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Kanpur: विवि में अब छात्र पढ़ सकेंगे जैन दर्शन और प्राकृत भाषा, 18 क्रेडिट का होगा कोर्स…डिप्लोमा भी शुरू

Thu, 20 Jun 2024 03:51 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 20 Jun 2024 03:51 PM IST
सार

Kanpur News: छह महीने से लेकर दो साल तक के लिए जैन दर्शन में सर्टिफिकेट कोर्स, प्राकृत भाषा और अप्रभंश के सर्टिफिकेट कोर्स की शुरुआत होगी। 18 क्रेडिट का कोर्स होगा। इसी क्रम में डिप्लोमा कोर्स भी शुरुआत की गई है।

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students will be able to study Jain philosophy-Prakrit language in university, course will be of 18 credits
kanpur university - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विवि में अब छात्र जैन दर्शन, प्राकृत भाषा और अप्रभंश भाषा की पढ़ाई कर सकेंगे। छात्रों को इन विषयों में सर्टिफिकेट और डिप्लोमा दिया जाएगा। इसके लिए विवि में 20 जून को आचार्य विद्यासागर, सुधासागर जैन शोध पीठ की स्थापना की जाएगी। जैन शोध पीठ की स्थापना के बाद से छात्र जैन धर्म पर शोध भी कर सकेंगे।

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विवि में बुधवार को आयोजित प्रेसवार्ता में प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी, कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार यादव ने बताया कि इसके अलावा विवि में जल्द परास्नातक में जैन गणित, जैन इतिहास, खगोलशास्त्र जैसे कोर्स की शुरुआत की जाएगी। जैन धर्म के साहित्य, समाज, पूजन के बारे में विस्तार से जानकारी देने के उद्देश्य से जैन शोध पीठ की स्थापना की जाएगी।
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प्रो. सुधीर ने बताया कि जैन शोध की स्थापना जैन समाज के लोगों की आर्थिक मदद से संभव हुई है। 25 लाख रुपये का कॉरपस फंड एकत्र किया गया है। उन्होंने बताया शुरुआत में केवल 300 सीटों पर प्रवेश होगा। प्रवेश प्रक्रिया इसी जुलाई से शुरू हो जाएगी। 20 को इस पीठ की स्थापना कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक करेंगे। शुभारंभ के दौरान कुछ पुरानी प्रति लिपियों की भी प्रदर्शनी लगाई जाएगी।

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एकेडमिक काउंसिल में रखा जाएगा प्रस्ताव
प्रो. अवस्थी ने कहा कि एमएससी में जैन गणित और एमए में जैन इतिहास को शामिल करने का प्रस्ताव एकेडमिक काउंसिल में रखा जाएगा। शोध पीठ के अध्यक्ष सुमित जैन शास्त्री और समन्वयक राजीव जैन को नियुक्त किया गया है। इस मौके पर प्रदीप तिजारा, डॉ. सुधींद्र कुमार जैन, अरविंद जैल डॉ. राजतिलक, राकेश जैन मौजूद रहे।

इन कोर्सों की होगी शुरुआत
छह महीने से लेकर दो साल तक के लिए जैन दर्शन में सर्टिफिकेट कोर्स, प्राकृत भाषा और अप्रभंश के सर्टिफिकेट कोर्स की शुरुआत होगी। 18 क्रेडिट का कोर्स होगा। इसी क्रम में डिप्लोमा कोर्स की भी शुरुआत की गई है। एक साल से चार साल तक के डिप्लोमा कोर्स की शुरुआत भी जैन दर्शन, प्राकृत भाषा और अप्रभंश भाषा में होगी। दोनों ही पाठ्यक्रमों में फीस 500 रुपये प्रति छमाही होगी।

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