टेनरी विवाद: नारायण भदौरिया की जमानत अर्जी खारिज, भेजा गया जेल, एक थानेदार की भूमिका भी संदिग्ध
जाजमऊ टेनरी विवाद में भाजपा से निष्कासित नारायण सिंह भदौरिया को जेल भेज दिया गया। बता दें कि वह इस मामले में 16 जुलाई को गिरफ्तार हुआ था, लेकिन अदालत ने उसी दिन उसे अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। नारायण के खिलाफ नौ मुकदमे दर्ज हैं।
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कानपुर में नारायण सिंह भदौरिया पर पहले भी पुलिस अभिरक्षा से जबरन अभियुक्त को छुड़वाने और पुलिस के काम में बाधा पहुंचाने की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। टेनरी विवाद मामले में भी नारायण पर उपद्रव और गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज है। ऐसे में नारायण को जमानत नहीं दी जा सकती। इसी टिप्पणी के साथ प्रभारी मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट श्रद्धा त्रिपाठी ने नारायण की जमानत अर्जी खारिज कर दी। भाजपा के पूर्व जिला मंत्री नारायण भदौरिया को भारी सुरक्षा में जेल भेज दिया गया।
जाजमऊ में टेनरी पर कब्जे को लेकर हुए पारिवारिक विवाद में एक पक्ष की ओर से पहुंचे नारायण भदौरिया का वीडियो वायरल होने के बाद 16 जुलाई को उसकी गिरफ्तारी हुई थी। कोर्ट से उसे 26 जुलाई तक के लिए अंतरिम जमानत मिल गई थी। मंगलवार को नारायण कोर्ट में हाजिर हुआ। उसकी ओर से अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाए जाने की मांग की गई जबकि अभियोजन ने तर्क रखा कि नारायण के खिलाफ नौ मुकदमे दर्ज हैं।
उसका आपराधिक इतिहास है। जमानत मिली तो विवेचना में सहयोग नहीं करेगा और दोबारा अपराधों में शामिल होगा। पुलिस द्वारा कब्जेदारी के विवाद को बताते हुए धारा 327 की बढ़ोत्तरी की गई है। इसमें दस साल तक की सजा का प्रावधान है। वहीं नारायण की ओर से झूठा फंसाए जाने और विवेचना में नई धारा जोड़ने पर बचाव के लिए नया शपथपत्र देने का तर्क रखा गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत देने का आधार पर्याप्त न मानते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।
बवाल से पहले फ्लैट में हुई थी बैठक, 20 लाख एडवांस दिए थे
कानपुर। जाजमऊ स्थित शालीमार टेनरी पर कब्जे को लेकर हुए बवाल के मामले में एक और खुलासा हुआ है। बवाल से कुछ समय पहले नारायण सिंह भदौरिया ने बैठक की थी। इसमें एक भूमाफिया व प्रॉपर्टी डीलर भी शामिल हुआ था। बैठक स्वान टावर में स्थित प्रॉपर्टी डीलर के फ्लैट में हुई थी। सूत्रों के मुताबिक टेनरी पर कब्जा करने को लेकर नारायण और उसकी टीम को 20 लाख रुपये एडवांस दिए गए थे। तभी जाजमऊ में 13 जुलाई की शाम शालीमार टेनरी को लेकर भाजपाइयों व सपाइयों के बीच बवाल हो गया था।
एक थानेदार की भूमिका संदिग्ध
टेनरी मालिक का एक थानेदार बेहद खास है। सूत्रों के मुताबिक उसको पहले से जानकारी थी। इसके बाद भी उसने मामला दबाए रखा और कब्जा कराने में मदद भी की। इसके बदले में उसने मोटी रकम भी ली थी। चकेरी इंस्पेक्टर शैलेंद्र सिंह की वायरल फोटो से भी मामला और गहरा गया है।
विवाद शालीमार नहीं न्यू शालीमार टेनरी का
टेनरी पर कब्जा करने के विवाद में एक पक्ष (शहनाज जहां) ने मंगलवार को डीसीपी पूर्वी प्रमोद कुमार से मुलाकात की। शहनाज ने डीसीपी को बताया कि जिस शालीमार टेनरी की बीत कही जा रही है वह उनके कब्जे में कभी नहीं थी। उसी टेनरी के पास दूसरी संपत्ति है। जिसको न्यू शालीमार टेनरी के नाम से जानते हैं, उस पर दूसरे पक्ष ने कब्जा कर रखा है। 13 जुलाई को इसी न्यू शालीमार टेनरी पर लगे ताले को वह खोलने गई थी। उसी में विवाद हुआ था। डीसीपी ने बताया कि फिलहाल इस संपत्ति को सीज किया जाएगा। दोनों पक्षों को नोटिस भी जारी किया जाएगा। जो तथ्य हैं जांच में उनका सत्यापन किया जाएगा।
सीएम कार्यालय तक पहुंचा मामला
टेनरी विवाद प्रकरण सीएम कार्यालय तक पहुंच गया है। दूसरे पक्ष आमिर ने एक भाजपा विधायक को पूरा प्रकरण बताया था। विधायक के जरिये ही सीएम कार्यालय में शिकायत की गई है। इसमें शहनाज जहां वाले पक्ष पर आरोप लगाकर पुलिस को भी कटघरे में खड़ा किया गया है। पुलिस की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है।