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Kanpur News: साहब मैं जिंदा हूं, कागजों में मृतक दिखा छीन लिया जीने का सहारा

Tue, 18 Nov 2025 02:39 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 18 Nov 2025 02:39 AM IST
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Sir, I am alive, I was shown as dead on paper and my support for living was taken away.
बिल्हौर। साहब मैं रूपा देवी जिंदा हूं। कागजों में मृतक दिखाकर मेरे जीने का सहारा वृद्धा पेंशन बंद कर दी गई। पांच साल से ब्लाॅक, समाज कल्याण विभाग के चक्कर लगा रही हूं फिर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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अब आप से ही सहारा है कि शायद मैं कागजों में फिर से जिंदा हो जाऊं। यह फरियाद राधन पंचायत के पांडेपुर गांव निवासी 94 वर्षीय बुजुर्ग ने समाधान दिवस में सीडीओ दीक्षा जैन से लगाई। इसके बाद सीडीओ ने मामले को गंभीरता से लेकर जिम्मेदारों को जांच करने के निर्देश दिए साथ ही समाज कल्याण अधिकारी से तुंरत पेंशन बहाल करने के निर्देश दिए।
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सीडीओ शनिवार को बिल्हौर तहसील में लोगों की शिकायतें सुन रहीं थी। तभी बुजुर्ग रूपा देवी पुत्र राम प्रकाश के साथ उनके पास पहुंचीं। राम प्रकाश ने बताया कि मां की पेंशन वर्ष 2000 से शुरू हुई थी और 2020 तक आती रही। इसके बाद बिना किसी सूचना के अचानक पैसे आना बंद हो गए। कई बार ग्राम प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी और ब्लॉक के एडीओ, समाज कल्याण अधिकारी से शिकायत की। कई बार आधार कार्ड, पासबुक और अन्य कागजात दिए लेकिन पेंशन बहाल नहीं हुई। एक माह पहले पता चला कि कागजों में मां को मृत दिखा दिया गया है। राम प्रकाश ने कहा मां जीवित हैं हर बार कागज जमा करते हैं पर कोई सुनवाई नहीं हुई। सीडीओ ने समाज कल्याण अधिकारी शिल्पी सिंह को जीवित बुजुर्ग को मृत घोषित करने वाले कर्मचारी की जांच कराने और बुजुर्ग से नया आवेदन कराकर पेंशन बहाल कराने के निर्देश दिए।
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रामपाटी गांव की दो महिलाओं की भी पेंशन बंद

औरंगपुर सांभी पंचायत के रामपाटी गांव की रामदेवी और बृजरानी भी पेंशन बंद होने से परेशान हैं। दोनों महिलाओं ने बताया कि बिना किसी सूचना के उनके खाते में पेंशन आना बंद हो गई। कई बार प्रधान के घर और ब्लॉक कार्यालय के चक्कर लगाए लेकिन समस्या हल नहीं हुई। मामले में बीडीओ नेमचंद्र ने बताया कि दोनों महिलाएं उनसे नहीं मिली हैं। ग्राम विकास अधिकारी से बात कर उनकी मदद की जाएगी। उधर ग्राम प्रधान मंजू रमन सिंह चंदेल ने बताया कि दोनों महिलाओं के ऑनलाइन आवेदन कई बार भेजे गए लेकिन उच्चाधिकारियों की अनदेखी के कारण अब तक पेंशन खाते में नहीं पहुंच सकी है।
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