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सपा सफल, पर बागियों का दखल
अमर उजाला ब्यूरो/ कानपुर
Updated Mon, 08 Feb 2016 02:11 AM IST
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कांग्रेस और भाजपा से निकलकर सपा में आई देविका सिंह और मीरा पांडेय ने घाटमपुर व पतारा के ब्लॉक प्रमुख चुनाव में तूफान खड़ा कर दिया। घाटमपुर में टिकट नहीं मिलने पर देविका सिंह ने सपा से बगावत कर दी और जीत भी हासिल कर ली।
देविका पूर्व कांग्रेस और सरकार में मंत्री रहे शिवनाथ सिंह कुशवाहा के भतीजे इंद्रजीत की पत्नी हैं। पंचायत चुनाव के शुरू होने से पहले ही उन्होेंने सपा का दामन थाम लिया। पार्टी के कुछ नेताओं ने उन्हें भरोसा दिया था कि टिकट मिल जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी तरह भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ से जिलाध्यक्ष जगदीश पांडेय के बेटे सर्वेश की पत्नी मीरा पांडेय भी कुछ दिन पहले ही सपा की सदस्यता ग्रहण की।
मीरा के परिवार को सपा में लाने का श्रेय पूर्व सांसद राकेश सचान को जाता है। उन्होंने ही इन्हें पतारा से टिकट दिलाने में बड़ी भूमिका अदा की। जब देविका सिंह को टिकट नहीं मिला तो उन्होंने पार्टी को दरकिनार बागी प्रत्याशी के रूप मोर्चा संभाल लिया। शिवनाथ सिंह का क्षेत्र में दबदबा होने से राकेश सचान की भी नहीं चली और उनकी प्रत्याशी मीरा चुनाव हार गई। जिसकी उम्मीद सपाइयों को जरा भी नहीं थी। घाटमपुर से अभी तक बसपा नेता रामकेश संखवार ब्लॉक प्रमुख थे।
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उधर, देहात जिले में 10 सीटों में से सात प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। तीन सीटों अकबरपुर, मैथा और संदलपुर ब्लॉक में चुनाव हुआ जिसमें अकबरपुर में सपा के संतोष चौधरी जीते, जबकि मैथा में सपा की बागी अनुपमा सिंह और संदलपुर में सपा की बागी सत्यवती ने जीत दर्ज की।
अकबरपुर से सपा प्रत्याशी संतोष चौधरी और देवीदीन ने पर्चा भरा था। कुल 74 बीडीसी में से 68 ने वोट डाला। बार, तिगाईं बरौला, कमीर, बारा द्वितीय, संगसियापुर ज्योतिष प्रथम और लहरापुर के छह सदस्य वोट डालने नहीं आए। सपा प्रत्याशी संतोष चौधरी को कुल 66 मत मिले जबकि विरोधी प्रत्याशी देवीदीन को मात्र दो ही वोट मिले।
पांच महिलाओं को मिली कमान
जिले के 10 ब्लॉकों में पांच महिलाओं को ब्लॉक की कमान मिली है। पिछली बार दस ब्लॉकों में से आठ ब्लॉकों के प्रतिनिधित्व की कमान महिलाओं के हाथों में थी, इस बार घटकर पांच रह गई।
बता दें कि ब्लॉक प्रमुख चुनाव के नतीजे आने के बाद संदलपुर ब्लॉक से सत्यवती कटियार, मैथा से अनुपमा सिंह गौर, मलासा ब्लॉक से आकांक्षा सिंह, अमरौधा ब्लॉक से सुदामा देवी कठेरिया व सरवनखेड़ा महामाया यादव को ब्लॉक प्रमुख के पद की जिम्मेदारी मिली है। इन पांच ब्लॉकों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व रहेगा।
परिवार के साथ क्षेत्र के विकास की भी जिम्मेदारी इन महिलाओं के कंधों पर होगी। पिछली बार झींझक ब्लॉक से राजकुमारी यादव, संदलपुर से तारिका कठेरिया, मैथा से रंजू यादव, अकबरपुर से विजय लक्ष्मी यादव, डेरापुर से प्रीती कठेरिया, मलासा से रानी शुक्ला, अमरौधा से गुलनाज बेगम, सरवनखेड़ा से अर्चना भदौरिया ब्लॉक प्रमुख थी।
पाठक-गौर के दांव से हलचल
सपा के संस्थापक सदस्य माने जाने वाले पूर्व विधायक डॉ कमलेश पाठक और वर्तमान विधायक रामस्वरूप सिंह गौर के बागियों का साथ देने से पार्टी में हलचल है। इतने वरिष्ठ नेताओं का बागी प्रत्याशियों को लड़ाना और जिता लाना नए समीकरण के संकेत दे रहा है।
कमलेश पाठक तो पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के सबसे पुराने साथियों के रूप में जाने जाते हैं और संकटों के समय पार्टी को साम-दाम-दंड-भेद, हर तरीके से उबारने वाले माने जाते हैं लेकिन संदलपुर में उन्होंने बागी प्रत्याशी का साथ दिया। इसी तरह मैथा में गौर अपनी नत बहू को सपा प्रत्याशी के सामने ले आए और जीत दिला दी।
