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इटावा: महाभारत का उदाहरण देकर बोले शिवपाल- युद्ध में सब कुछ हो जाता है नाश
Thu, 14 Oct 2021 02:41 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 14 Oct 2021 02:41 PM IST
सार
शिवपाल सिंह ने कहा कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह से चरखा दांव सीखा है। 40 साल उनके साथ रहे हैं। धोबी पाट व चरखा अदाओं से विरोधियों को जोड़ने का भी काम सीखा है। इसलिए चुनाव में चरखा दांव और धोबी पाट दोनों चलेंगे।
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पत्रकारों से बातचीत करते प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने महाभारत की कहानी धृतराष्ट्र और शकुनि के चरित्र का जिक्र करते हुए युद्ध की बात कही। उन्होंने कहा कि युद्ध में सब कुछ नाश हो जाता है। गुरुवार को प्रसपा अध्यक्ष सैफई स्थित एसएस मेमोरियल पब्लिक स्कूल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर महंगाई व भ्रष्टाचार को लेकर भी हमला बोलते हुए कहा कि उनकी नीतियों से जनता परेशान है। शिवपाल सिंह ने कहा कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह से चरखा दांव सीखा है। 40 साल उनके साथ रहे हैं।
धोबी पाट व चरखा अदाओं से विरोधियों को जोड़ने का भी काम सीखा है। इसलिए चुनाव में चरखा दांव और धोबी पाट दोनों चलेंगे। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन रथ कीकृष्ण की नगरी वृंदावन मथुरा से शुरुआत की। अब राम की नगरी में यात्रा का सामापन करेंगे।
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उन्होंने किसी नेता का नाम लिए बिना कहा कि जुआं खेलना ठीक नहीं है। धृतराष्ट्र को देखना चाहिए था उस समय शकुनी ने जुआ खेला था। मामला परिवार का था। जुआ खेलते तो दुर्योधन से खेलते उस शकुनि से खेल गए, शकुनि चालबाज था। उससे जुआ नहीं खेलना चाहिए था। अपने परिवार के मामले में वह महाभारत के उदाहरण से संकेत दे रहे थे।
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इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर महंगाई व भ्रष्टाचार को लेकर भी हमला बोलते हुए कहा कि उनकी नीतियों से जनता परेशान है। शिवपाल सिंह ने कहा कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह से चरखा दांव सीखा है। 40 साल उनके साथ रहे हैं।
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धोबी पाट व चरखा अदाओं से विरोधियों को जोड़ने का भी काम सीखा है। इसलिए चुनाव में चरखा दांव और धोबी पाट दोनों चलेंगे। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन रथ कीकृष्ण की नगरी वृंदावन मथुरा से शुरुआत की। अब राम की नगरी में यात्रा का सामापन करेंगे।
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उन्होंने किसी नेता का नाम लिए बिना कहा कि जुआं खेलना ठीक नहीं है। धृतराष्ट्र को देखना चाहिए था उस समय शकुनी ने जुआ खेला था। मामला परिवार का था। जुआ खेलते तो दुर्योधन से खेलते उस शकुनि से खेल गए, शकुनि चालबाज था। उससे जुआ नहीं खेलना चाहिए था। अपने परिवार के मामले में वह महाभारत के उदाहरण से संकेत दे रहे थे।