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शनि होंगे वक्री: बीमारियों से मिलेगी राहत, जानिए राशियों पर पड़ेगा क्या प्रभाव
Sun, 23 May 2021 10:43 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 23 May 2021 10:43 AM IST
सार
जिनकी कुंडली में शनि वक्री है, उन्हें इस कालखंड में करियर से संबंधित लाभ मिलेगा। उनके स्वास्थ्य में भी सुधार आएगा। वहीं, जिनकी राशि मिथुन, तुला, धनु, मकर, कुंभ है, शनि की साढ़ेसाती चल रही है इन लोगों के लिए भी यह कालखंड उत्तम होगा।
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शनि होंगे वक्री
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
शनि 23 मई से वक्री हो रहे हैं। शनि का वक्री होना भारत के लिए काफी अच्छा माना जा रहा है। कोरोना के प्रभाव में कमी आएगी और अन्य बीमारियों से भी लोगों को राहत मिलेगी। पद्मेश इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंसेस के संस्थापक केए दुबे पद्मेश ने बताया कि जिनकी कुंडली में शनि वक्री है, उन्हें इस कालखंड में करियर से संबंधित लाभ मिलेगा।
उनके स्वास्थ्य में भी सुधार आएगा। वहीं, जिनकी राशि मिथुन, तुला, धनु, मकर, कुंभ है, शनि की साढ़ेसाती चल रही है इन लोगों के लिए भी यह कालखंड उत्तम होगा। ये लोग अभी शनि की साढ़ेसाती से 17 जनवरी 2023 तक प्रभावित रहेंगे। लेकिन, वक्री होने के कारण इस काल खंड में लाभ मिलता रहेगा।
26 मई को दोपहर 2:17 से शाम 7:19 बजे तक खग्रास चंद्र ग्रहण पड़ेगा। यह पूर्वी राज्यों में दिखेगा। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में असर नहीं पड़ेगा। 10 जून को सूर्य ग्रहण होगा। यह भी भारत में नहीं दिखेगा, लेकिन दोनों ग्रहण के प्रभाव से कोरोना का प्रभाव कम होगा।
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उनके स्वास्थ्य में भी सुधार आएगा। वहीं, जिनकी राशि मिथुन, तुला, धनु, मकर, कुंभ है, शनि की साढ़ेसाती चल रही है इन लोगों के लिए भी यह कालखंड उत्तम होगा। ये लोग अभी शनि की साढ़ेसाती से 17 जनवरी 2023 तक प्रभावित रहेंगे। लेकिन, वक्री होने के कारण इस काल खंड में लाभ मिलता रहेगा।
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26 मई को दोपहर 2:17 से शाम 7:19 बजे तक खग्रास चंद्र ग्रहण पड़ेगा। यह पूर्वी राज्यों में दिखेगा। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में असर नहीं पड़ेगा। 10 जून को सूर्य ग्रहण होगा। यह भी भारत में नहीं दिखेगा, लेकिन दोनों ग्रहण के प्रभाव से कोरोना का प्रभाव कम होगा।
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20 जून से गुरु वक्री होगा, वो भी कोरोना के प्रभाव को कम करेगा। यदि तीसरी लहर आती भी है तो वह 11 अक्तूबर के बाद ही संभव है। लोगों को मंगल का दान करना चाहिए, इससे पृथ्वी का वातावरण सुखद और उल्लास पूर्ण रहेगा।
पंडित मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि वैदिक ज्योतिष में शनि को सबसे क्रूर ग्रह माना जाता है। यह हम सभी के कर्मों का फल प्रदान करते हैं। इस वजह से नौ ग्रहों के परिवार में उन्हें न्यायाधीश की उपाधि भी दी गई है।
23 मई की दोपहर 2:50 बजे शनि देव अपनी ही राशि मकर में वक्री हो जाएंगे और उल्टी चाल चलने लगेंगे। शनि 141 दिन वक्री अवस्था में रहेंगे और चार महीने बाद 11 अक्तूबर को सुबह 7:48 बजे फिर से मार्गी हो जाएंगे।
पंडित मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि वैदिक ज्योतिष में शनि को सबसे क्रूर ग्रह माना जाता है। यह हम सभी के कर्मों का फल प्रदान करते हैं। इस वजह से नौ ग्रहों के परिवार में उन्हें न्यायाधीश की उपाधि भी दी गई है।
23 मई की दोपहर 2:50 बजे शनि देव अपनी ही राशि मकर में वक्री हो जाएंगे और उल्टी चाल चलने लगेंगे। शनि 141 दिन वक्री अवस्था में रहेंगे और चार महीने बाद 11 अक्तूबर को सुबह 7:48 बजे फिर से मार्गी हो जाएंगे।