{"_id":"6aa9b3c080d06541c001d38d","slug":"tempered-in-the-heat-of-the-coal-crisis-iron-prices-have-risen-by-35-percent-kanpur-news-c-12-1-knp1053-1651804-2026-09-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: कोयला संकट की आंच में तपा लोहा, 35 फीसदी बढ़े दाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: कोयला संकट की आंच में तपा लोहा, 35 फीसदी बढ़े दाम
विज्ञापन
कानपुर। लोहे और इस्पात उत्पादों के दामों में दो महीने के भीतर 30 से 35 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस वृद्धि से लोहे के उत्पादकों और व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है। अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते कोयला आपूर्ति में कमी आने से उत्पादन प्रभावित हुआ है। इससे भावों में तेजी आ रही है।
कानपुर परिक्षेत्र में लोहा कारोबार सौ वर्ष से भी अधिक पुराना है। यहां सरिया, ऐंगल, तार जाली, चैनल, गर्डर और फैब्रिकेटेड लोहे का बड़े स्तर पर उत्पादन होता था। पहले करीब 60 से अधिक इकाइयां थीं, जो अब घटकर चार बड़ी इकाइयों तक सीमित रह गई हैं। वर्ष 2022 से जुलाई 2026 तक लोहे के दाम लगभग 40 फीसदी गिर गए थे। सरकारी नीतियों, विदेशी आयात और बाजार में मांग की कमी इसके प्रमुख कारण थे। इस गिरावट से कई उद्यमियों और व्यापारियों की पूंजी समाप्त हो गई थी।
28 फरवरी 2026 से अमेरिका-ईरान युद्ध फिर बढ़ गया है। युद्धों के कारण बड़ी इस्पात कंपनियों का निर्यात प्रभावित हुआ। अमेरिका और ईरान के युद्ध से लोहा, स्क्रैप और कोयले के आयात में कठिनाई हुई। मई 2026 से पूरे भारत में अधिक बारिश के कारण खदानों में पानी भरने से कोयले की आपूर्ति बाधित हुई। इन सभी कारणों से लोहे के दामों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- --
प्रमुख लोहे उत्पादों के दाम
सरिया 75,000 रुपये प्रति टन, एच आर क्वाइल 74,000 रुपये प्रति टन, प्रोफाइल चादर 1,25,000 रुपये प्रति टन, काली चादर 77,000 रुपये प्रति टन और एंगल, चैनल, गर्डर 65,000 रुपये प्रति टन।
-- -- -- -- -- --
बातचीत
चार साल से लोहा की कीमतों में गिरावट चल रही थी। दो महीनों से भावों में तेजी आनी शुरू हुई है। इससे कारोबारियों को राहत मिली है। कोयला संकट के चलते भाव बढ़ रहे हैं। - प्रदीप केड़िया, लोहा निर्माता और संरक्षक इस्पातनगर चैप्टर।
-- -- -- -
मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के कारण उत्पादन कम हुआ, होर्मुज जलडमरूमध्य के कभी खुलने, कभी बंद होने से बाहरी आयातकों के लिए माल मंगाना महंगा हो गया है। अब भावों में भी स्थिरता और तेजी देखने को मिल रही है। - अरुण ओमर, अध्यक्ष, लोहा व्यापार समिति।
-- -- -- -- --
विज्ञापन
कानपुर परिक्षेत्र में लोहा कारोबार सौ वर्ष से भी अधिक पुराना है। यहां सरिया, ऐंगल, तार जाली, चैनल, गर्डर और फैब्रिकेटेड लोहे का बड़े स्तर पर उत्पादन होता था। पहले करीब 60 से अधिक इकाइयां थीं, जो अब घटकर चार बड़ी इकाइयों तक सीमित रह गई हैं। वर्ष 2022 से जुलाई 2026 तक लोहे के दाम लगभग 40 फीसदी गिर गए थे। सरकारी नीतियों, विदेशी आयात और बाजार में मांग की कमी इसके प्रमुख कारण थे। इस गिरावट से कई उद्यमियों और व्यापारियों की पूंजी समाप्त हो गई थी।
विज्ञापन
28 फरवरी 2026 से अमेरिका-ईरान युद्ध फिर बढ़ गया है। युद्धों के कारण बड़ी इस्पात कंपनियों का निर्यात प्रभावित हुआ। अमेरिका और ईरान के युद्ध से लोहा, स्क्रैप और कोयले के आयात में कठिनाई हुई। मई 2026 से पूरे भारत में अधिक बारिश के कारण खदानों में पानी भरने से कोयले की आपूर्ति बाधित हुई। इन सभी कारणों से लोहे के दामों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
विज्ञापन
प्रमुख लोहे उत्पादों के दाम
सरिया 75,000 रुपये प्रति टन, एच आर क्वाइल 74,000 रुपये प्रति टन, प्रोफाइल चादर 1,25,000 रुपये प्रति टन, काली चादर 77,000 रुपये प्रति टन और एंगल, चैनल, गर्डर 65,000 रुपये प्रति टन।
बातचीत
चार साल से लोहा की कीमतों में गिरावट चल रही थी। दो महीनों से भावों में तेजी आनी शुरू हुई है। इससे कारोबारियों को राहत मिली है। कोयला संकट के चलते भाव बढ़ रहे हैं। - प्रदीप केड़िया, लोहा निर्माता और संरक्षक इस्पातनगर चैप्टर।
मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के कारण उत्पादन कम हुआ, होर्मुज जलडमरूमध्य के कभी खुलने, कभी बंद होने से बाहरी आयातकों के लिए माल मंगाना महंगा हो गया है। अब भावों में भी स्थिरता और तेजी देखने को मिल रही है। - अरुण ओमर, अध्यक्ष, लोहा व्यापार समिति।