Soldier Village: मझगवां गांव...जहां हर घर से निकलते हैं सैनिक, स्वतंत्रता संग्राम से लेकर कारगिल तक है नाता
Village of Soldiers: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक ऐसा गांव है, जहां की मिट्टी में ही है राष्ट्रभक्ति। यहां के लोगों की रगों में देशभक्ति बहती है। इस गांव की मिट्टी में वीर पैदा होते हैं। यहां के हर घर से सैनिक निकलते हैं। बता दें कि गांव के 300 से अधिक लोग फौज में रहे हैं।
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हमीरपुर जिले में राठ क्षेत्र के रणबांकुरों ने स्वतंत्रता संग्राम में जहां महती भूमिका निभाई। वहीं क्षेत्र का मझगवां राष्ट्रभक्ति की कहानी गढ़ रहा है। करीब पांच हजार आबादी वाले इस गांव के 300 से अधिक लोग फौज में रहे। वहीं मौजूदा में 37 लोग अपनी सेवा दे रहे है।
वहीं, गांव के कई युवा अभी अग्निवीर की तैयारी में जुटे है। यहां की मिट्टी में राष्ट्रभक्ति की भावना बसी है। यहीं कारण है कि कई घरों की दो तीन पीढ़ियों ने देश की सुरक्षा में अपनी सेवा दी है। जिले में स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सेदार रहे प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की बात करें तो राठ तहसील का नाम आता है।
इनमें स्वामी ब्रम्हानंद की जन्म स्थली बरहरा, श्रीपत सहाय जराखर व दीवान शत्रुघन सिंह मगरौल शामिल है। जराखर गांव में जिले के 54 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहै। ऐसे में राठ क्षेत्र के गांवों में देश भक्ति की भावना वहां की मिट्टी में बसी है।
फौजियों को लेकर जाना जाता है मझगवां गांव
यही कारण है कि क्षेत्र का मझगवां गांव फौजियों को लेकर जाना जाता है। मुख्यालय से 100 किमी दूर इस गांव में राष्ट्र रक्षा के भाव यहां के लोगों की रगों में दौड़ रहा है। इस गांव के 37 सपूत देश रक्षा के लिए सरहदों में तैनात है।
फौज में हैं कई परिवारों की दो-तीन पीढ़ियां
वहीं 300 से अधिक लोग सेवानिवृत्त होने के बाद गांव में रहते है। इतना ही नहीं गांव के कई परिवार ऐसे है, जिनकी दो-तीन पीढ़ियां देश रक्षा में लगी रही। वहीं कई लोग अपनी आने वाली पीढ़ियों को इसके लिए तैयारी करा रहे है। गांव में करीब 25 युवा तैयारी में लगे है। इसमें सेवानिवृत्त सैनिक उनकी मदद कर रहे हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध के पेंशनभोगी भी गांव में
सैनिक पुनर्वास कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक विनोद सिंह ने बताया कि मझगवां गांव निवासी पारवती देवी को उनके कार्यालय से प्रतिमाह छह हजार रुपये पेंशन मिल रही है। उनके पति रक्षपाल सिंह द्वितीय विश्व युद्घ के दौरान सेना में कार्यरत थे। उनके मरणोपरांत पेंशन उनकी पत्नी को दी जा रही है।
मेरे पिता स्व. बड़ेलाल सेना में थे। सेना से सूबेदार के पद से रिटायर्ड हुए थे। राष्ट्रसेवा का जज्बा उन्हीं से मिला। जिस पर मै सेना में भर्ती हो गया और मौजूदा में सेवानिवृत्त हूं। -विनोद सिंह, पूर्व नायक
मेरे चाचा स्व.हवलदार जगरूप सिंह मेरे प्रेरणास्रोत रहे। उन्हीं के दिशा निर्देशन में 1979 में मैने भोपाल बीआरओ से भर्ती होकर देश सेवा की। -शिवनाथ सिंह, पूर्व हवलदार
देश सेवा व देश प्रेम इस गांव की मिट्टी में है। यह हमें विरासत में मिला है। मै सेना के कई ऑपरेशनों में शामिल रहा। मुझे गर्व है कि मैं भारतीय सेना का हिस्सा रहा। -रामजीवन सिंह, पूर्व नायक
हमारे गांव में सेना भर्ती का माहौल शुरू से ही रहा है। इसकी मदद से मैं सेना में आसानी से भर्ती हुआ। वर्तमान में मैं युवाओं को सेना में जाने के लिए प्रेरित करता हूं। -भूपेंद्र सिंह, पूर्व हवलदार