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Teachers day: रिटायरमेंट के बाद भी निभा रहे गुरु धर्म

Tue, 05 Sep 2017 10:47 AM IST
रामजी द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
रामजी द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 05 Sep 2017 10:47 AM IST
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special story on Teachers Day 2017
डेमो
नौकरी से भले रिटायर हो गए हों पर शिक्षक संतोष दीक्षित ने विद्यार्थियों में साहस और देशभक्ति का जज्बा भरने का जज्बा नहीं छोड़ा। वे आज भी स्काउट प्रादेशिक मुख्यालय आयुक्त पद पर कार्यरत रहते हुए नि:शुल्क बच्चों, युवाओं में ऊर्जा का संचार कर रहे हैं।  
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सरकारी महकमे से रिटायर होने के बाद हर व्यक्ति घर परिवार के साथ समय बिताने की चाह रखता है। लेकिन भारतीय विद्यालय आचार्य नगर से रिटायर शिक्षक संतोष दीक्षित के विचार इससे जुदा हैं। वे रिटायरमेंट के बाद भी अपने शिष्यों को देश सेवा, व्यवहारिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं। जीवन की हर चुनौती का सामना करने और दूसरों को राहत देने के काबिल भी बना रहे हैं। इसके लिए बच्चों को प्राथमिक उपचार, संकेत वार्ता, अनुमान लगाना (एस्टीमेशन), पुल बनाना, तंबू लगाना (पायनियरिंग), दो रात-तीन दिन जंगल में बिताना (हाइकिंग), बिना बर्तन के भोजन बनाना, लाइट गेम (रात की पहचान कराना), जाने का रास्ता (मैपिंग) जैसी अन्य ट्रेनिंग देते हैं।  
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संतोष दीक्षित ने आचार्य नगर स्थित भारतीय विद्यालय 1974 में हिंदी शिक्षक के रूप में ज्वाइन किया था। 1976 को माध्यमिक शिक्षा में स्काउट अनिवार्य होने के बाद उन्हें अल्मोड़ा शीतला ट्रेनिंग सेंटर भेजा गया। हिमालय वुड बैच की ट्रेनिंग के बाद नेशनल हेडक्वार्टर और स्टेट हेडक्वार्टर ने उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए चयनित किया। उन्होंने अपने कार्यकाल में पचास से अधिक राष्ट्रपति पदक दिलाए हैं। वर्ष 2014 में रिटायरमेंट के बाद भी इस समय डिस्ट्रिक सेक्रेटरी और प्रादेशिक मुख्यालय आयुक्त पद पर कार्यरत हैं। अब युवाओं को नि:शुल्क प्रशिक्षण देकर स्काउट के माध्यम से सामाजिकता का पाठ पढ़ाने के साथ ही सेना में जाने के टिप्स देते हैं। वे पूरे प्रदेश में युवाओं को स्पेशल ट्रेनिंग देने के लिए जाते हैं।
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रेल हादसा राहत में रहा विशेष योगदान
उनका कहना है कि सामाजिक सरोकार के लिए ही टीम को तैयार किया जाता है। पुखरायां रेल हादसे में कानपुर और औरैया स्काउट गाइड को राहत कार्यों में लगाया गया था। जहां युवाओं ने काफी सराहनीय कार्य किया गया।


सिर्फ आने-जाने का मिलता है खर्च
संतोष दीक्षित का कहना है कि स्काउट के साथ काम करना शौक है। उसके लिए उन्हें कोई भुगतान नहीं मिलता। प्रदेश या अन्य जिलों में विशेष ट्रेनिंग पर जाने के लिए विभाग की ओर से भत्ता दिया जाता है। 

- स्काउट प्रादेशिक मुख्यालय आयुक्त पद पर हैं तैनात 
- युवाओं को निशुल्क देते हैं प्रशिक्षण, जगाते देशभक्ति
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