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आत्महत्या करने वाले मजदूर को तीन महीने से नहीं मिला था राशन
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थाना काकादेव ....राजा पुरवा में मृतक मजदूर विजय बहादुर की फाइल फोटो
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कानपुर। काकादेव के राजापुरवा में आत्महत्या करने वाले मजदूर विजय बहादुर को तीन महीने से सरकारी राशन नहीं मिला था। करीब 15 दिन पहले बच्चों को भूख से बिलखता देख उसने पड़ोस में रहने वाली आंटी से रुपये उधार लेकर पांच किलो आटा खरीदा था। छह लोगों के परिवार के बीच आटा तीन-चार दिन भी नहीं चल सका।
मूलरूप से गोरखपुर निवासी विजय बहादुर (40) पत्नी रंभा के साथ बेटे शिवम, शुभम, रवि और बेटी अनुष्का के साथ राजापुरवा की डूडा कॉलोनी में रहता था। रंगाई पुताई का काम लॉकडाउन की वजह से बंद हुआ तो परिवार पर भुखमरी का संकट आ गया। इससे आहत होकर बुधवार को उसने फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। पत्नी रंभा ने बताया कि तीन माह पूर्व खाद्य आपूर्ति विभाग ने राशन कार्ड कैंसिल कर दिया था। इस पर विजय ने पार्षद और स्थानीय नेताओं से भी कई बार गुहार लगाई थी पर कार्ड नहीं बन सका। कलक्ट्रेट का भी चक्कर लगाया पर मदद नहीं मिली। बताया कि अभी तक न तो प्रशासन का कोई अफसर तक सुध लेने नहीं पहुंचा। हालांकि स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं।
वहीं काकादेव पुलिस ने शुक्रवार को उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट दी, जिसमें पारिवारिक कलह को आत्महत्या की वजह बताया। इंस्पेक्टर कौशल किशोर दीक्षित ने रिपोर्ट में बताया कि आर्थिक तंगी की वजह से विजय पत्नी से मारपीट करता था, लेकिन राशन की कमी नहीं थी। घटना वाले दिन पत्नी ने खाना बनाने से इंकार किया तो विजय ने मजबूरी में मैगी बनाकर खाई, इसलिए उसने आत्महत्या कर ली। इस रिपोर्ट से आक्रोशित स्थानीय लोगों का कहना है कि लॉकडाउन में थानेदार एक बार भी बस्ती में नहीं आए। अब मनगढ़ंत रिपोर्ट बनाकर जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
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मूलरूप से गोरखपुर निवासी विजय बहादुर (40) पत्नी रंभा के साथ बेटे शिवम, शुभम, रवि और बेटी अनुष्का के साथ राजापुरवा की डूडा कॉलोनी में रहता था। रंगाई पुताई का काम लॉकडाउन की वजह से बंद हुआ तो परिवार पर भुखमरी का संकट आ गया। इससे आहत होकर बुधवार को उसने फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। पत्नी रंभा ने बताया कि तीन माह पूर्व खाद्य आपूर्ति विभाग ने राशन कार्ड कैंसिल कर दिया था। इस पर विजय ने पार्षद और स्थानीय नेताओं से भी कई बार गुहार लगाई थी पर कार्ड नहीं बन सका। कलक्ट्रेट का भी चक्कर लगाया पर मदद नहीं मिली। बताया कि अभी तक न तो प्रशासन का कोई अफसर तक सुध लेने नहीं पहुंचा। हालांकि स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं।
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वहीं काकादेव पुलिस ने शुक्रवार को उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट दी, जिसमें पारिवारिक कलह को आत्महत्या की वजह बताया। इंस्पेक्टर कौशल किशोर दीक्षित ने रिपोर्ट में बताया कि आर्थिक तंगी की वजह से विजय पत्नी से मारपीट करता था, लेकिन राशन की कमी नहीं थी। घटना वाले दिन पत्नी ने खाना बनाने से इंकार किया तो विजय ने मजबूरी में मैगी बनाकर खाई, इसलिए उसने आत्महत्या कर ली। इस रिपोर्ट से आक्रोशित स्थानीय लोगों का कहना है कि लॉकडाउन में थानेदार एक बार भी बस्ती में नहीं आए। अब मनगढ़ंत रिपोर्ट बनाकर जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
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