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मातृभाषा की उन्नति के बिना समाज की तरक्की नहीं संभव

Fri, 27 Aug 2021 01:29 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 27 Aug 2021 01:29 AM IST
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The progress of society is not possible without the progress of mother tongue.
कानपुर देहात। मातृभाषा की उन्नति के बिना किसी भी समाज की तरक्की संभव नहीं है। हिंदी की जड़ें बहुत गहरी हैं। इसने वट वृक्ष के समान खुद को स्थापित किया है अब इसके संरक्षण की जरूरत है। तभी समाज का सही से विकास हो सकेगा। यह विचार जिले के अध्यापकों के हैं।
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शिक्षकों के अनुसार वर्तमान में युवा पीढ़ी को हिंदी के प्रति आकर्षित करने की जरूरत है। मातृभाषा की उपेक्षा कर आम बोलचाल में अंग्रेजी के शब्दों को इस्तेमाल करना आज के युवा गौरव की बात समझते हैं। ऐसे में जागरूक लोगों व अभिभावकों का दायित्व है कि वह मातृभाषा हिंदी के प्रति युवा पीढ़ी में प्रेम जागृत करें। उन्हें हिंदी का महत्व समझाएं।
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अंग्रेजी में बंद हो काम, हिंदी को मिले बढ़ावा
हिंदी को व्यवहार में लाने के लिए उसके अधिकाधिक प्रयोग की जरूरत है। सरकारी व गैर सरकारी विभागों में काफी कामकाज अंग्रेजी में होते हैं। अदालतों में फैसले या कामकाज की बात हो या फिर उच्च संस्थाओं में शिक्षण व्यवस्था की। सब जगह हिंदी अभी भी दूसरी भाषा के रुप में प्रयोग की जाती है। हिंदी के चलन को बढ़ावा देने के लिए मजबूत उपाय करने की जरुरत है। - आचार्य महेंद्र पीयूष, सेवानिवृत्त सहायक शिक्षक हिंदी, अकबरपुर इंटर कॉलेज
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हिंदी को सरल तरीके से किया जाए प्रयोग
हिंदी साहित्य से युवा पीढ़ी को जोड़ने के लिए जरूरी है कि भाषा की सहजता बनाए रखी जाए। भाषा की शुद्धता के प्रयास में कठिन शब्दों का प्रयोग होता है इससे युवा पीढ़ी की रुचि हिंदी के प्रति कम होने लगती है। ऐसे में ये ध्यान में रखा जाए कि हिंदी का सरल तरीके से प्रयोग हो। हिंदी राष्ट्र की सशक्त भाषा है। इसे समाज में उचित स्थान देना सभी का पहला कर्तव्य है। -नीरज यादव, हिंदी प्रवक्ता-रामप्रकाश पोरवाल महाविद्यालय राजपुर।
सख्त नियम बनाने की जरूरत
सभी देशों में लोग सबसे पहले अपनी भाषा और फिर विदेशी भाषा सीखते हैं, जबकि अपने देश में बच्चों को अभिभावक पहले अंग्रेजी सिखाने की कोशिश करते हैं। उन्हें याद रखना चाहिए कि देश के विकास में अपनी भाषा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अगर राष्ट्र को सशक्त बनाना है तो मातृभाषा के प्रयोग के लिए सख्त नियम बनाने होंगे। साहित्य से युवा पीढ़ी को जोड़ने की जरूरत है। -अखिलेश कुमार बाजपेई, हिंदी प्रवक्ता, भारतीय विद्यापीठ इंटर कॉलेज राजपुर

युवाओं के मन में पैदा करना होगा प्रेम
हिंदी ने ही साहित्य जगत को एक से बढ़कर एक साहित्यकार दिए हैं। उनकी रचनाओं ने हिंदी जगत को संस्कारित किया है। हिंदी के उत्थान की बात भर करने से काम नहीं चलेगा। युवाओं के मन में मातृभाषा के प्रति प्रेम पैदा करना होगा। ऐसे नियमों की जरूरत है कि देश के हर विभाग का कामकाज हिंदी में ही हो। अगर इस पर कठोर नियम बना दिए जाएं तो इसका सम्मान और बढ़ जाएगा। -संतोष पाठक, हिंदी प्रवक्ता- पंडित दीनदयाल उपाध्याय इंटर कालेज राजपुर
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