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किसानों ने मांगा फसलों का मुआवजा

Thu, 16 Apr 2015 01:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर देहात
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर देहात Updated Thu, 16 Apr 2015 01:30 AM IST
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The farmers demanded compensation of crops
जिले में फसल बर्बाद होने के बाद किसानों में मुआवजे का मुद्दा जोर पकड़ता
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जा रहा है। बुधवार को विकास भवन में आयोजित किसान दिवस में किसानों ने अधिकारियों को फसल बर्बादी, लेखपाल द्वारा फसल बर्बादी का सर्वे न करने, ऋण माफी सहित अन्य समस्याएं बताई। इस दौरान अधिकारियों को फसल बर्बादी का दुखड़ा सुनाने के लिए किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा। किसान दिवस में 31 शिकायतें दर्ज कराई गई।

बुधवार को विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी राजकुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में किसान दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि जिले में बारिश व ओलावृष्टि के चलते किसानों की गेहूं, चना, मटर, राई, सरसों, आलू सहित अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। इसके लिए शासन स्तर से किसानों की बर्बाद फसलों का क्षति आकलन कर राहत राशि का वितरण कराया जा रहा है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि कि किसान दिवस में किसानों की लिखित शिकायतों को अधिकारी प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करें। किसान दिवस के दौरान उपकृषि निदेशक आरके तिवारी ने बताया कि बारिश व ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। जिसके लिए गांववार लेखपालों से राहत राशि का वितरण कराया जा रहा है।

किसान दिवस में पहुंचे किसानों ने मुख्य विकास अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों से फसल बर्बादी का दुखड़ा रोया। इस दौरान किसान विक्रांत कुमार निवासी जीरेपुर तहसील डेरापुर ने बताया कि उसने 22 बीघे में अरहर, धनियां, राई व चने की बुवाई की थी। फसल के लिए उसने बैंक आफ बड़ौदा से केसीसी के जरिये ऋण लिया था।

 बारिश व ओलावृष्टि के चलते उनकी पूरी फसल बर्बाद हो गई है। विक्रांत ने मुख्य विकास अधिकारी से फसल बर्बादी के चलते ऋण माफ करने की गुहार लगाई है। इसी प्रकार किसान रघुराज सिंह निवासी चौकी पुखरायां ने बताया कि उसका पंजाब नेशनल बैंक पुखरायां शाखा से केसीसी के जरिये 3 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ था। जिसमें उसने 2 लाख 20 हजार रुपये ऋण उठाया है। उसकी फसलों की प्रीमियम किश्त भी काटी जा चुकी है। वहीं बारिश व ओलावृष्टि से फसल बर्बादी के बाद उसे अभी तक किसी प्रकार की राहत राशि नहीं मिल सकी है।

वहीं किसान रामपाल सिंह भारतीय निवासी हिसाब ने बताया कि उसकी खरीफ फसल में भी सूखे के चलते अधिकांश फसल बर्बाद हो गई थी। जिसका अभी तक कोई मुआवजा नहीं मिला है। वहीं रबी फसल में खेतों में बोई गई गेहूं, जौ, चना, सरसों, अरहर की करीब 70 फीसदी से अधिक फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। उनकी बर्बाद फसलों का अभी तक लेखपाल ने सर्वे भी नहीं किया है। रामपाल ने मुख्य विकास अधिकारी से राहत दिलाए जाने गुहार लगाई।

इसी प्रकार किसान सुंदरलाल निवासी बिगाही ने बताया कि उनकी गेहूं की फसल 50 फीसदी से अधिक बर्बाद हो चुकी है। जबकि चने की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। इसी प्रकार धनियां व राई की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि उनकी बर्बाद फसल का क्षति आकलन करने के लिए लेखपाल व कानूनगो अभी तक गांव नहीं पहुंचे हैं। किसान दिनेश सिंह निवासी अंगदपुर ने बताया कि केसीसी में तीन वर्ष तक एक ही फसल चक्र की बाध्यता है। जिसे समाप्त किया जाए। डाढ़ापुर के किसान बृजेश सिंह ने लीड मैनेजर को शिकायती पत्र देते हुए बताया कि उसने बैंक आफ बड़ौदा से फसल के लिए बीमा कराया था। गत दिनों बारिश व ओलावृष्टि से उनकी फसल बर्बाद हो चुकी है। जिसका उन्हें अभी तक कोई मुआवजा नहीं मिला है।

इसी क्रम में देवब्रम्हापुर भोगनीपुर के किसान रणधीर सिंह ने बताया कि बड़ौदा ग्रामीण बैंक शाहजहांपुर से केसीसी से फसली ऋण होने की बात कही। उन्होंने सीडीओ से राहत सहायता दिलाए जाने की गुहार लगाई। इसी क्रम में नंदपुर डेरापुर के किसान मानसिंह ने बताया कि उसने स्टेट बैंक झींझक से केसीसी से गेहूं, चना, अरहर के लिए ऋण लिया। बारिश से फसल बर्बाद होने पर उन्हें अभी तक मुआवजा नहीं मिल सका है, जिसे दिलाया जाए।

बुधवार को किसान दिवस के दौरान फसल बर्बादी के चलते राहत दिलाए जाने व अन्य समस्या समाधान के लिए किसानों से विकास भवन सभागार खचाखच भरा रहा। इस दौरान किसानों ने 31 शिकायतें दर्ज कराई।


 इस मौके पर उपकृषि निदेशक आरके तिवारी, जिला कृषि अधिकारी रामसजीवन, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. विजयसिंह, लीड बैंक मैनेजर सुनीलचंद्र शुक्ला, अधिशाषी अभियंता विद्युत एनपी सिंह, कृषि वैज्ञानिक डा. अरविंद कुमार, सहायक अभियंता लघु सिंचाई, जिला उद्यान अधिकारी राजेंद्र कुमार, नेडा अधिकारी राधेश्याम, भूमि संरक्षण अधिकारी, भूमि सुधार निगम के अधिकारी मुकेश सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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