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रोजगार के मौके बढ़ाने की जरूरत

Thu, 12 May 2016 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर Updated Thu, 12 May 2016 12:51 AM IST
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The need to increase employment opportunities
आईआईटी
कानपुर। आईआईटी में बुधवार को आयोजित ‘टेक्नोलॉजी डे’ में विशिष्ट वक्ता आईआईटी के पूर्व छात्र (1966 बैच) टेक्नोलाजिकल एसोसिएट्स लिमिटेड लखनऊ के सीएमडी विष्णु अग्रवाल ने  रोजगार के मौके बढ़ाने की जरूरत बताई।
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  उन्होंने ‘टेक्नोलॉजी एंड इन्नोवेशन-की टू इकोनामिक ग्रोथ’ के तहत उद्यमिता को जरूरी बताया। कहा कि सरकार सबके लिए रोजगार चाह रही है पर यह काफी कठिन काम है। देश में जनसंख्या लगातार बढ़ने से रोजगार की जरूरत बढ़ती जा रही है लेकिन इसकी तुलना में रोजगार के मौके बहुत कम हैं।  अभी 1.2 करोड़ लोगों को नौकरी की जरूरत है। ऐसे में रोजगार के मौके बढ़ाने की जरूरत है। यह कार्यक्रम 11 मई 1998 को भारत द्वारा किए गए सफल परमाणु परीक्षण (पोखरण-2),  प्रथम स्वदेशी एयरक्राफ्ट ‘हंस-3’ और ‘त्रिशूल मिसाइल’ के सफल परीक्षण की स्मृति में किया गया था।  इसमें मुख्य अतिथि भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बीएआरसी) मुंबई के पूर्व निदेशक डॉ. आरके सिन्हा ने ‘ट्रांसफारमिंग विजन इनटू रिएलिटी थ्रू साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारत में एटॉमिक एनर्जी और न्यूक्लियर रियेक्टर के सेफ्टी सिस्टम के बारे में भी बताया। कार्यक्रम में स्टूडेंटों ने मॉडल तैयार करके प्रदर्शनी भी लगाई। एचएएल लखनऊ के सीईओ राजीव कुमार ने ‘टेक्नोलॉजिस इनवाल्वड इन एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग’ विषय पर व्याख्यान दिया। इसके अलावा प्रोफेसर हर्षवर्द्धन वानरे, अमित कुंदल, प्रोफेसर एम.जलील अख्तर और चिराग झा ने पावर प्वाइंट पर अपना प्रेजेंटेशन दिया। अतिथियों का स्वागत निदेशक प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना और डिप्टी डायरेक्टर एके चतुर्वेदी ने किया।
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सरवाइकल कैंसर पहचानने के लिए डिवाइस
स्टूडेंट शिखा अहिरवार ने बताया कि डिवाइस में लेजर लाइट का उपयोग किया गया है। यह मशीन जीएसवीएम मेडिकल कालेज में लगाई गई है। इसमें टेस्ट और तकनीकी के उपयोग से सरवाइकल कैंसर की पहली स्टेज पता चलती है। शिखा ने मॉडल के जरिए बताया कि डब्लूएचओ के अनुसार विकासशील देशों में सरवाइकल कैंसर के केस बढ़ रहे हैं। इस डिवाइस को आईआईटी के बीएल मीना, एस. देवी, किरन पांडेय, ए. अग्रवाल, आसिमा प्रधान और शिखा ने तैयार किया है।
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साइकिल से ले जाएं सोलर पैनल
प्रोफेसर समीर खांडेकर के नेतृत्व में तैयार इस यूनिट में साइज में छोटे सोलर पैनल का प्रदर्शन किया गया। इसे आसानी से साइकिल पर रख कर कहीं भी ले जाया जा सकता है। इसे कहीं भी चार्ज कर सकते हैं। इसमें छह वोल्ट की बैट्री उपयोग की गई हैं। इससे पांच वाट की लाइट  9 से 12 घंटे तक जलाई जा सकती है।
यूएवी आयवोनिक इलेक्ट्रिक डिवाइस
चिड़िया की तरह आसमान में उड़ने वाली यह डिवाइस स्टूडेंट जॉयदीप भौमिक ने तैयार की। उन्होंने बताया कि इसे सेंसर लगाकर तैयार किया गया। यह चिड़िया की शक्ल में एक तरह का प्लेन है। कैमरे से लैस यह डिवाइस नक्शा खींचने, फोटो खींचने और खुफिया काम में उपयोग हो सकती है। बैटरी के जरिए इसे एक किमी तक भेजा जा सकता है।

फोर व्हील डिवाइस
डॉ. रामप्रसाद के निर्देशन में इसे तैयार करने वाले स्टूडेंट अरुणकांत सिंह और दिलीप कुमार ने बताया कि डिवाइस कार को अलग-अलग घुमाने के लिए तैयार की गई। इसमें चारों ओर मूव करने वाले पहिए, सेंसर और आठ मोटरों का उपयोग किया गया है। इसके जरिए ट्रैफिक में कार आसानी से मोड़ी जा सकती है।





 
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