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कछुआ तस्करी: इटावा, एटा, मैनपुरी, औरैया आदि जिलों के कई पुलिसकर्मी तस्कर गिरोह के हैं कारखास, कार्रवाई तय
Sun, 07 Feb 2021 12:07 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 07 Feb 2021 12:07 PM IST
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1300 कछुए बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार
- फोटो : amar ujala
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कछुओं की तस्करी पुलिस की मिलीभगत से हो रही है। पुलिसकर्मियों को हर महीने मोटी रकम मिलती है। पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि इटावा के साथ एटा, मैनपुरी, औरैया, फर्रुखाबाद आदि जिलों के एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी शामिल हैं।
एसटीएफ की कार्रवाई में पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए हैं। उनके खिलाफ साक्ष्य भी मिले हैं जिसकी रिपोर्ट एसटीएफ संबंधित जिलों के एसपी को भेज रही है। एसटीएफ इसके पहले भी गिरोह के सीटू समेत अन्य कई लोगों को कछुआ तस्करी में जेल भेज चुकी है।
मगर वो जेल से छूटने के बाद फिर तस्करी शुरू कर देते हैं। सूत्रों के मुताबिक आरोपियों और फरार सरगना के मोबाइल नंबरों की सीडीआर में पुलिसकर्मियों के नंबर मिले हैं। एसटीएफ के मुताबिक जो खेप पकड़ी गई है, वह तकरीबन छह करोड़ रुपये की है। कोलकाता के तस्कर विदेश में इसके करीब डेढ़ से दो गुने दामों पर तस्करी करते हैं।
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कंटेनर मालिक व ड्राइवर को एक बार का दो से ढाई लाख रुपये देते हैं। सीओ एसटीएफ के मुताबिक तस्कर कछुओं को बहुत निर्मम तरीके से मारते हैं। सीधे उनकी गर्दन काट देते हैं या जिंदा ही खौलते पानी में डाल देते हैं। बाद में उनको सुखाते हैं। ये सूखे हुए मृत कछुए सबसे महंगे बिकते हैं। इनका इस्तेमाल शक्ति वर्धक दवाएं बनाने में किया जाता है।
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एसटीएफ की कार्रवाई में पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए हैं। उनके खिलाफ साक्ष्य भी मिले हैं जिसकी रिपोर्ट एसटीएफ संबंधित जिलों के एसपी को भेज रही है। एसटीएफ इसके पहले भी गिरोह के सीटू समेत अन्य कई लोगों को कछुआ तस्करी में जेल भेज चुकी है।
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मगर वो जेल से छूटने के बाद फिर तस्करी शुरू कर देते हैं। सूत्रों के मुताबिक आरोपियों और फरार सरगना के मोबाइल नंबरों की सीडीआर में पुलिसकर्मियों के नंबर मिले हैं। एसटीएफ के मुताबिक जो खेप पकड़ी गई है, वह तकरीबन छह करोड़ रुपये की है। कोलकाता के तस्कर विदेश में इसके करीब डेढ़ से दो गुने दामों पर तस्करी करते हैं।
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कंटेनर मालिक व ड्राइवर को एक बार का दो से ढाई लाख रुपये देते हैं। सीओ एसटीएफ के मुताबिक तस्कर कछुओं को बहुत निर्मम तरीके से मारते हैं। सीधे उनकी गर्दन काट देते हैं या जिंदा ही खौलते पानी में डाल देते हैं। बाद में उनको सुखाते हैं। ये सूखे हुए मृत कछुए सबसे महंगे बिकते हैं। इनका इस्तेमाल शक्ति वर्धक दवाएं बनाने में किया जाता है।