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जेल के बाद जीने का सिखाती हैं जज्बा
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Fri, 16 Oct 2015 02:13 AM IST
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ये हैं संगीता अग्रवाल
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शिक्षा-बीएससी एलएलबी, संगीत विशारद
वर्तमान में ‘बंधन’ संस्था के साथ महिलाओं के लिए काम कर रही हैं, स्वरूप नगर में पति और दो बेटों व परिवार के साथ रह रही हैं। समय-समय पर महिलाओं की आर्थिक सहायता भी करती हैं।
संगीता एक बिल्डर परिवार की बहू हैं। पर, समाजसेवा में तत्पर संगीता हमेशा से जीवन में कुछ ऐसा करना चाहती थी जिससे उन महिलाओं को सहायता मिलें जो जेल में अपना जीवन काट रही हैं।
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ऐसी मायूस महिलाओं को वे काउंसिलिंग देकर जेल के बाद फिर से जीने का जज्बा सिखाती हैं। संगीता का पूरा समय इन महिलाओं को समर्पित रहता है।
वह अपनी पेपर फैक्ट्री से जेल की कैदी महिलाओं को निशुल्क पेपर पहुंचा कर उनसे कागज के थैले बनवाती हैं और उन्हें चिड़ियाघर में लोगों को देकर वह पैसा वापस जेल के कैदियों तक पहुंचाती हैं। उन्होंने बताया कि इससे उन्हें खुशी मिलती है।
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इसके साथ ही संगीता महिला कैदियों की समस्याएं, बुजुर्ग महिला कैदियों के स्वास्थ्य का ध्यान भी रखती हैं। कानपुर में जन्मी संगीता स्वरूप नगर में अपने परिवार के साथ रहती हैं।
संगीता ने जीटी रोड में महर्षि बाल्मीकि स्कूल में बच्चियों के लिए बाथरूम भी बनवाया है। इसके अलावा कमजोर बच्चों के लिए खुले गर्ग पब्लिक स्कूल (स्कूल संगीता के पूर्वजों ने बनाया था) को गोद लेकर बच्चों को सामाजिकता और भारतीय संस्कृति के बारे में बताती हैं।
संगीता का कहना है कि समाज में क्लबों और बड़े-बड़े घरानों से ताल्लुक रखने वाली महिलाओं को आगे बढ़ कर समाजसेवा में हाथ बंटाना चाहिए।