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Kanpur News: छह माह में तीसरी बार अटका हाईवे के चौड़ीकरण का टेंडर
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कानपुर। नौबस्ता चौराहा से बिनगवां तक हाईवे का चौड़ीकरण होना है लेकिन पिछले छह माह से एनएचएआई टेंडर प्रक्रिया ही नहीं पूरी कर पाया है। अब एनएचएआई की ओर से तीसरी बाद टेंडर मांगे गए हैं जो एक जनवरी को खुलेंगे।
कानपुर-कबरई हाईवे पर नौबस्ता चौराहा से बिनगवां तक दो-दो लेन की सड़क है। हाईवे के दोनों तरफ लोगों ने कब्जा भी कर रखा है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति नौबस्ता चौराहा की है यहां दिनरात जाम रहता है और अक्सर हादसे भी होते हैं। इसे देखते हुए एनएचएआई ने 7.5 मीटर की सड़क को 10 मीटर का करने का प्रस्ताव मंत्रालय भेजा था। मंजूरी भी मिल गई लेकिन छह माह से टेंडर प्रक्रिया ही नहीं पूरी हो पा रही है। पहली बार जब टेंडर प्रक्रिया शुरू की तो मेट्रो का निर्माण कार्य चल रहा था। इस कारण से रोक दिया गया। दूसरी बार टेंडर में सिर्फ एक ही कंपनी ने प्रतिभाग लिया जबकि नियमानुसार तीन कंपनियों का भाग लेना अनिवार्य है। इस वजह से टेंडर निरस्त कर दिया गया। अब तीसरी बार फिर से एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ की ओर से टेंडर मांगे गए हैं। एनएचएआई के परियोजना निदेशक पंकज यादव का कहना है कि एक जनवरी तक टेंडर खुलेंगे।
नौबस्ता से हमीरपुर हाईवे पिछली साल सड़क हादसे के मामले में प्रदेश में पहले नंबर पर था। हालांकि, इस साल हादसों में गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में हाईवे का चौड़ीकरण होना बेहद जरूरी है।
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कानपुर-कबरई हाईवे पर नौबस्ता चौराहा से बिनगवां तक दो-दो लेन की सड़क है। हाईवे के दोनों तरफ लोगों ने कब्जा भी कर रखा है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति नौबस्ता चौराहा की है यहां दिनरात जाम रहता है और अक्सर हादसे भी होते हैं। इसे देखते हुए एनएचएआई ने 7.5 मीटर की सड़क को 10 मीटर का करने का प्रस्ताव मंत्रालय भेजा था। मंजूरी भी मिल गई लेकिन छह माह से टेंडर प्रक्रिया ही नहीं पूरी हो पा रही है। पहली बार जब टेंडर प्रक्रिया शुरू की तो मेट्रो का निर्माण कार्य चल रहा था। इस कारण से रोक दिया गया। दूसरी बार टेंडर में सिर्फ एक ही कंपनी ने प्रतिभाग लिया जबकि नियमानुसार तीन कंपनियों का भाग लेना अनिवार्य है। इस वजह से टेंडर निरस्त कर दिया गया। अब तीसरी बार फिर से एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ की ओर से टेंडर मांगे गए हैं। एनएचएआई के परियोजना निदेशक पंकज यादव का कहना है कि एक जनवरी तक टेंडर खुलेंगे।
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नौबस्ता से हमीरपुर हाईवे पिछली साल सड़क हादसे के मामले में प्रदेश में पहले नंबर पर था। हालांकि, इस साल हादसों में गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में हाईवे का चौड़ीकरण होना बेहद जरूरी है।
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