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बसपा का मुस्लिम कार्ड फेल करने को सपा ने अतीक को उतारा
पंकज प्रसून, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 13 Dec 2016 01:46 PM IST
सार
- मुस्लिम मतदाताओं को एक मंच पर लाने को सपा ने चली चाल
- अतीक अहमद को कैंट से विधानसभा प्रत्याशी घोषित किया गया है
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विस्तार
प्रदेश में मुस्लिम कार्ड खेलने के लिए तेजी से अभियान में जुटी बसपा को डैमेज करने के लिए सपा भी मैदान में उतर गई है। कैंट क्षेत्र से अतीक अहमद समेत कई दबंग मुस्लिम नेताओं को प्रत्याशी बनाकर सपा ने यही संदेश दिया है। अतीक सिर्फ कैंट के प्रत्याशी नहीं बल्कि सपा उनके जरिये पूरे मंडल की मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों पर अपना दबाव बनाने की तैयारी में है।
कानपुर जनपद की बात करें तो यहां की 10 विधानसभा सीटों में ऐसा कोई मुस्लिम नेता नहीं है, जिसकी धमक पूरे मंडल में हो। बसपा ने करीब एक महीने पहले जोनल स्तर के मुस्लिम नेताओं को पूरे मंडल में एक विशेष वर्ग के मतदाताओं को जुटाने के लिए रणनीति के तहत भेजा है। बसपा ने महानगर की दो सीटों पर भी दूसरी जातियों के प्रत्याशियों का टिकट काटकर मुस्लिम नेताओं को दे दिया है। बसपा की इस रणनीति पर सपा की निगाह लगी हुई थी। अतीक को कानपुर से लड़ाने की योजना पार्टी ने कई महीने पहले ही बना ली थी, लेकिन पार्टी की आपसी कलह की वजह से इसमें देरी हुई। जिस दिन से अतीक को प्रत्याशी बनाया गया, उसी दिन से महानगर और इसके आसपास के मुस्लिम क्षेत्रों में काफी हलचल है।
बताया जा रहा है कि सपा और बसपा दोनों इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि इस बार प्रदेश में भाजपा की ताकत बढ़ने की वजह से मुस्लिम मतदाता एकजुट होकर ही वोट करेगा। माना जा रहा है कि ऐसे में जो पार्टी भाजपा पर दबाव बनाने में सफल होगी मुस्लिम वोट उसी की तरफ जा सकता है। इसी वजह से सपा ने दबंग नेता अतीक को अपना प्रतिनिधि बनाकर यहां भेजा है।
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मंडल में करीब 16 लाख मुस्लिम वोटर
कानपुर मंडल की बात की जाए तो यहां के आठ जिलों में करीब 15 लाख मुस्लिम मतदाता हैं। सिर्फ महानगर जनपद में ही यह संख्या पांच लाख के करीब है। सीसामऊ, आर्यनगर और कैंट विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा मुस्लिम मतदाता है। इसी तरह देहात जनपद की भोगनीपुर विधानसभा में सबसे ज्यादा (करीब 60 हजार) मुस्लिम मतदाता हैं। इसके अलावा इटावा में करीब दो लाख, औरैया में एक लाख, कन्नौज में तीन लाख, फतेहपुर करीब ढाई लाख, फर्रुखाबाद में करीब दो लाख मुस्लिम मतदाता हैं।
बसपा के जोनल कोआर्डिनेटर अशोक सिद्धार्थ बोले मुसलमानों की जान माल और मजहब का साथ सबसे ज्यादा मेरी पार्टी की सरकार और पार्टी की मुखिया मायावती ने दिया है। आज का मतदाता प्रत्याशी की छवि देखकर वोट करता है, ऐसे में मेरे प्रत्याशी (डॉ. नसीम अहमद) की छवि बेहतर है।
उधर, सपा से राज्यसभा सांसद चौधरी सुखराम सिंह यादव ने कहा पार्टी ने जिसे प्रत्याशी घोषित किया है, वह सर्वमान्य नेता है। बसपा हो या भाजपा सभी विपक्षी पार्टियां कुछ न कुछ बोलेंगी ही। हमारा फोकस तो सिर्फ अपने प्रत्याशी पर है। पार्टी ने जो फैसला किया है, हम उसका स्वागत करते हैं।
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कानपुर जनपद की बात करें तो यहां की 10 विधानसभा सीटों में ऐसा कोई मुस्लिम नेता नहीं है, जिसकी धमक पूरे मंडल में हो। बसपा ने करीब एक महीने पहले जोनल स्तर के मुस्लिम नेताओं को पूरे मंडल में एक विशेष वर्ग के मतदाताओं को जुटाने के लिए रणनीति के तहत भेजा है। बसपा ने महानगर की दो सीटों पर भी दूसरी जातियों के प्रत्याशियों का टिकट काटकर मुस्लिम नेताओं को दे दिया है। बसपा की इस रणनीति पर सपा की निगाह लगी हुई थी। अतीक को कानपुर से लड़ाने की योजना पार्टी ने कई महीने पहले ही बना ली थी, लेकिन पार्टी की आपसी कलह की वजह से इसमें देरी हुई। जिस दिन से अतीक को प्रत्याशी बनाया गया, उसी दिन से महानगर और इसके आसपास के मुस्लिम क्षेत्रों में काफी हलचल है।
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बताया जा रहा है कि सपा और बसपा दोनों इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि इस बार प्रदेश में भाजपा की ताकत बढ़ने की वजह से मुस्लिम मतदाता एकजुट होकर ही वोट करेगा। माना जा रहा है कि ऐसे में जो पार्टी भाजपा पर दबाव बनाने में सफल होगी मुस्लिम वोट उसी की तरफ जा सकता है। इसी वजह से सपा ने दबंग नेता अतीक को अपना प्रतिनिधि बनाकर यहां भेजा है।
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मंडल में करीब 16 लाख मुस्लिम वोटर
कानपुर मंडल की बात की जाए तो यहां के आठ जिलों में करीब 15 लाख मुस्लिम मतदाता हैं। सिर्फ महानगर जनपद में ही यह संख्या पांच लाख के करीब है। सीसामऊ, आर्यनगर और कैंट विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा मुस्लिम मतदाता है। इसी तरह देहात जनपद की भोगनीपुर विधानसभा में सबसे ज्यादा (करीब 60 हजार) मुस्लिम मतदाता हैं। इसके अलावा इटावा में करीब दो लाख, औरैया में एक लाख, कन्नौज में तीन लाख, फतेहपुर करीब ढाई लाख, फर्रुखाबाद में करीब दो लाख मुस्लिम मतदाता हैं।
बसपा के जोनल कोआर्डिनेटर अशोक सिद्धार्थ बोले मुसलमानों की जान माल और मजहब का साथ सबसे ज्यादा मेरी पार्टी की सरकार और पार्टी की मुखिया मायावती ने दिया है। आज का मतदाता प्रत्याशी की छवि देखकर वोट करता है, ऐसे में मेरे प्रत्याशी (डॉ. नसीम अहमद) की छवि बेहतर है।
उधर, सपा से राज्यसभा सांसद चौधरी सुखराम सिंह यादव ने कहा पार्टी ने जिसे प्रत्याशी घोषित किया है, वह सर्वमान्य नेता है। बसपा हो या भाजपा सभी विपक्षी पार्टियां कुछ न कुछ बोलेंगी ही। हमारा फोकस तो सिर्फ अपने प्रत्याशी पर है। पार्टी ने जो फैसला किया है, हम उसका स्वागत करते हैं।