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दूध का कर्ज न चुका पाने पर श्रमिक ने फांसी लगा जान दी
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सरवनखेड़ा (कानपुर देहात)। पतरा गांव में दूध के रुपये न चुका पाने पर श्रमिक ने फांसी लगाकर जान दे दी। चार माह के बच्चे के लिए दूधिया से दूध खरीदा था, लेकिन रुपये नहीं दे पा रहा था। वह तगादा करने से परेशान हो गया था। रक्षाबंधन पर घर से यह कहकर निकला था कि रुपयों का इंतजाम करके लौटेगा। इसके बाद गुरुवार को खेत पर शव लटका मिला। पुलिस ने मानसिक रूप से अस्वस्थ होने की भी बात कही है।
पतरा गांव निवासी अरुण उर्फ लाला (30) का शव बबूल के पेड़ से मफलर के सहारे लटका मिला। ग्रामीणों ने बताया कि पत्नी सुदीपा व चार माह के बेटे के साथ अरुण गांव में रहकर मजदूरी करके परिवार पाल रहा था। वह बच्चे के लिए दूध लेता था। दूध का एक हजार रुपये बकाया हो गया था। रक्षाबंधन से पहले दूधिया ने तगादा किया था। वह रक्षाबंधन के दिन रुपयों का इंतजाम करने की बात कह घर से निकल गया था। गुरुवार को शव उसके खेत में पेड़ से लटका मिला। जानकारी पर पत्नी बिलखती हुई पहुंची। पामा चौकी के दरोगा चंद्रभूषण सिंह भदौरिया ने बताया कि अरुण मानसिक रूप से अस्वस्थ था। हर छोटी बात को गंभीरता से लेकर परेशान हो जाता था।
पत्नी बोली, छोटी से बात पर दे दी जान
दूधिया के तगादा करने से परेशान होकर अरुण ने पत्नी सुदीपा से रुपयों का इंतजाम करके आने की बात कही थी। अरुण के पास जॉब कार्ड है। वह मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण कर रहा था। पत्नी को उम्मीद थी कि वह दो-तीन दिन मजदूरी करके कुछ रुपये लेकर आ जाएगा। पत्नी को जानकारी मिली थी कि वह खेतों पर बनी झोपड़ी में ठहरा है। पत्नी ने सोचा की तगादा से बचने के लिए वह खेतों पर हैं। गुरुवार को उसे आत्महत्या की जानकारी मिली तो वह बेसुध हो गई। उसने कहा यह सोचा भी नहीं था कि इतनी छोटी बात पर वह जान दे देंगे।
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तीन भाइयों के बीच दो बीघा जमीन
अरुण उर्फ लाला का एक भाई अरविंद बेसिक शिक्षा विभाग में रायबरेली में शिक्षक है। दूसरा भाई राम किशन रेलवे में इंजीनियर है। माता-पिता राम किशन के साथ रहते हैं। सरकारी सेवारत दोनों भाई अरुण से ज्यादा मतलब नहीं रखते थे। ग्रामीणों की माने तो सरकारी सेवा में होने के बावजूद वह खेती से होने वाली आमदनी लेते थे। अरुण के पास जॉब कार्ड होने के साथ राशन कार्ड है। उसे इंदिरा आवास भी मिल चुका है।
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पतरा गांव निवासी अरुण उर्फ लाला (30) का शव बबूल के पेड़ से मफलर के सहारे लटका मिला। ग्रामीणों ने बताया कि पत्नी सुदीपा व चार माह के बेटे के साथ अरुण गांव में रहकर मजदूरी करके परिवार पाल रहा था। वह बच्चे के लिए दूध लेता था। दूध का एक हजार रुपये बकाया हो गया था। रक्षाबंधन से पहले दूधिया ने तगादा किया था। वह रक्षाबंधन के दिन रुपयों का इंतजाम करने की बात कह घर से निकल गया था। गुरुवार को शव उसके खेत में पेड़ से लटका मिला। जानकारी पर पत्नी बिलखती हुई पहुंची। पामा चौकी के दरोगा चंद्रभूषण सिंह भदौरिया ने बताया कि अरुण मानसिक रूप से अस्वस्थ था। हर छोटी बात को गंभीरता से लेकर परेशान हो जाता था।
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पत्नी बोली, छोटी से बात पर दे दी जान
दूधिया के तगादा करने से परेशान होकर अरुण ने पत्नी सुदीपा से रुपयों का इंतजाम करके आने की बात कही थी। अरुण के पास जॉब कार्ड है। वह मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण कर रहा था। पत्नी को उम्मीद थी कि वह दो-तीन दिन मजदूरी करके कुछ रुपये लेकर आ जाएगा। पत्नी को जानकारी मिली थी कि वह खेतों पर बनी झोपड़ी में ठहरा है। पत्नी ने सोचा की तगादा से बचने के लिए वह खेतों पर हैं। गुरुवार को उसे आत्महत्या की जानकारी मिली तो वह बेसुध हो गई। उसने कहा यह सोचा भी नहीं था कि इतनी छोटी बात पर वह जान दे देंगे।
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तीन भाइयों के बीच दो बीघा जमीन
अरुण उर्फ लाला का एक भाई अरविंद बेसिक शिक्षा विभाग में रायबरेली में शिक्षक है। दूसरा भाई राम किशन रेलवे में इंजीनियर है। माता-पिता राम किशन के साथ रहते हैं। सरकारी सेवारत दोनों भाई अरुण से ज्यादा मतलब नहीं रखते थे। ग्रामीणों की माने तो सरकारी सेवा में होने के बावजूद वह खेती से होने वाली आमदनी लेते थे। अरुण के पास जॉब कार्ड होने के साथ राशन कार्ड है। उसे इंदिरा आवास भी मिल चुका है।