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पहली बार भारतीय छात्र ने जीती वर्टिकल फ्लाइट स्कॉलरशिप, आईआईटी से कर रहे बीटेक-एमटेक की पढ़ाई
Mon, 01 Apr 2019 04:59 PM IST
शिखा पांडेय
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 01 Apr 2019 04:59 PM IST
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छात्र सौरभ सिन्हा
- फोटो : अमर उजाला
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आईआईटी कानपुर के बीटेक-एमटेक ड्यूअल डिग्री प्रोग्राम के छात्र सौरभ सिन्हा ने कानपुर और संस्थान का नाम देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में रोशन कर दिया है। सौरभ को अमेरिका की द वर्टिकल फ्लाइट सोसायटी की प्रतिष्ठित वर्टिकल फ्लाइट स्कॉलरशिप 2019 हासिल हुई है। सौरभ उड़ने वाली टैक्सी का निर्माण रहे कर हैं।
परास्नातक वर्ग में अभी तक भारत ही नहीं बल्कि एशिया के किसी भी देश को यह स्कॉलरशिप नहीं मिली थी। यह रिकॉर्ड भी सौरभ के नाम हो गया है। खास बात है कि स्नातक वर्ग में भी वह यह स्कॉलरशिप हासिल करने वाले पहले भारतीय छात्र रहे हैं। स्नातक वर्ग में उन्हें 2018 में यह स्कॉलरशिप दी गई थी। इस बार उन्हें 3550 डॉलर (करीब ढाई लाख रुपये) की स्कॉलरशिप दी गई है। साथ ही अमेरिकी सोसायटी उनके प्रोजेक्ट में तकनीकी मदद भी करेगी।
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परास्नातक वर्ग में अभी तक भारत ही नहीं बल्कि एशिया के किसी भी देश को यह स्कॉलरशिप नहीं मिली थी। यह रिकॉर्ड भी सौरभ के नाम हो गया है। खास बात है कि स्नातक वर्ग में भी वह यह स्कॉलरशिप हासिल करने वाले पहले भारतीय छात्र रहे हैं। स्नातक वर्ग में उन्हें 2018 में यह स्कॉलरशिप दी गई थी। इस बार उन्हें 3550 डॉलर (करीब ढाई लाख रुपये) की स्कॉलरशिप दी गई है। साथ ही अमेरिकी सोसायटी उनके प्रोजेक्ट में तकनीकी मदद भी करेगी।
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उड़ने वाली टैक्सी पर कर रहे हैं काम
सौरभ के गाइड प्रो. अभिषेक और प्रो. मंगल कोठारी हैं। प्रो. अभिषेक ने बताया कि वह और उनके साथी वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग (विटॉल) टैक्सी तैयार कर रहे हैं। मतलब ऐसी टैक्सी जो जरूरत पड़ने पर सड़क पर चलने के अलावा हवा में उड़ भी सके। इसका इस्तेमाल लोग टैक्सी के रूप में करेंगे।
अमेरिकन छात्र के रूप में प्रो. अभिषेक भी जीत चुके यह स्कॉलरशिप
इसके पहले यह स्कॉलरशिप 2008 में प्रो. अभिषेक भी जीत चुके हैं। हालांकि तब वह अमेरिकन इंस्टीट्यूट से पीएचडी कर रहे थे। मतलब यह स्कॉलरशिप उन्हें अमेरिकन इंस्टीट्यूट के छात्र के रूप में मिली थी। प्रो. अभिषेक के मुताबिक इस स्कॉलरशिप को पाने के लिए दुनियाभर के 150 से अधिक देश आवेदन करते हैं। सबसे ज्यादा फाइट परास्नातक वर्ग में होती है।
सौरभ के गाइड प्रो. अभिषेक और प्रो. मंगल कोठारी हैं। प्रो. अभिषेक ने बताया कि वह और उनके साथी वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग (विटॉल) टैक्सी तैयार कर रहे हैं। मतलब ऐसी टैक्सी जो जरूरत पड़ने पर सड़क पर चलने के अलावा हवा में उड़ भी सके। इसका इस्तेमाल लोग टैक्सी के रूप में करेंगे।
अमेरिकन छात्र के रूप में प्रो. अभिषेक भी जीत चुके यह स्कॉलरशिप
इसके पहले यह स्कॉलरशिप 2008 में प्रो. अभिषेक भी जीत चुके हैं। हालांकि तब वह अमेरिकन इंस्टीट्यूट से पीएचडी कर रहे थे। मतलब यह स्कॉलरशिप उन्हें अमेरिकन इंस्टीट्यूट के छात्र के रूप में मिली थी। प्रो. अभिषेक के मुताबिक इस स्कॉलरशिप को पाने के लिए दुनियाभर के 150 से अधिक देश आवेदन करते हैं। सबसे ज्यादा फाइट परास्नातक वर्ग में होती है।