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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   The political crop of the family is flourishing on the land created by Kubera, women power is also not weak

UP: कुबेर की बनाई जमीन पर लहलहा रही परिवार की सियासी फसल, नारी शक्ति भी नहीं रही कमजोर...रखा मान

Sat, 23 Mar 2024 05:49 AM IST
हिमांशु अवस्थी आनंद मिश्रा, अमर उजाला, हरदोई
आनंद मिश्रा, अमर उजाला, हरदोई Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 23 Mar 2024 05:49 AM IST
सार

Hardoi News: कुबेरलाल ने अपने जुझारू तेवरों से पासी समाज में अलग पहचान बनाई और फिर कोथावां के ब्लॉक प्रमुख बनने में कामयाब रहे। मौजूदा समय में ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, विधायक और सांसद यह सारे पद उन्हीं के परिवार में हैं।

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The political crop of the family is flourishing on the land created by Kubera, women power is also not weak
कुबेर और परिवार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरदोई जिले के पासी समाज के बड़े नेता के रूप में पहचान बनाने वाले कुबेरलाल कभी विधायक या सांसद तो नहीं बने, लेकिन उनकी बनाई जमीन पर सियासत की फसल लहलहा रही है। कोथावां विकास खंड के अंतर्गत बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र में एक गांव है शाहपुर अटिया। इसी गांव में पैदा हुए कुबेरलाल ने अपने जुझारू तेवरों से पासी समाज में अलग पहचान बनाई और फिर कोथावां के ब्लॉक प्रमुख बनने में कामयाब रहे।

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इसके बाद उन्होंने अपने छोटे भाई रामपाल वर्मा को भी सियासत में उतारकर आगे कर दिया। मौजूदा समय में सबसे बड़ा राजनीतिक परिवार कुबेर का ही है। ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, विधायक और सांसद यह सारे पद उन्हीं के परिवार में हैं। कुल मिलाकर कुबेर ने जो राजनीतिक जमीन तैयार की उस पर पूरे परिवार की सियासी फसल शिद्दत से लहलहा रही है।

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रामपाल वर्मा
कुबेरलाल के छोटे भाई रामपाल वर्मा हैं। रामपाल वर्मा मौजूदा समय में बालामऊ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक हैं। रामपाल वर्मा इससे पहले तत्कालीन बेनीगंज विधानसभा सीट से भी कई बार विधायक रह चुके हैं। बसपा सरकार में राज्यमंत्री भी रह चुके हैं। रामपाल वर्मा 2022 के विधानसभा चुनाव में आठवीं बार विधायक चुने गए हैं, हालांकि वह बीच में कुछ चुनाव हारे भी हैं।

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अशोक रावत
कुबेरलाल के सगे भतीजे मिश्रिख से भाजपा प्रत्याशी अशोक रावत हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हुए थे। पार्टी ने उन्हें मिश्रिख से प्रत्याशी घोषित किया और वह चुनाव जीतने में सफल रहे। इससे पहले वर्ष 2004 और 2009 में भी मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र से बसपा के हाथी पर बैठकर दिल्ली का सफर कर चुके हैं। वर्ष 2014 का चुनाव भी वह बसपा के टिकट पर मिश्रिख से लड़े थे, लेकिन हार गए थे।

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प्रभाष कुमार
कुबेरलाल के बड़े बेटे प्रभाष कुमार हैं। प्रभाष कुमार लगातार दूसरी बार सांडी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते हैं। प्रभाष पूर्व में कोथावां के ब्लाक प्रमुख भी रह चुके हैं। प्रभाष की पत्नी यानी कुबेर की बड़ी बहू निरमा देवी न सिर्फ राजनीतिक तौर पर बल्कि सामाजिक तौर पर भी खासी सक्रिय रहती हैं। जरूरतमंदों की मदद करने के साथ ही महिला संगठनों में भागीदारी के चलते वह चर्चा में रहती हैं। कुबेर के छोटे बेटे संदीप भी जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं।

निर्भय वर्मा
कुबेरलाल के भतीजे हैं निर्भय वर्मा। विधायक रामपाल वर्मा के पुत्र निर्भय वर्मा लगातार तीसरी बार कोथावां के ब्लाक प्रमुख गतपंचायत चुनाव में निर्वाचित हुए थे। भाजपा प्रत्याशी के रूप में उनका निर्विरोध निर्वाचन हुआ था। जिस पद पर रहकर कुबेरलाल ने सियासी रसूख बनाया अब उसी पद पर रहकर निर्भय क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं और भविष्य के लिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर रहे हैं।

नारी शक्ति भी नहीं रही कमजोर, रखा कुबेर का मान
कुबेरलाल के परिवार में नारी शक्ति भी कमजोर नहीं रही। कुबेरलाल के निधन के बाद उनकी पत्नी देशपति लंबे समय तक ब्लॉक प्रमुख रहीं। वह जिला पंचायत की सदस्य भी रही थीं। उनका निधन हो चुका है। इसी तरह कुबेरलाल के छोटे भाई विधायक रामपाल वर्मा की पत्नी सरोजनी वर्मा अटियाशाहपुर की ग्राम प्रधान हैं। पूर्व में भी परिवार की महिलाएं ही प्रधान पद पर काबिज होती रही हैं।

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