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योगीराज 2.0: कोई जातिगत समीकरण में फंसा तो किसी का प्रदर्शन खराब, मंत्रिमंडल में इन्हें नहीं मिला दोबारा मौका
Sun, 27 Mar 2022 03:13 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 27 Mar 2022 03:13 PM IST
सार
सियासी गलियारों में चर्चा रही कि जातिगत समीकरणों के चलते सतीश महाना मंत्रिमंडल में जगह नहीं बना सके।
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सतीश महाना और नीलिमा कटियार
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूसरी पारी में कई मंत्रियों को जगह न मिलने को लेकर तमाम अटकलें लगाई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि इस बार मंत्री पद के बंटवारे में जातिगत समीकरणों को सबसे ज्यादा अहमियत दी गई है।
साथ ही मंत्रियों के पिछले पांच साल के कामकाज की रिपोर्ट को भी आधार बनाए जाने की बात कही जा रही है। नई सरकार में महानगर के एक भी विधायक को प्रतिनिधित्व न मिलने को इन्हीं दो कारणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
लगातार आठवीं बार विधायक चुने गए सतीश महाना को मंत्रिमंडल में जगह न मिलने पर माना जा रहा है कि पार्टी उनके अनुभव का लाभ 2024 के लोकसभा चुनाव में ले सकती है। फिलहाल, उन्हें विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने की तैयारी है।
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साथ ही मंत्रियों के पिछले पांच साल के कामकाज की रिपोर्ट को भी आधार बनाए जाने की बात कही जा रही है। नई सरकार में महानगर के एक भी विधायक को प्रतिनिधित्व न मिलने को इन्हीं दो कारणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
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लगातार आठवीं बार विधायक चुने गए सतीश महाना को मंत्रिमंडल में जगह न मिलने पर माना जा रहा है कि पार्टी उनके अनुभव का लाभ 2024 के लोकसभा चुनाव में ले सकती है। फिलहाल, उन्हें विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने की तैयारी है।
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वहीं सियासी गलियारों में यह भी चर्चा रही कि जातिगत समीकरणों के चलते वह मंत्रिमंडल में जगह नहीं बना सके। महाना भाजपा की पिछली सरकारों में भी मंत्री रह चुके हैं। वह विधानसभा अध्यक्ष बनाए भी जाते हैं तो जिले के विकास और सरकार की योजनाओं को गति देने में उनकी भूमिका को उतना अहम नहीं कहा जा सकता।
महानगर से नीलिमा कटियार भी लगातार दूसरी बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं बना सकीं। इन्हें लेकर चर्चा तेज रही कि सरकार की तरफ से तैयार कराए गए रिपोर्ट कार्ड में मंत्री के रूप में उनका कामकाज संतोषजनक नहीं मिला।
महानगर से नीलिमा कटियार भी लगातार दूसरी बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं बना सकीं। इन्हें लेकर चर्चा तेज रही कि सरकार की तरफ से तैयार कराए गए रिपोर्ट कार्ड में मंत्री के रूप में उनका कामकाज संतोषजनक नहीं मिला।
अपना दल के कोटे से बिंदकी से विधायक चुने गए जय कुमार जैकी को लेकर भी इसी तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि, कई ऐसे लोगों को भी दोबारा मंत्री की भूमिका में रखा गया है, जिनका रिपोर्ट कार्ड सरकार की नजर में ठीक नहीं था। इसके पीछे जातिगत समीकरणों को साधने का तर्क दिया जा रहा है।
इस बार अकबरपुर-रनियां सीट से विधायक प्रतिभा शुक्ला को ब्राह्मण बिरादरी में पकड़ मजबूत करने के लिए मंत्री पद दिया गया है। इसी तरह राकेश सचान को क्षेत्र में पिछड़ी जातियों को पार्टी में मजबूती देने के लिए कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है।
इस बार अकबरपुर-रनियां सीट से विधायक प्रतिभा शुक्ला को ब्राह्मण बिरादरी में पकड़ मजबूत करने के लिए मंत्री पद दिया गया है। इसी तरह राकेश सचान को क्षेत्र में पिछड़ी जातियों को पार्टी में मजबूती देने के लिए कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है।