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खेती करने के आधुनिक तरीकों को सीखने के लिए विदेश जाएंगे छात्र, इतने करोड़ का है प्रोजेक्ट
Sat, 02 Mar 2019 02:43 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 02 Mar 2019 02:43 PM IST
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चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) कानपुर के छात्रों के लिए खुशखबरी है। आने वाले दो माह में विश्वविद्यालय के कई छात्रों को विदेश भ्रमण करने का मौका मिलेगा। वहां पर ये विदेशी कृषि तकनीक सीखेंगे।
प्रदेश के कृषि एवं कृषि शिक्षा मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। यह प्रस्ताव पिछले दो माह से शासन में लंबित था। दरअसल विश्वविद्यालय को इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) ने नेशनल एग्रीकल्चरल हायर एजुकेशन प्रोजेक्ट के तहत तीन करोड़ रुपये की धनराशि दी है।
इसमें डेढ़ करोड़ रुपये से छात्रों और किसानों को विश्वविद्यालय में प्रशिक्षित कराना था और डेढ़ करोड़ रुपये से छात्रों और किसानों को विदेश में प्रशिक्षित करने के लिए भेजना था। लेकिन शासन स्तर पर इसके लिए मंजूरी नहीं मिल रही थी।
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प्रदेश के कृषि एवं कृषि शिक्षा मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। यह प्रस्ताव पिछले दो माह से शासन में लंबित था। दरअसल विश्वविद्यालय को इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) ने नेशनल एग्रीकल्चरल हायर एजुकेशन प्रोजेक्ट के तहत तीन करोड़ रुपये की धनराशि दी है।
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इसमें डेढ़ करोड़ रुपये से छात्रों और किसानों को विश्वविद्यालय में प्रशिक्षित कराना था और डेढ़ करोड़ रुपये से छात्रों और किसानों को विदेश में प्रशिक्षित करने के लिए भेजना था। लेकिन शासन स्तर पर इसके लिए मंजूरी नहीं मिल रही थी।
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विदेश में प्रशिक्षित होंगे छात्र
प्रोजेक्ट के समन्वयक और संयुक्त निदेशक शोध प्रो. डीपी सिंह ने बताया कि कृषि मंत्री की मंजूरी मिल चुकी है। जल्द ही आदेश जारी हो जाएगा। छात्रों को अब विदेश में प्रशिक्षित कराने के लिए तैयारियां शुरू की जाएंगी।
जर्मनी से होगा समझौता
प्रो. डीपी सिंह ने बताया कि जल्द ही जर्मनी से कृषि शिक्षा, शोध और तकनीक के आदान-प्रदान के लिए समझौता होगा। इसके लिए हाल ही में आए जर्मनी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. बी अलरिच ने इच्छा जताई है। अब कागजी प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
प्रो. डीपी सिंह के मुताबिक इस समझौते के तहत यहां के छात्रों को विदेशी कृषि तकनीक की जानकारी मिलेगी और वहां के शोध को भारत में विस्तार किया जा सकेगा। यहां की भी कई अच्छी तकनीक और शोध जर्मनी में प्रचारित की जाएंगी।
जर्मनी से होगा समझौता
प्रो. डीपी सिंह ने बताया कि जल्द ही जर्मनी से कृषि शिक्षा, शोध और तकनीक के आदान-प्रदान के लिए समझौता होगा। इसके लिए हाल ही में आए जर्मनी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. बी अलरिच ने इच्छा जताई है। अब कागजी प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
प्रो. डीपी सिंह के मुताबिक इस समझौते के तहत यहां के छात्रों को विदेशी कृषि तकनीक की जानकारी मिलेगी और वहां के शोध को भारत में विस्तार किया जा सकेगा। यहां की भी कई अच्छी तकनीक और शोध जर्मनी में प्रचारित की जाएंगी।