{"_id":"67b398860cdbc9cee30d7e56","slug":"the-person-i-met-left-me-breathless-kanpur-news-c-362-1-ka11001-119518-2025-02-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: मिला जो उससे तो सांसें महक-महक उठी हैं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: मिला जो उससे तो सांसें महक-महक उठी हैं
विज्ञापन
कानपुर। सुलगती धूप में कोई शजर (वृक्ष) मिले न मिले... शायर फारुक जायसी ने जैसे ही यह शेर सुनाया तो हाॅल में तालियों संग खूब वाहवाही हुई। मौका था ऑल इंडिया ऑनलाइन तरही महाना मुशायरे के 50 महीने पूरे होने पर जश्ने गोल्डन जुबली मुशायरे के आयोजन का। रजबी रोड स्थित हॉल में अरबाबे फिकरो फन की ओर से हुए कार्यक्रम में शायरों ने समां बांध दिया।
मुशायरे की शुरुआत तिलावत-ए-कलाम पाक से कारी शफीकुल्लाह चिश्ती ने की। साबिर फरीदी, ताजीम शरफ फतेहपुरी, नूर सुल्तानपुरी, कारी मोनिस चिश्ती ने नातें पेश की। साबिर फरीदी ने मिला जो उससे तो सांसें महक-महक उठी हैं, ये खुशबुओं का मजा जाफरान में भी नहीं था सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।
हसीब अख्तर शाहिदी ने फिराके यार में छलका जो आसूं, मुझे लगता है वो भी जमजमी है, शेर पेश किया। वहीं, हसरत शफीपुरी ने है कतरा-कतरा उसी इंतेजार में, अब तक शरार भी तो कोई आबशार से निकले शेर सुनाया। डॉ. अर्शी पिहान्वी ने पहले तो मशवरों में लाए गए, तब कहीं जाके हम बनाए गए और कलीम दानिश बरकाती ने खुले सर फिर रही है शहरों-शहरों गजल पैसे कमाना चाहती है, सुनाया।
विज्ञापन
कार्यक्रम की अध्यक्षता शायर मौलाना मुफ्ती मोहम्मद हसीब अख्तर शाहिदी ने की। मुख्य अतिथि शहरकाजी मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साकिब अदीब मिस्बाही और विशिष्ट अतिथि फारुक जायसी, शारिक अल्वी, डॉ. मोईनुल इस्लाम, डॉ वसीउल्लाह अर्शी पिहान्वी, यावर वारसी शामिल रहे।
इस मौके पर लेखक हसरत शफीपुरी की किताब सुकूत का विमोचन भी किया गया, जो शायरी की किताब है। संचालन कारी मो. सगीर आलम हबीबी और कलीम दानिश बरकाती ने किया। यहां पर मंजूर आलम, जुबैर अहमद, हाजी शफीकुर्रहमान, असलम मकनपुरी, डॉ. नई जिया, इमरान आदि रहे।
विज्ञापन
मुशायरे की शुरुआत तिलावत-ए-कलाम पाक से कारी शफीकुल्लाह चिश्ती ने की। साबिर फरीदी, ताजीम शरफ फतेहपुरी, नूर सुल्तानपुरी, कारी मोनिस चिश्ती ने नातें पेश की। साबिर फरीदी ने मिला जो उससे तो सांसें महक-महक उठी हैं, ये खुशबुओं का मजा जाफरान में भी नहीं था सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।
विज्ञापन
हसीब अख्तर शाहिदी ने फिराके यार में छलका जो आसूं, मुझे लगता है वो भी जमजमी है, शेर पेश किया। वहीं, हसरत शफीपुरी ने है कतरा-कतरा उसी इंतेजार में, अब तक शरार भी तो कोई आबशार से निकले शेर सुनाया। डॉ. अर्शी पिहान्वी ने पहले तो मशवरों में लाए गए, तब कहीं जाके हम बनाए गए और कलीम दानिश बरकाती ने खुले सर फिर रही है शहरों-शहरों गजल पैसे कमाना चाहती है, सुनाया।
विज्ञापन
कार्यक्रम की अध्यक्षता शायर मौलाना मुफ्ती मोहम्मद हसीब अख्तर शाहिदी ने की। मुख्य अतिथि शहरकाजी मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साकिब अदीब मिस्बाही और विशिष्ट अतिथि फारुक जायसी, शारिक अल्वी, डॉ. मोईनुल इस्लाम, डॉ वसीउल्लाह अर्शी पिहान्वी, यावर वारसी शामिल रहे।
इस मौके पर लेखक हसरत शफीपुरी की किताब सुकूत का विमोचन भी किया गया, जो शायरी की किताब है। संचालन कारी मो. सगीर आलम हबीबी और कलीम दानिश बरकाती ने किया। यहां पर मंजूर आलम, जुबैर अहमद, हाजी शफीकुर्रहमान, असलम मकनपुरी, डॉ. नई जिया, इमरान आदि रहे।