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Kanpur News: हड़ताल... राहत पर ताला, दवा नहीं मिला दर्द

Sat, 17 Oct 2026 02:02 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 17 Oct 2026 02:02 AM IST
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Strike... relief blocked, no medicine for the pain
दर्शनपुरवा स्वास्थ्य केंद्र पर हड़ताल - फोटो : अमर उजाला
कानपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों की हड़ताल से जिले में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। 53 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (यूपीएचसी) में 30 से अधिक केंद्र बंद हैं। वहीं, 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और 42 डीटीसी में भी सेवाओं पर असर पड़ा है। टीकाकरण और ओपीडी बाधित होने से मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
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एनएचएम में संविदा पर तैनात डॉक्टर, फार्मासिस्ट, टेक्निशियन, स्टाफ नर्स और अन्य संविदा कर्मी समान कार्य के लिए समान वेतन और नियमितीकरण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। कई कर्मचारी लखनऊ में चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने गए हैं। इससे जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी में सुबह से ही पर्चा काउंटर पर लंबी कतारों में लगने के बाद जब मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं तो कई जगह डॉक्टर व अन्य कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं। इससे मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। जिले की 14 सीएचसी में से 10 केंद्रों पर 50 से 60 कर्मचारियों का स्टाफ है, जिसमें करीब 80 प्रतिशत एनएचएम कर्मी हैं। इनके हड़ताल पर जाने से नियमित कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ा है। 42 डीटीसी में पहले प्रतिदिन टीकाकरण के लिए 10 से 15 मामले आते थे, पीएचसी बंद होने से अब इनकी संख्या बढ़कर 30 से 35 हो गई है।
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बच्चों और गर्भवती महिलाओं को परेशानी

बच्चे को हर माह टीका लगवाने के लिए दर्शनपुरवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आना पड़ता है। पिछले एक सप्ताह से केंद्र बंद है इससे मजबूरी में हैलट अस्पताल जाना पड़ रहा है। - मधु
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गर्भवती बहू के टीके रामबाग केंद्र पर लगते हैं। केंद्र पर ताला लगा होने से उन्हें डफरिन अस्पताल जाना पड़ा। इससे भागदौड़ बढ़ने के साथ ही परेशानी का भी सामना करना पड़ा। - वर्षा




वर्जन

मरीजों की परेशानी दूर करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। नियमित चिकित्सकों को ज्यादा मरीज देखने के निर्देश दिए गए हैं। हड़ताली कर्मचारियों से जनहित में काम पर लौटने और बातचीत के जरिये समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की है। - डॉ. हरिदत्त नेमी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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