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अगर आपको भी है ये बीमारी तो ध्यान दें, कोलेस्ट्रॉल, प्रोस्टेट कैंसर को दूर करेगी शुभ्रा, शेखर अलसी

Thu, 05 Sep 2019 07:02 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Thu, 05 Sep 2019 07:02 PM IST
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Shubhra, Shekhar linseed to remove cholesterol, prostate cancer
अलसी के फूलों - फोटो : अमर उजाला
कानपुर में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में कुसुम व अलसी फसल पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आगाज हो गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि विश्वविद्यालय के शुभ्रा और शेखर प्रजाति की अलसी का प्रयोग करने से कोलेस्ट्रॉल को कम किया जा सकता है।
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इसके अलावा प्रोस्टेट कैंसर, अर्थराइटिस, स्तन की तमाम बीमारियों के इलाज में भी कारगर साबित हो सकता है। कुलपति प्रो. सुशील सोलोमन ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि अलसी और कुसुम जैसी तिलहनी फसलें बरानी क्षेत्रों के लिए काफी उपयोगी हैं।
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अगर किसानों को इसकी उन्नत बीजें उपलब्ध कराई जाएं तो उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी और पोषक फसल आम जनता के बीच आ सकेगी। निदेशक शोध प्रो. एचजी प्रकाश ने अलसी की शुभ्रा और शेखर प्रजाति के बारे में जानकारी दी।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीपी दीक्षित ने बताया कि अलसी उत्तर भारत की प्रमुख तिलहनी फसल बन चुकी है। बुंदेलखंड के असिंचित क्षेत्रों में इसकी उपज काफी अच्छी हो गई है। यही कारण है कि पिछले तीन वर्षों में अलसी का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है।

 

भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के निदेशक डॉ. ए विष्णुवर्धन रेड्डी ने बताया कि अलसी के तेल को पेंट और वार्निश के उद्योग में काफी प्रयोग किया जा रहा है। इसके तेल में ओमेगा-3 की मात्रा काफी अधिक होती है। इसका उपयोग इंसान अपने अच्छे पोषण के रूप में कर सकता है।

डंठल और बीज दोनों ही कमाई का अच्छा जरिया
कार्यशाला के आयोजन सचिव डॉ. मिर्जा फैयाज हुसैन ने बताया कि अलसी की खेती से किसान दो तरह से लाभ ले सकते हैं। पहला उसके बीज से तेल निकालकर और दूसरा उसके डंठल के रेशों के जरिए। इन रेशों का प्रयोग टेक्सटाइल के क्षेत्र में किया जाता है। इसके अलावा रस्सी तैयार करने, चटाई बनाने, बैग बनाने व अन्य सजावटी सामानों में भी किया जाता है।

दो पुस्तकों का भी हुआ विमोचन
कार्यशाला में विश्वविद्यालय के तिलहन विभाग की ओर से लिखी गईं दो पुस्तकों का भी विमोचन हुआ। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ओपी मथुरिया, डॉ. आरएल श्रीवास्तव को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. खलील खान, डॉ. करम हुसैन, डॉ. हरेश प्रताप सिंह, डॉ. कृपाशंकर, डॉ. धूमसिंह, डॉ. डीपी सिंह, डॉ. पीके सिंह, डॉ. जीएस परिहार आदि मौजूद रहे। कार्यशाला में देशभर के कई कृषि वैज्ञानिकों ने शिरकत की।
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