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‘मेरे गीतों में बसता गांव और देहात की छांव’

Thu, 01 Jan 2015 02:41 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर Updated Thu, 01 Jan 2015 02:41 AM IST
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sukhvinder singh in kanpur
छइयां, छइयां, छइयां, छइयां, चक दे... ओ चक दे इंडिया, हौले हौले से हवा चलती है...जय हो....जैसे न जाने कितने सुपरहिट गीत गाने वाले बॉलीवुड स्टार सिंगर सुखविंदर सिंह ‘सुक्खी’ अपने देश की मिट्टी से उसी तरह जुड़े हैं जैसे बगिया में पेड़ जुड़े होते हैं।
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वे कहते हैं मेरे गानों में आपको देसी-देहाती टच देखने को मिलेगा। गानों को रूह से महसूस करता हूं, तभी इसे लिखता या गाता हूं।

उनका ‘बॉलीवुडिया मिक्स हॉलीवुडिया’ अंदाज जल्द ही दर्शकों के सामने होगा। यह अभिनव प्रयोग उन्होंने  हॉलीवुड के गानों को बॉलीवुड स्टाइल में गाकर किया है।
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पहली बार ये खुलासा स्वयं सुखविंदर सिंह ने अमर उजाला से  किया। बुधवार को ‘अमर उजाला’ आफिस आए सुखविंदर ने दिल खोल कर बातें कीं।

अपनी पसंद-नापसंद और फ्यूचर की प्लानिंग को शेयर किया। सुखविंदर ने कुछ गाने भी गुनगुनाये। आजा आजा दिल निचोड़ें....जय हो.....छइयां छइयां गीतों को गुनगुनाया।
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अमर उजाला फाउंडेशन के ब्लड डोनेशन कैंपेन की सराहना करते हुए सुखविंदर ने सभी से ब्लड डोनेट करने के लिए कहा। बोले, आपका दिया हुआ खून लोगों की जिंदगी बचा सकता है तो बड़े स्तर पर ब्लड डोनेट करें।  

सुखविंदर ने बताया कि विदेशी गाने को देसी अंदाज में गाने का मौका इंग्लिश प्ले ‘मानसून वेडिंग’ में मिला है, इस इंग्लिश प्ले में हॉलीवुड के टॉप एक्टर-एक्ट्रेस शामिल हैं।

सुखविंदर कहते हैं कि प्ले के लिए जब मुझसे अंग्रेजी गाने के लिए अप्रोच किया गया तो मैं सोच में पड़ गया कि किस तरह से गाऊं।

कुछ नया ट्राई करना चाहता था...हंसते हुए बोले कि अंग्रेजों के बीच में उन्हीं की तरह गाना मतलब अंग्रेजों को ही पिज्जा खिलाना था। सोचा, अगर कैची बनाना है तो क्यों न पराठा खिलाया जाए...।

इसलिए तय किया कि अंग्रेजी गाने को देसी राग में गाऊंगा। इसके अलावा वाल्ट डिज्नी की फिल्म ‘मिलियन डॉलर आर्म्स’ के कई गीत भी लिखे हैं।

सुखविंदर कहते हैं कि फिल्म हैदर के  बिस्मिल्लाह....गीत लिखने की प्रेरणा एक  रेलवेफाटक वाले के देसी अंदाज से मिली तो देहात में लोग रमता जोगी बोलते हैं जिसे ताल फिल्म के रमता जोगी....गीत में उतारा।

हिमाचल के लोगों की बोली बन टन चली को अपने गीत बण टण चली देखो....में लिया है। उन्होंने कहा कि फैशन का ये है जलवा....गीत में भी मैक्सिकन देहात का टच दिया गया है।


दरगाह शरीफ जाता था...वहां लोग थइया थइया करते थे उसे छइया छइया में लिया। अगर गांव के गीतों को ग्लैमराइज कर दिया जाए तो भारत का क्लासिकल भी वेस्टर्न क्लासिकल ओपेरा की तरह प्रेजेंट होगा।
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