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Kanpur News: मिट्टी का दम निकल रहा, इंसानों का घट रहा खून
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कानपुर। गंगा के मैदानी इलाकों की मिट्टी में आयरन, फॉलिक एसिड, बोरान, जिंक और फास्फोरस की कमी हो रही है। इससे लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है। खून की कमी का रोग एनीमिया के बढ़ने का एक यह भी कारण है। मिट्टी की खराब सेहत का दुष्प्रभाव सब्जियों, अनाज, कीट संसार, पशुओं के साथ मानव के स्वास्थ्य पर है। लोगों में खून की कमी हो रही है। उन्हें फूड सप्लीमेंट लेना पड़ रहा है। मानव की न्यूट्रीशनल सिक्योरिटी नया मुद्दा बनकर उभरा है।
भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान में मंगलवार को आयोजित राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस पल्सेस-2026 में न्यूट्रीशनल सिक्योरिटी को लेकर विज्ञानियों ने मंथन किया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक और केंद्रीय शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के पूर्व सचिव मंगला राय ने बताया कि मिट्टी में जिंक 50 प्रतिशत, बोरान 33 प्रतिशत, आयरन 13 प्रतिशत कम हो गया है। मिट्टी में इन तत्वों की कमी होने से सब्जियों, अनाज आदि में इन तत्वों की कमी हो जाती है। ऐसी सब्जियां, अनाज खाने से मानव में ये पोषक तत्व कम हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि खाने में आयरन की कमी होने से एनीमिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। लोगों को फूड सप्लीमेंट की जरूरत बढ़ गई है। इन तत्वों की कमी पूरा करने के लिए उन्हें अलग से टैबलेट लेनी पड़ती है। मिट्टी में सल्फर की भी मात्रा घटी है। इससे कीट संसार, पशु और मानव सभी प्रभावित हो रहे हैं। मिट्टी में पौष्टिकता की कमी का कारण रासायनिक खादों का बढ़ता इस्तेमाल है। मिट्टी के 10 पौष्टिक तत्व कम हुए हैं। गंगा का मैदानी इलाका इस स्थिति से अधिक प्रभावित हो रहा है। कॉन्फ्रेंस में आए अन्य विज्ञानियों ने मशविरा दिया कि दालों की पैदावार बढ़ाने से मिट्टी में पौष्टिक तत्व बढ़ेंगे।
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डॉ. मंगला राय ने बताया कि दालों की पैदावार देश में 270 लाख टन हो गई है। फिर भी 70 लाख टन की कमी है। चना ऑस्ट्रेलिया, अरहर कीनिया और कनाडा से मंगानी पड़ रही है। कभी कीनिया में दाल नहीं होती थी। इसके अलावा दूसरे अफ्रीकी देशों और म्यांमार से दालों का आयात किया जा रहा है।
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भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान में मंगलवार को आयोजित राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस पल्सेस-2026 में न्यूट्रीशनल सिक्योरिटी को लेकर विज्ञानियों ने मंथन किया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक और केंद्रीय शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के पूर्व सचिव मंगला राय ने बताया कि मिट्टी में जिंक 50 प्रतिशत, बोरान 33 प्रतिशत, आयरन 13 प्रतिशत कम हो गया है। मिट्टी में इन तत्वों की कमी होने से सब्जियों, अनाज आदि में इन तत्वों की कमी हो जाती है। ऐसी सब्जियां, अनाज खाने से मानव में ये पोषक तत्व कम हो जाते हैं।
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उन्होंने कहा कि खाने में आयरन की कमी होने से एनीमिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। लोगों को फूड सप्लीमेंट की जरूरत बढ़ गई है। इन तत्वों की कमी पूरा करने के लिए उन्हें अलग से टैबलेट लेनी पड़ती है। मिट्टी में सल्फर की भी मात्रा घटी है। इससे कीट संसार, पशु और मानव सभी प्रभावित हो रहे हैं। मिट्टी में पौष्टिकता की कमी का कारण रासायनिक खादों का बढ़ता इस्तेमाल है। मिट्टी के 10 पौष्टिक तत्व कम हुए हैं। गंगा का मैदानी इलाका इस स्थिति से अधिक प्रभावित हो रहा है। कॉन्फ्रेंस में आए अन्य विज्ञानियों ने मशविरा दिया कि दालों की पैदावार बढ़ाने से मिट्टी में पौष्टिक तत्व बढ़ेंगे।
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डॉ. मंगला राय ने बताया कि दालों की पैदावार देश में 270 लाख टन हो गई है। फिर भी 70 लाख टन की कमी है। चना ऑस्ट्रेलिया, अरहर कीनिया और कनाडा से मंगानी पड़ रही है। कभी कीनिया में दाल नहीं होती थी। इसके अलावा दूसरे अफ्रीकी देशों और म्यांमार से दालों का आयात किया जा रहा है।