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Fatehpur: स्कूल टॉपर से तीन नंबर कम आने पर छात्रा ने फंदा लगा जान दी, मचा कोहराम
Tue, 07 May 2024 10:19 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 07 May 2024 10:19 PM IST
सार
Fatehpur News: होनहार छात्रा ने पशुबाड़े के पास पेड़ से फंदा लगाकर जान दे दी। बताया जा रहा है कि 10वीं की परीक्षा में स्कूल टॉपर से तीन अंक कम आने से छात्रा अवसाद में थी।
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छात्रा साक्षी की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यूपी बोर्ड की 10वीं की परीक्षा में स्कूल टॉपर से तीन अंक कम आने से अवसाद में चल रही छात्रा ने सोमवार रात पेड़ पर फंदा लगाकर जान दे दी। छात्रा ने परीक्षा में 600 में 572 अंक अर्जित किए थे, जबकि टॉपर के 575 अंक थे। परिजनों ने मंगलवार को शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
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थाना क्षेत्र के ग्राम पांडेयपुर निवासी योगेंद्र सिंह की पुत्री साक्षी देवी (16) फिरोजपुर स्थित कृष्णा इंटर काॅलेज में 10वीं की छात्रा थी। यूूपी बोर्ड परीक्षा में साक्षी ने 95.3 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। 95.8 प्रतिशत अंक स्कूल के टॉपर के आए थे। अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होने पर विद्यालय में साक्षी को सम्मानित किया गया था। परिजनों ने बताया कि साक्षी अपने परिणाम से संतुष्ट नहीं थी और गुमसुम रहने लगी थी। साक्षी ने सोमवार रात नौ बजे घर के पशुबाड़े के पास पेड़ पर फंदा लगाकर जान दे दी। सुबह मां राम देवी ने फंदे से बेटी का शव लटकते देखा। छात्रा के पिता पेशे से किसान हैं।
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माता-पिता के साथ शिक्षक का अहम रोल
बच्चे हताशा में ऐसे कदम उठा लेते हैं। ऐसे में परीक्षा से पहले ही माता-पिता को बच्चे को अच्छी तरह समझाना चाहिए कि परीक्षा में कम नंबर आने से जिंदगी खत्म नहीं होती है। अपने बच्चे की बेहतर परिणाम प्राप्त करने वाले बच्चों से तुलना नहीं करनी चाहिए। उनसे इस तरह की बातें करने पर नकारात्मकता बढ़ती है। शिक्षक भी अमूमन अच्छे अंक प्राप्त करने वाले बच्चों पर ही झुकाव दिखाते हैं और अन्य पर हीन भावना जैसे भाव प्रकट करते हैं। शिक्षकों को कमजोर बच्चों को बढ़ावा देकर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे बच्चों को महसूस होने लगता है कि उन्हें सपोर्ट करने के लिए कोई है। माता-पिता को पहले स्वयं बच्चों के सामने कम मोबाइल प्रयोग करना चाहिए, फिर उन्हें दूर रहने की सलाह देनी चाहिए। - डॉ. प्रशांत अग्रवाल, मनोचिकित्सक
बच्चे हताशा में ऐसे कदम उठा लेते हैं। ऐसे में परीक्षा से पहले ही माता-पिता को बच्चे को अच्छी तरह समझाना चाहिए कि परीक्षा में कम नंबर आने से जिंदगी खत्म नहीं होती है। अपने बच्चे की बेहतर परिणाम प्राप्त करने वाले बच्चों से तुलना नहीं करनी चाहिए। उनसे इस तरह की बातें करने पर नकारात्मकता बढ़ती है। शिक्षक भी अमूमन अच्छे अंक प्राप्त करने वाले बच्चों पर ही झुकाव दिखाते हैं और अन्य पर हीन भावना जैसे भाव प्रकट करते हैं। शिक्षकों को कमजोर बच्चों को बढ़ावा देकर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे बच्चों को महसूस होने लगता है कि उन्हें सपोर्ट करने के लिए कोई है। माता-पिता को पहले स्वयं बच्चों के सामने कम मोबाइल प्रयोग करना चाहिए, फिर उन्हें दूर रहने की सलाह देनी चाहिए। - डॉ. प्रशांत अग्रवाल, मनोचिकित्सक