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जूता इंडस्ट्री को मिलेंगे कुशल कारीगर, आगरा की तर्ज पर कानपुर में खुलेगा ट्रेनिंग सेंटर

Sat, 27 Feb 2021 10:11 AM IST
शिखा पांडेय अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 27 Feb 2021 10:11 AM IST
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Shoe industry will get skilled craftsmen
सांकेतिक तस्वीर
रमईपुर में बनाए जा रहे लेदर मेगा क्लस्टर के बीच जूता उद्योग के लिए अच्छी खबर है। आगरा के सेंट्रल फुटवियर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की तर्ज पर जाजमऊ से थोड़ा आगे कानपुर-उन्नाव लेदर क्लस्टर डेवलेपमेंट कंपनी (केएलसी) में भी ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाएगा।
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इसके लिए एमएसएमई मंत्रालय की ओर से कुछ दिन पहले 25 करोड़ की डीपीआर बनाकर मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजी गई है। इस सेंटर के बनने से जूता इंडस्ट्री को हर साल 600 प्रशिक्षित लोग मिलेंगे। इसके अलावा आउटरिच कार्यक्रम के तहत दो हजार से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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शहर का घरेलू चमड़ा उद्योग 20 हजार करोड़ का है, जबकि आठ हजार करोड़ का निर्यात होता आया है। हालांकि कोरोना के चलते निर्यात में खासी गिरावट आई है। चमड़ा उद्योग में कुशल श्रमिकों की बहुत कमी है। इस सेंटर के बनने से यह कमी दूर होगी।
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यहां पर छह महीने से दो साल तक के डिजाइनिंग, कटिंग, स्टिचिंग आदि के प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। नए वित्तीय वर्ष में इसके शुरू होने की संभावना है। पहले इस सेंटर को फजलगंज स्थित एमएसएमई विकास केंद्र में खोलने की योजना थी लेकिन सरकार के निर्देश पर अब इसे केएलसी में बनाया जाना है।

केएलसी में इस सेंटर को 14 हजार स्क्वायर फीट में विकसित किया जाएगा। केएलसी के एग्जिक्यूटिव निदेशक ओपी पांडेय ने बताया कि डीपीआर की मंजूरी के बाद मंत्रालय और केएलसी के बीच मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) साइन किया जाएगा। सीएफटीआई के एक अधिकारी ने बताया कि जुलाई से अलग-अलग कोर्स में युवा या अन्य लोग इसमें प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे।


चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष जावेद इकबाल ने बताया कि चमड़ा उद्योग में दक्ष लोगों की बहुत कमी है। इससे जूता उद्योग को खासा लाभ होगा। बहुत बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा। प्रशिक्षित खुद का व्यापार या कंपनियों में नौकरी कर सकेंगे। जूता क्षेत्र में डिजाइनरों की मौजूदा समय में खासी मांग है। जूता उद्योग का निर्यात भी बढ़ने की संभावना बढ़ेगी।
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