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सपा-बसपा, कांग्रेस और भाजपा के लिए खतरे का संकेत हैं 65 हजार बुंदेलखंडी, वजह जान उड़ जाएंगे होश
Mon, 27 May 2019 04:31 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बांदा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 27 May 2019 04:31 PM IST
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पीएम मोदी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मायावती
लोकसभा चुनाव 2019 में 65 हजार से ज्यादा बुंदेलियों के गले कोई राजनीतिक दल या प्रत्याशी न उतरना सभी राजनीतिक दलों के लिए खतरे का संकेत है। शायद राजनीतिक पार्टियां बुंदेलियों को धोखा दे रही हैं। तभी वह नोटा इस्तेमाल कर रहे हैं।
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बुंदेलखंड के नाम पर हमदर्दी जताने और वोट हथियाने का रिवाज अब बुंदेलियों पर बेअसर हो रहा है। पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा नोटा का उपयोग बुंदेलखंड में होना यहां के राजनेताओं के लिए सबक और संदेश दोनो है। सूखा, किसान आत्महत्या, पलायन, अन्ना प्रथा, अंधाधुंध नदी और पहाड़ों पर खनन इत्यादि समस्याओं से तंग आ चुके बुंदेलखंड के मतदाताओं का मोह धीरे-धीरे सभी राजनैतिक दलों और नेताओं से भंग हो रहा है।
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बुंदेलखंड में अप्रत्याशित ढंग से नोटा के वोट में इजाफा हुआ है
इस संसदीय चुनाव में बुंदेलखंड में अप्रत्याशित ढंग से नोटा के इस्तेमाल में इजाफा हुआ। सबसे ज्यादा 19,250 नोटा वोट बांदा-चित्रकूट संसदीय क्षेत्र में पड़े, जबकि यहां तीनों प्रमुख दलों (भाजपा, गठबंधन और कांग्रेस) के प्रत्याशी पूर्व सांसद और मौजूदा विधायक थे। दूसरे नंबर पर झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र रहा जहां 18,159 मतदाताओं ने किसी प्रत्याशी को पसंद नहीं किया। नोटा का वोट दिया।
हमीरपुर-महोबा सीट पर भी 15,155 मतदाताओं ने सभी प्रत्याशियों को खारिज कर दिया। उन्होंने नोटा का बटन दबाया। इसी तरह जालौन-उरई सीट पर लगातार पांच बार सांसद का चुनाव जीतने वाले भाजपा के मौजूदा प्रत्याशी सहित कई दिग्गजों को दरकिनार करते हुए यहां के 12,514 मतदाताओं ने नोटा के पक्ष में मतदान किया।
हमीरपुर-महोबा सीट पर भी 15,155 मतदाताओं ने सभी प्रत्याशियों को खारिज कर दिया। उन्होंने नोटा का बटन दबाया। इसी तरह जालौन-उरई सीट पर लगातार पांच बार सांसद का चुनाव जीतने वाले भाजपा के मौजूदा प्रत्याशी सहित कई दिग्गजों को दरकिनार करते हुए यहां के 12,514 मतदाताओं ने नोटा के पक्ष में मतदान किया।