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Kanpur News: पशु पालक के पैर को जबड़े में दबाकर तीन मीटर घसीटकर नदी में खींच ले गया था मगरमच्छ

Sat, 09 Nov 2024 10:40 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Sat, 09 Nov 2024 10:40 PM IST
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The crocodile had pressed the animal keeper's leg in its jaws and dragged him three meters into the river.
इटावा/उदी। पशु पालक के पैर को जबड़े में दबाकर तीन मीटर घसीटकर मगरमच्छ ने अपना निवाला बनाया था। सेंक्चुरी विभाग व स्थानीय पुलिस की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद मोटर वोट से जाल डालकर क्षत-विक्षत शव देर रात नदी से बहार निकाल लिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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शुक्रवार को बढ़पुरा थाना क्षेत्र के खेड़ा अजब सिंह गांव निवासी जोर सिंह (35) पुत्र नाथूराम अपनी भैंस को चराने चंबल नदी के किनारे गया था। काफी देर तक घर न पहुंचने पर पिता चंबल किनारे दोपहर 12 बजे पहुंचे तब उन्हें जोर सिंह का गमछा वहां पड़ा दिखा।
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बड़े भाई रामचरण ने बताया कि वहीं कुछ दूरी पर पानी में शव के अवशेष मछली व कछुए खा रहे थे। तब पिता को आशंका हुई कि जोर सिंह को मगरमच्छ ने पानी में खींच लिया। पिता ने तुरंत गांव में आकर लोगों को बताया। जिसके बाद गांव के लोग इकट्ठे होकर घटना स्थल पर पहुंचे। जिस जगह गमछा मिला है वहां करीब तीन मीटर तक घसीटने के निशान भी मिले।
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सूचना पर पहुंची सेंक्चुरी व पुलिस ने रात करीब साढ़े नौ बजे घटना स्थल से 100 मीटर दूरी पर जाल लगाकर शव को बरामद कर लिया। जोर सिंह का एक पैर टूटा हुआ था। जिसमें मगरमच्छ के दांत के निशान दिखाई दे रहे थे। उसके दोनों हाथ और पेट का हिस्सा गायब था।
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पिछले दो साल में एक किशोरी व पशुओं को बना चुके निवाला
पिछले दो साल में कई पशुओं के साथ एक किशोरी को भी मगरमच्छ अपना निवाला बना चुके हैं। 12 मई 2022 में खेड़ा अजबसिंह निवासी किसान जगपत सिंह भदौरिया अपनी पुत्री शालू (14) को लेकर नदी किनारे बकरियों को पानी पिलाने के लिए लेकर गए थे। बकरियों के साथ शालू भी नदी किनारे पहुंची थी। तभी पानी में छिपे बैठे मगरमच्छ ने उस पर हमला बोल दिया था। जगपत सिंह ने उसे मगरमच्छ के चंगुल से छुड़ाने का प्रयास किया था। लेकिन उसे घायल कर दिया और पुत्री के पैर को जबड़े में दबाकर नदी में खींच ले गया था।

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जिस जगह हमला हुआ है। वहां मगरमच्छों व घड़ियालों की संख्या ज्यादा है। वहां से 500 मीटर दूर पश्चिम दिशा की ओर उनका नेस्टिंग एरिया भी है। चंबल नदी किनारे के पूरे क्षेत्र को प्रतिबंधित किया है, लेकिन फिर भी आसपास के ग्रामीण अनदेखी करते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं। - ओमप्रकाश वघेल, दरोगा, सेंक्चुरी विभाग
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