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Kanpur News: पर्यटन विभाग के नाम दर्ज नहीं होगा शुक्ल तालाब, अन्य विकल्प पर हो रहा विचार

Mon, 23 Mar 2026 01:18 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Mon, 23 Mar 2026 01:18 AM IST
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Shukla Talab will not be registered in the name of the Tourism Department, other options are being considered.
कानपुर देहात। अकबरपुर के ऐतिहासिक शुक्ल तालाब को पर्यटन विभाग के नाम दर्ज करने में नियम आड़े आ गया है। दरअसल राजस्व अभिलेख में दर्ज तालाब को अन्य विभाग के नाम दर्ज नहीं किया जा सकता है। केवल संरक्षक बतौर नाम दर्ज हो सकता है। विशेष परिस्थिति में अभिलेख में तालाब से तालाब में अदला बदली की जा सकती है। यह कमिश्नर के अधिकार क्षेत्र में है। वेडिंग डेस्टिनेशन के लिए काम आगे बढ़े इसके लिए अब संरक्षक बनाने के विकल्प पर विचार हो रहा है।
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अकबरपुर में कानपुर इटावा हाईवे से लगा मुगल कालीन ऐतिहासिक शुक्ल तालाब है। यह परिसर करीब दो हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। यहां मुगल कालीन बारादरी, पक्का तालाब, स्नानागार बना है। यह निर्माण वास्तुकला का नायाब नमूना है। प्रदेश सरकार ने पीपीपी मॉडल पर यहां वेडिंग डेस्टिनेशन (विवाह स्थल) बनाने की मंजूरी दी है। इसपर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च किए जाने है। करीब एक साल पहले पर्यटन विभाग व विकासकर्ता संस्था रेडबुड हेरीटेज लिमिटेड के बीच एमओयू हो चुका है।
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विकासकर्ता एजेंसी ने सर्वे के बाद वेडिंग डेस्टिनेशन विकसित करने की सहमति दे दी। इसके बाद शुक्ल तालाब परिसर को पर्यटन विभाग के नाम दर्ज कराने के लिए पत्राचार किया गया। हालांकि कई माह बीतने के बाद भी शुक्ल तालाब परिसर को पर्यटन विभाग के नाम दर्ज नहीं कराया जा सका है। पर्यटन विभाग और विकासकर्ता संस्था के बीच एग्रीमेंट नहीं हो सका है जिसकी वजह से वेडिंग डेस्टिनेशन का काम एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा है। संवाद न्यूज एजेंसी ने बृहस्पतिवार को इस मुद्दे को उठाया था। इसके बाद राजस्व अधिकारी चेते और एडीएम प्रशासन ने बैठक लेकर तहसीलस्तरीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में तालाब में दर्ज जमीन किसी अन्य विभाग के नाम न करने के नियम पर बात हुई। आख्या बनाकर जल्द ही कमिश्नर को भेजी जाएगी। कमिश्नर के निर्देश के अनुसार ही शुक्ल तालाब का संरक्षक बनाने पर निर्णय हो सकेगा।
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वेडिंग डेस्टिनेशन में प्रस्तावित कार्याें पर एक नजर
- परिसर के खाली हिस्से में विवाह स्थल के लिए जरूरी संरचना तैयार करना
- घूमने आने वालों के लिए रेस्टोरेंट संचालन
- एक जिला एक उत्पाद में सभी 75 जिलों के उत्पादों की प्रदर्शनी
- आर्ट गैलरी बनेगी यहां लगी पेटिंग पर्यटक निशुल्क देख सकेंगे
- परिसर में निशुल्क घूमने वाला परिसर क्षेत्र तय होगा
- पर्यटन विकास के लिए प्रति सप्ताह संगीत कार्यक्रम होंगे
- पुरानी इमारतों को संरक्षित करना
- पर्यटकों के बैठने और फोटोग्राफी स्थल बनाना
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वर्जन.................
अकबरपुर स्थित शुक्ल तालाब राजस्व अभिलेखों में तालाब दर्ज है। राजस्व नियमावली में तालाब की जमीन किसी अन्य विभाग के नाम दर्ज करने का प्रावधान नहीं है। तालाब से तालाब की अदला-बदली की जा सकती है। वह भी कमिश्नर के स्तर पर हो सकता है। फिलहाल पर्यटन विभाग को संरक्षक बनाया जा सकता है। बैठक में इसको लेकर सहमति बनी है। जिला स्तर से आख्या कमिश्नर को भेजी जाएगी। वहां से आए निर्देश के अनुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी। - सुरभि शर्मा, एसडीएम अकबरपुर।


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अर्से से बंद है पुरातत्व सर्वेक्षण का अस्थायी कार्यालय

ऐतिहासिक शुक्ल तालाब परिसर संस्कृति विभाग के अधीन रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संगठन का बरादरी के एक हिस्से में अस्थायी कार्यालय कई सालों तक रहा। इस निगरानी की वजह से नगर निकाय का हस्तक्षेप भी न के बराबर ही रहा। करीब 10 साल पहले यहां तैनात कर्मी हटा लिया गया। बारादरी से अस्थायी कार्यालय भी बंद कर दिया गया। इधर परिसर सुरक्षित करने के लिए नगर पंचायत प्रशासन ने बाउंड्रीवॉल कराकर गेट लगवाया।
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