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Kanpur News: बिना रसायन हो सकेगी मिट्टी की जांच, एआई से होगी कीटों की पहचान
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कानपुर। खेती की लागत कम करने, मिट्टी की सेहत सुधारने और फसलों को कीटों से बचाने के लिए अब किसानों को आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसके तहत बिना रसायन मिट्टी की जांच, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से कीटों की पहचान और कम लागत वाले इलेक्ट्रिक कृषि उपकरण विकसित किए जा रहे हैं। आईआईटी कानपुर में इन्क्यूबेटेड एग्रीटेक स्टार्टअप स्कॉनेक्स्ट साइंटिफिक टेक्नोलॉजीज इन तकनीकों पर काम कर रहा है।
कंपनी के इस प्रयास को विस्तार देने के लिए जेरोधा की निवेश शाखा रेनमैटर, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) और भारतीय निर्यात-आयात बैंक (एग्जिम बैंक) ने निवेश किया है। निवेश की राशि का खुलासा नहीं किया गया है। कंपनी का प्रमुख उत्पाद भू-परीक्षक है। इससे नियर इन्फ्रारेड (एनआईआर) तकनीक और मशीन लर्निंग की मदद से बिना रसायनों के मिट्टी की जांच की जा सकती है। इससे किसानों को मृदा स्वास्थ्य की जानकारी मिलेगी और वे मिट्टी की जरूरत के अनुसार खेती से जुड़े फैसले ले सकेंगे।
कंपनी की पेटेंट प्राप्त ''डिटेक्ट'' तकनीक और ''एग्रोलेंस'' प्लेटफॉर्म खेतों में कीटों की पहचान कर फसल की देखभाल के लिए जरूरी सलाह देते हैं। कंपनी स्वदेशी इलेक्ट्रिक कृषि मशीनें और सौर ऊर्जा से चलने वाले स्मार्ट ड्रायर भी विकसित कर रही है। इससे कृषि कार्यों में लागत घटाने और फसल कटाई के बाद उपज के बेहतर रखरखाव में मदद मिलेगी। कंपनी अब तक करीब 90 हजार किसानों को अपने साथ जोड़ चुकी है। इसकी सेवाएं देश के 21 से अधिक राज्यों में पहुंच चुकी हैं।
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स्कॉनेक्सट के संस्थापक एवं सीईओ रजत वर्धन ने कहा कि तीनों संस्थानों का निवेश छोटे किसानों के लिए जलवायु अनुकूल और तकनीक आधारित समाधान विकसित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाएगा। आईआईटी कानपुर के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड रिसर्च इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (फर्स्ट) के सीईओ डॉ. आशुतोष अग्निहोत्री ने कहा कि स्कैनक्स्ट ने शोध आधारित नवाचार को व्यावसायिक रूप देते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार किया है।
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कंपनी के इस प्रयास को विस्तार देने के लिए जेरोधा की निवेश शाखा रेनमैटर, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) और भारतीय निर्यात-आयात बैंक (एग्जिम बैंक) ने निवेश किया है। निवेश की राशि का खुलासा नहीं किया गया है। कंपनी का प्रमुख उत्पाद भू-परीक्षक है। इससे नियर इन्फ्रारेड (एनआईआर) तकनीक और मशीन लर्निंग की मदद से बिना रसायनों के मिट्टी की जांच की जा सकती है। इससे किसानों को मृदा स्वास्थ्य की जानकारी मिलेगी और वे मिट्टी की जरूरत के अनुसार खेती से जुड़े फैसले ले सकेंगे।
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कंपनी की पेटेंट प्राप्त ''डिटेक्ट'' तकनीक और ''एग्रोलेंस'' प्लेटफॉर्म खेतों में कीटों की पहचान कर फसल की देखभाल के लिए जरूरी सलाह देते हैं। कंपनी स्वदेशी इलेक्ट्रिक कृषि मशीनें और सौर ऊर्जा से चलने वाले स्मार्ट ड्रायर भी विकसित कर रही है। इससे कृषि कार्यों में लागत घटाने और फसल कटाई के बाद उपज के बेहतर रखरखाव में मदद मिलेगी। कंपनी अब तक करीब 90 हजार किसानों को अपने साथ जोड़ चुकी है। इसकी सेवाएं देश के 21 से अधिक राज्यों में पहुंच चुकी हैं।
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स्कॉनेक्सट के संस्थापक एवं सीईओ रजत वर्धन ने कहा कि तीनों संस्थानों का निवेश छोटे किसानों के लिए जलवायु अनुकूल और तकनीक आधारित समाधान विकसित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाएगा। आईआईटी कानपुर के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड रिसर्च इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (फर्स्ट) के सीईओ डॉ. आशुतोष अग्निहोत्री ने कहा कि स्कैनक्स्ट ने शोध आधारित नवाचार को व्यावसायिक रूप देते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार किया है।