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देविका पूर्व कांग्रेस और सरकार में मंत्री रहे शिवनाथ सिंह कुशवाहा के भतीजे इंद्रजीत की पत्नी हैं। पंचायत चुनाव के शुरू होने से पहले ही उन्होेंने सपा का दामन थाम लिया। पार्टी के कुछ नेताओं ने उन्हें भरोसा दिया था कि टिकट मिल जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी तरह भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ से जिलाध्यक्ष जगदीश पांडेय के बेटे सर्वेश की पत्नी मीरा पांडेय भी कुछ दिन पहले ही सपा की सदस्यता ग्रहण की।
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मीरा के परिवार को सपा में लाने का श्रेय पूर्व सांसद राकेश सचान को जाता है। उन्होंने ही इन्हें पतारा से टिकट दिलाने में बड़ी भूमिका अदा की। जब देविका सिंह को टिकट नहीं मिला तो उन्होंने पार्टी को दरकिनार बागी प्रत्याशी के रूप मोर्चा संभाल लिया। शिवनाथ सिंह का क्षेत्र में दबदबा होने से राकेश सचान की भी नहीं चली और उनकी प्रत्याशी मीरा चुनाव हार गई। जिसकी उम्मीद सपाइयों को जरा भी नहीं थी। घाटमपुर से अभी तक बसपा नेता रामकेश संखवार ब्लॉक प्रमुख थे।
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उधर, देहात जिले में 10 सीटों में से सात प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। तीन सीटों अकबरपुर, मैथा और संदलपुर ब्लॉक में चुनाव हुआ जिसमें अकबरपुर में सपा के संतोष चौधरी जीते, जबकि मैथा में सपा की बागी अनुपमा सिंह और संदलपुर में सपा की बागी सत्यवती ने जीत दर्ज की।
अकबरपुर से सपा प्रत्याशी संतोष चौधरी और देवीदीन ने पर्चा भरा था। कुल 74 बीडीसी में से 68 ने वोट डाला। बार, तिगाईं बरौला, कमीर, बारा द्वितीय, संगसियापुर ज्योतिष प्रथम और लहरापुर के छह सदस्य वोट डालने नहीं आए। सपा प्रत्याशी संतोष चौधरी को कुल 66 मत मिले जबकि विरोधी प्रत्याशी देवीदीन को मात्र दो ही वोट मिले।
पांच महिलाओं को मिली कमान
जिले के 10 ब्लॉकों में पांच महिलाओं को ब्लॉक की कमान मिली है। पिछली बार दस ब्लॉकों में से आठ ब्लॉकों के प्रतिनिधित्व की कमान महिलाओं के हाथों में थी, इस बार घटकर पांच रह गई।
बता दें कि ब्लॉक प्रमुख चुनाव के नतीजे आने के बाद संदलपुर ब्लॉक से सत्यवती कटियार, मैथा से अनुपमा सिंह गौर, मलासा ब्लॉक से आकांक्षा सिंह, अमरौधा ब्लॉक से सुदामा देवी कठेरिया व सरवनखेड़ा महामाया यादव को ब्लॉक प्रमुख के पद की जिम्मेदारी मिली है। इन पांच ब्लॉकों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व रहेगा।
परिवार के साथ क्षेत्र के विकास की भी जिम्मेदारी इन महिलाओं के कंधों पर होगी। पिछली बार झींझक ब्लॉक से राजकुमारी यादव, संदलपुर से तारिका कठेरिया, मैथा से रंजू यादव, अकबरपुर से विजय लक्ष्मी यादव, डेरापुर से प्रीती कठेरिया, मलासा से रानी शुक्ला, अमरौधा से गुलनाज बेगम, सरवनखेड़ा से अर्चना भदौरिया ब्लॉक प्रमुख थी।
पाठक-गौर के दांव से हलचल
सपा के संस्थापक सदस्य माने जाने वाले पूर्व विधायक डॉ कमलेश पाठक और वर्तमान विधायक रामस्वरूप सिंह गौर के बागियों का साथ देने से पार्टी में हलचल है। इतने वरिष्ठ नेताओं का बागी प्रत्याशियों को लड़ाना और जिता लाना नए समीकरण के संकेत दे रहा है।
कमलेश पाठक तो पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के सबसे पुराने साथियों के रूप में जाने जाते हैं और संकटों के समय पार्टी को साम-दाम-दंड-भेद, हर तरीके से उबारने वाले माने जाते हैं लेकिन संदलपुर में उन्होंने बागी प्रत्याशी का साथ दिया। इसी तरह मैथा में गौर अपनी नत बहू को सपा प्रत्याशी के सामने ले आए और जीत दिला दी।