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आज तक उजागर नहीं हो सका चंदेलकालीन इस ‘शिव मंदिर का रहस्य’, जानिए क्या है खास

Sat, 29 Jul 2017 04:08 PM IST
मनोज द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
मनोज द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 29 Jul 2017 04:08 PM IST
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Special Secret of Shaleshwar Temple in Hamirpur
सरीला के शल्लेश्वर मंदिर का भव्य शिवलिंग।
हमीरपुर के सरीला नगर का शल्लेश्वर मंदिर लोगों के लिए आस्था व श्रद्धा का केंद्र है। चंदेलकालीन इस शिव मंदिर के गर्त में तमाम ऐतिहासिक रहस्य समाए हुए हैं। मंदिर के मुख्य द्वार पर लगा शिलालेख आज तक कोई पढ़ नहीं सका है। शिव मंदिर का रख-रखाव समिति करती है। शिवरात्रि पर भव्य शिव बारात का आयोजन होता है। सावन माह में यहां पूजा अर्चन करने वालों का तांता लगा रहता है।
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यह कस्बा प्राचाीन काल में राजा शल्य की राजधानी रहा

Special Secret of Shaleshwar Temple in Hamirpur
सरीला स्थित शल्लेश्वर मंदिर में पार्थिव शिवलिंग बनाते भक्त।
हमीरपुर कस्बे के मध्य ऊंचाई वाले इलाके में बना प्राचीन शिवालय शल्लेश्वर मंदिर का निर्माण व इतिहास आज तक उजागर नहीं हो सका है। चंदेलकालीन मंदिर व मठों की तर्ज पर पत्थर के शिलापटों से बने इस मंदिर को भी चंदेलकालीन माना जाता है। मंदिर के गर्भ में भारी भरकम शिवलिंग स्थापित है। इस मंदिर के बारे में यह भी किदवंती कही जाती है कि कस्बा प्राचाीन काल में राजा शल्य की राजधानी रहा है। ऊंचाई वाले व मध्य क्षेत्र में यह मंदिर होने से लोग इसे राजा शल्य के महल का मंदिर भी बताते हैं।

​मंदिर के मुख्य द्वार पर एक शिलालेख लगा है, लेकिन अथक प्रयासों के बावजूद इसे पढ़ा नहीं जा सका है। लोगों का यह भी दावा है कि मंदिर का शिवलिंग हर वर्ष एक चावल जितना लंबा व मोटा हो रहा है। इसकी प्रमाणिकता शिवरात्रि पर की जाती है। शिवरात्रि के मौके पर होने वाले शिव विवाह में शिवलिंग पर चढ़ने वाला जनेऊ हर वर्ष छोटा पड़ जाता है। मंदिर का रख-रखाव करने वाली श्री शल्लेश्वर मंदिर समिति ने इस मंदिर का नए लुक में भव्य निर्माण करा दिया है और अनवरत निर्माण कार्य जारी रहता है। शिवरात्रि के समय यहां शिव बारात का आयोजन करीब 44 वर्षो से होता चला आ रहा है। इसका आयोजन हर वर्ष बढ़ रहा है। साल भर यहां पूजा अर्चन व मनौती मांगने वालों का तांता लगा रहता है। सावन के महीने में दूर दराज से कवारियां यहां आकर जलाभिषेक करते हैं। पूरे वर्ष हर सोमवार को यहां कीर्तनों का आयोजन होता है।

 
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मंदिर के गर्भ से जुड़ा कुआं 

Special Secret of Shaleshwar Temple in Hamirpur
डेमो पिक
ब्लाक रोड पर मंदिर से करीब एक किमी दूर एक प्राचीन कुआं है। जिसे शल्लऊ कुआं कहा जाता है। शल्लेश्वर मंदिर से इसका जल मार्ग जुड़ा हुआ है। लेकिन मंदिर में कहा छेद है, यह आज तक कोई ढूंढ नहीं पाया। मंदिर के शिवलिंग पर होने वाले दूध व जलाभिषेक इस गुप्त रास्ते से कुंए में आता है। लोगों की मान्यता है कि इस कुंए में नहाने से चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। लोग दैनिक प्रयोग व पीने में भी इस पानी का प्रयोग करते हैं। कस्बे के लोगों ने इसका जीर्णोद्धार करा दिया है। शल्लेश्वर मंदिर समिति अध्यक्ष स्वामी प्रसाद यादव ने कहा कि मंदिर बहुत प्राचीन है। निर्माण किसने और कब कराया सब कुछ गर्त में है। कोई चंदेलकालीन तो कोई इसे राजा शल्य की राजधानी का मंदिर बताते हैं।

 
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मंदिर परिसर में पार्थिव शिवलिंग बनना जारी 

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डेमो पिक
शल्लेश्वर मंदिर में इस साल कस्बे के लोगाें के सहयोग से नगर सांस्कृतिक समिति व मंदिर समिति द्वारा सावन के तीसरे सोमवार से सवा लाख पार्थिव शिवलिंग बनाने तथा शिवपुराण का आयोजन किया है। जिसके लिए मंदिर में शिव भक्ताें की खासी भीड़ उमड़ रही है। पूरा कस्बा शिव के जयकारे शिवमय हो गया है।
 
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