोले, लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने का मतलब यह नहीं है कि चंद्रयान-2 मिशन ही फेल हो गया है। लैंडर विक्रम इस मिशन का एक हिस्सा था।
विनोद ने बताया कि 1982 में इसरो ज्वॉइन किया था। इसके बाद सभी अहम मिशन का हिस्सा रहे। उन्होंने ही इसरो का पहला रॉकेट सेफ्टी डिवीजन तैयार किया। 2011 में जब वह इसरो के सतीश धवन स्पेस सेंटर (एसडीएससी) में रेंज सेफ्टी ऑफिसर के महाप्रबंधक पद से रिटायर हुए तो इसरो ने कार्यकाल बढ़ाते हुए उन्हें साइंटिफिक एडवाइजर के पद पर तीन साल की जिम्मेदारी दी।
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2015 में कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें स्पेस मिशन की लॉन्चिंग रिव्यू टीम का सदस्य बनाया गया था। अब भी वह टीम के सदस्य हैं। चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग में उन्हें विशेष अनुरोध पर आमंत्रित किया गया था।
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37 साल तक इसरो में विभिन्न पदों पर काम करने वाले आर्यनगर निवासी विनोद शनिवार को घर लौट आए हैं। ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि चंद्रयान-2 ने दुनिया में इतिहास रच दिया है। बोले, लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने का मतलब यह नहीं है कि चंद्रयान-2 मिशन ही फेल हो गया है। लैंडर विक्रम इस मिशन का एक हिस्सा था।
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विनोद ने बताया कि 1982 में इसरो ज्वॉइन किया था। इसके बाद सभी अहम मिशन का हिस्सा रहे। उन्होंने ही इसरो का पहला रॉकेट सेफ्टी डिवीजन तैयार किया। 2011 में जब वह इसरो के सतीश धवन स्पेस सेंटर (एसडीएससी) में रेंज सेफ्टी ऑफिसर के महाप्रबंधक पद से रिटायर हुए तो इसरो ने कार्यकाल बढ़ाते हुए उन्हें साइंटिफिक एडवाइजर के पद पर तीन साल की जिम्मेदारी दी।
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2015 में कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें स्पेस मिशन की लॉन्चिंग रिव्यू टीम का सदस्य बनाया गया था। अब भी वह टीम के सदस्य हैं। चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग में उन्हें विशेष अनुरोध पर आमंत्रित किया गया था।
जीआईसी से पढ़े, कई नौकरियां भी कीं
विनोद ने आर्यनगर इंटर कॉलेज से 8वीं और फिर जीआईसी परेड से 12वीं तक की पढ़ाई की। वीएसएसडी कॉलेज से एमएससी केमिस्ट्री करने के बाद रायबरेली के फिरोज गांधी कॉलेज में लेक्चरर बन गए। फिर उन्हें डीआरडीओ के पुणे स्थित एक्सप्लोसिव रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैब में नौकरी मिल गई। इसके बाद इसरो हैदराबाद स्थित डीआरडीएल में नौकरी शुरू कर दी।
डीआरडीएल में डॉ. कलाम के साथ काम किया
विनोद बताते हैं कि हैदराबाद स्थित डीआरडीएल में उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के साथ भी काम किया। उन दिनों वह जमीन से हवा में वार करने वाली मिसाइल पर काम कर रहे थे। इस प्रोजेक्ट में उन्होंने करीब छह माह काम किया।
विनोद ने आर्यनगर इंटर कॉलेज से 8वीं और फिर जीआईसी परेड से 12वीं तक की पढ़ाई की। वीएसएसडी कॉलेज से एमएससी केमिस्ट्री करने के बाद रायबरेली के फिरोज गांधी कॉलेज में लेक्चरर बन गए। फिर उन्हें डीआरडीओ के पुणे स्थित एक्सप्लोसिव रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैब में नौकरी मिल गई। इसके बाद इसरो हैदराबाद स्थित डीआरडीएल में नौकरी शुरू कर दी।
डीआरडीएल में डॉ. कलाम के साथ काम किया
विनोद बताते हैं कि हैदराबाद स्थित डीआरडीएल में उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के साथ भी काम किया। उन दिनों वह जमीन से हवा में वार करने वाली मिसाइल पर काम कर रहे थे। इस प्रोजेक्ट में उन्होंने करीब छह माह काम किया।