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जब टॉयलेट जाने के लिए घबरा गया ट्रांसजेंडर छात्र तो लड़की ने हाथ पकड़ कर किया कुछ ऐसा

Fri, 01 Feb 2019 12:33 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 01 Feb 2019 12:33 PM IST
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Short films made by students on gender equality
डेमो
समाज में एक लैंगिक समानता लोगों को कैसे कैसे भेद भाव का सामना करना पड़ता है इसी विषय को लेकर छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी में हुई तीन दिवसीय कार्यशाला में छात्रों ने तीन शॉर्ट फिल्में तैयार की हैं। जिनमें एक ट्रांसजेंडर छात्र को लड़कों के बीच से होकर टॉयलेट जाना होता है। 
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छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी में समाज कार्य विभाग, यूपी टेक्निकल सपोर्ट यूनिट लखनऊ और सीएनएसडीआई लखनऊ की ओर से आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का समापन हुआ। कार्यशाला के अंतिम दिन छात्रों के पांच समूह ने लैंगिक समानता पर पांच शॉर्ट फिल्में प्रस्तुत कीं। कार्यशाला का विषय सोशल बिहैवियर चेंज कम्युनिकेशन था। कार्यशाला के अंतिम दिन छात्रों ने सामाजिक फिल्म बनाना और उनका निर्देशन भी सीखा।
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मुद्दे की गंभीरता, संवेदनशीलता व उसके संदेश को कैसे लक्षित समूह तक पहुंचाया जाए, इसकी जानकारी ली। यूपीटीयू की सीनियर बीसीसी स्पेशलिस्ट शालिनी रमन ने कहा कि डेवलपमेंट सेक्टर में ऐसे छात्रों की जरूरत पड़ती है जो क्रिएटिव हों। छात्रों ने साहब हम भी हैं, हम हैं या हम नहीं, लेगपीस, शीरोज और सवाल शॉर्ट फिल्म की प्रस्तुति दी। विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप कुमार सिंह ने कहा कि पांच गोद लिए गांवों में कुपोषण और अन्य सामाजिक मुद्दों पर फिल्म बनाकर दिखाया जाएगा। डॉ. अनीता अवस्थी, सत्येंद्र सिंह चौहान, डॉ. एपी सिंह, डॉ. एसपी वर्मा मौजूद रहे। 
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ये हैं बेस्ट तीन फिल्में
साहब हम भी हैं : इस फिल्म को विजेता घोषित किया गया। कॉलेज का सीन दिखाया। जिसमें कई छात्रों के बीच एक स्टूडेंट ट्रांसजेंडर भी है। उससे कोई बात नहीं कर रहा। वह घबराया हुआ है। टॉयलेट जाना था, लेकिन परेशान रहा। तभी एक लड़की आती है और कहती है साहब हम भी है और उसे लेडीज टॉयलेट में ले जाती है। इसमें संजय, बुशरा, सूर्या, सनी, सोनम को विजेता घोषित किया गया।

हम हैं या हम नहीं : घर का माहौल दिखाया गया। माता पिता की तीन लड़कियां हैं। पुत्र की आस में पत्नी फिर गर्भवती है। पिता लड़कियों को पढ़ने नहीं जाने देता। साथ ही कहता है कि लड़का नहीं हुआ तो गिरा देंगे। दो बेटियां तो पढ़ने जाने से रुक जाती हैं, तीसरी पिता से कहती है हम हैं या हम नहीं और यह कहते हुए आगे बढ़ जाती है। रूबी, प्रगति, मेघना, वर्णिका ने अभिनय किया।   

लेगपीस : यूनिवर्सिटी कैंटीन का दृश्य दिखाया गया। लड़के शॉर्ट ड्रेस पहने लड़की पर कमेंट करते हैं और लेगपीस (उसके पैर) पर कमेंट करते हैं। थोड़ी देर में कैंटीन वाला लड़कों से कहता है, देखों और एक और लेगपीस। लड़के घूमते हैं तो देखते हैं उनकी बहन खड़ी है। वह दुकानदार को पीट देते हैं। सारिका, निखिल ने दमदार अभिनय किया।  
 
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