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यूपी: मवेशी कटने से आक्रोशित भीड़ ने रोकी शताब्दी, दिल्ली जाने और आने वाले रूट की ट्रेनें प्रभावित
Tue, 03 Sep 2019 11:11 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 03 Sep 2019 11:11 PM IST
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शताब्दी ट्रेन (फाइल फोटो)
- फोटो : Indian Rail Info
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कंचौसी रेलवे स्टेशन के पास मंगलवार को ट्रेन की चपेट में आने से कई मवेशियों की मौत होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने दिल्ली-कानपुर की ट्रेनों को रोक दिया। इससे कानपुर आने वाली रिवर्स शताब्दी एक्सप्रेस समेत करीब 12 ट्रेनें फंसी रहीं।
यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मंगलवार को एक के बाद एक गुजरी कई ट्रेनों से ट्रैक पर आए कई मवेशी कट गए। इससे नाराज पशु मालिकों और ग्रामीणों ने हल्ला बोल दिया। वे पटरी पर आ गए और लाल कपड़े दिखाकर कानपुर आने वाली रिवर्स शताब्दी को रोक दिया।
शाम पौने छह से साढ़े छह बजे तक ट्रेन खड़ी रही। इसके पीछे भी कई ट्रेनें फंसी रहीं। यात्रियों की परेशानियां देखकर रेलवे स्टाफ ने ग्रामीणों की खुशामद की। इस पर रिवर्स शताब्दी को गुजार दिया गया। ट्रेन आधे घंटे की देरी से रात सवा नौ बजे सेंट्रल स्टेशन पर आ गई।
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साथ ही कानपुर से दिल्ली जाने वाला अप रूट बाधित करने से कटिहार-अमृतसर एक्सप्रेस, ऊंचाहार एक्सप्रेस, फरक्का एक्सप्रेस समेत करीब 12 ट्रेनें प्रभावित हुईं। आरपीएफ और सिविल पुलिस के समझाने के बाद मामला शांत हुआ और रेल रूट सामान्य हुआ। दरअसल, ट्रैक के दोनों तरफ बैरिकेडिंग न होने से बड़ी संख्या में रोजाना ट्रेनों की चपेट में आकर मवेशियों की मौत हो रही है।
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यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मंगलवार को एक के बाद एक गुजरी कई ट्रेनों से ट्रैक पर आए कई मवेशी कट गए। इससे नाराज पशु मालिकों और ग्रामीणों ने हल्ला बोल दिया। वे पटरी पर आ गए और लाल कपड़े दिखाकर कानपुर आने वाली रिवर्स शताब्दी को रोक दिया।
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शाम पौने छह से साढ़े छह बजे तक ट्रेन खड़ी रही। इसके पीछे भी कई ट्रेनें फंसी रहीं। यात्रियों की परेशानियां देखकर रेलवे स्टाफ ने ग्रामीणों की खुशामद की। इस पर रिवर्स शताब्दी को गुजार दिया गया। ट्रेन आधे घंटे की देरी से रात सवा नौ बजे सेंट्रल स्टेशन पर आ गई।
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साथ ही कानपुर से दिल्ली जाने वाला अप रूट बाधित करने से कटिहार-अमृतसर एक्सप्रेस, ऊंचाहार एक्सप्रेस, फरक्का एक्सप्रेस समेत करीब 12 ट्रेनें प्रभावित हुईं। आरपीएफ और सिविल पुलिस के समझाने के बाद मामला शांत हुआ और रेल रूट सामान्य हुआ। दरअसल, ट्रैक के दोनों तरफ बैरिकेडिंग न होने से बड़ी संख्या में रोजाना ट्रेनों की चपेट में आकर मवेशियों की मौत हो रही है।