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Kanpur News: आईआईटी के साइबर विशेषज्ञों की टीम हैकरों को सिखाएगी सबक
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कानपुर। डिजिटल अरेस्ट, ठगी, हैकिंग समेत साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं पर आईआईटी कानपुर ने कमर कसी है। यहां साइबर विशेषज्ञों की पूरी टीम तैयार की जाएगी, जो साइबर अपराध को रोकने के साथ अपराधियों पर नकेल कसेगी। संस्थान में जुलाई से चार वर्षीय बैचलर ऑफ साइबर सिक्योरिटी प्रोग्राम शुरू हो रहा है। प्रवेश जेईई मेन की रैंक, लिखित परीक्षा और हैकाथॉन से होगा।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की बढ़ती आवश्यकता पर कोर्स तैयार हुआ है। कोर्स में प्रवेश प्रक्रिया पारंपरिक इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों से अलग होगी। अभ्यर्थियों का चयन पहले जेईई मेन के अंकों और साइबर सुरक्षा क्षेत्र में उनके पूर्व कार्यों के आधार पर किया जाएगा। प्रारंभिक छंटनी के बाद चयनित उम्मीदवारों को आईआईटी कानपुर परिसर में आयोजित व्यक्तिगत परीक्षा और हैकाथॉन में भाग लेना होगा। कोर्स के लिए 60 सीटें निर्धारित की गई हैं।
निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। भविष्य के युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि साइबर स्पेस में भी लड़े जाएंगे। पहले दो वर्षों में छात्रों को संस्थान में रहकर साइबर सुरक्षा से जुड़े सैद्धांतिक विषयों का गहन अध्ययन कराया जाएगा। प्रयोगशालाओं में व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। अगले दो वर्षों में छात्रों को विभिन्न सरकारी सुरक्षा संगठनों में इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा।
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संचालन संस्थान के वाधवानी स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स द्वारा किया जाएगा। स्कूल के डीन प्रो. नितिन सक्सेना ने कहा कि जल्द ही इस कार्यक्रम के लिए एक समर्पित वेबपेज भी लांच करने जा रहा है, जहां प्रवेश प्रक्रिया और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध होंगी। इसमें वर्ष 2025 ओर 26 के जेईई मेन्स के छात्र शामिल हो सकते हैं।
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साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की बढ़ती आवश्यकता पर कोर्स तैयार हुआ है। कोर्स में प्रवेश प्रक्रिया पारंपरिक इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों से अलग होगी। अभ्यर्थियों का चयन पहले जेईई मेन के अंकों और साइबर सुरक्षा क्षेत्र में उनके पूर्व कार्यों के आधार पर किया जाएगा। प्रारंभिक छंटनी के बाद चयनित उम्मीदवारों को आईआईटी कानपुर परिसर में आयोजित व्यक्तिगत परीक्षा और हैकाथॉन में भाग लेना होगा। कोर्स के लिए 60 सीटें निर्धारित की गई हैं।
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निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। भविष्य के युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि साइबर स्पेस में भी लड़े जाएंगे। पहले दो वर्षों में छात्रों को संस्थान में रहकर साइबर सुरक्षा से जुड़े सैद्धांतिक विषयों का गहन अध्ययन कराया जाएगा। प्रयोगशालाओं में व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। अगले दो वर्षों में छात्रों को विभिन्न सरकारी सुरक्षा संगठनों में इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा।
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संचालन संस्थान के वाधवानी स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स द्वारा किया जाएगा। स्कूल के डीन प्रो. नितिन सक्सेना ने कहा कि जल्द ही इस कार्यक्रम के लिए एक समर्पित वेबपेज भी लांच करने जा रहा है, जहां प्रवेश प्रक्रिया और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध होंगी। इसमें वर्ष 2025 ओर 26 के जेईई मेन्स के छात्र शामिल हो सकते हैं।