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Kanpur News: छोटी-छोटी बातों की ज्योतिष जानकारी इंटरनेट पर खोजना बना सकता मनोरोगी
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कानपुर। मेस्टन रोड स्थित रामलीला भवन में रविवार को इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंसेस(आईकास) के कानपुर चैप्टर की ओर से उपाधि अलंकरण समारोह का आयोजन किया गया। इसमें उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को उपाधियां देने के साथ ही ज्योतिष पर विस्तृत चर्चा हुई।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि ज्योतिष में आंकड़ों का संकलन करते हुए विधिवत शोध करेंगे तो आम लोगों को लाभ मिलेगा। बीएचयू और आईकास मिलकर कुछ नए एमओयू कर सकते हैं जिससे ज्योतिष का विकास हो। प्रोफेसर ने कहा कि मेडिकल साइंस की तरह ज्योतिष के सूत्रों को अप्लाई करके उसके फल का आकलन करना जरूरी है। अयोध्या से आए संत स्वामी मिथिलेश नंदिनी शरण जी महाराज ने कहा कि जो लोग रोज-रोज ज्योतिष की रील देखते रहते हैं। छोटी-छोटी बातों की ज्योतिषीय जानकारी इंटरनेट पर खोजते हैं वे सावधान हो जाएं। उनकी यह प्रवृत्ति उन्हें मनोरोगी बना देगी।
आईकास के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवनीत ने कहा कि आज की समस्या है कि जब कुछ अच्छा होता है तो बोलते हैं कि मैने किया, जब गलत हो जाता तो उसने किया। उन्होंने कहा कि ज्योतिष समाज के दिए दिशा दिखाने का काम करता है। आईकास के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश चिंतक ने कहा कि अक्सर लोग मानते हैं कि जन्म से प्रारंभ है, मृत्यु से अंत है। जीवन की यही परिभाषा है लेकिन सच यह है कि जीवन एक अनंत यात्रा है। व्यक्ति को सलाह दी जा सकती है कि अपने मस्तिष्क को थोड़ा पवित्र करो तो अधोगमन से बच सकते हो, ज्योतिष है ही इसके लिए। नौकरी कब मिलेगी, कब क्या होगा, इसके लिए एस्ट्रोलॉजी नहीं है। चिंतक ने कहा कि अगर ज्योतिष को आत्मा से जोड़े रखेंगे तो ज्योतिष के मर्म तक पहुंच सकते हैं। इस दौरान शशिशेखर त्रिपाठी, ज्योतिष वाचस्पति, नीरज जोशी ज्योतिष कलामणि, सुमनलता को कोविद उपाधि से सम्मानित किया गया।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि ज्योतिष में आंकड़ों का संकलन करते हुए विधिवत शोध करेंगे तो आम लोगों को लाभ मिलेगा। बीएचयू और आईकास मिलकर कुछ नए एमओयू कर सकते हैं जिससे ज्योतिष का विकास हो। प्रोफेसर ने कहा कि मेडिकल साइंस की तरह ज्योतिष के सूत्रों को अप्लाई करके उसके फल का आकलन करना जरूरी है। अयोध्या से आए संत स्वामी मिथिलेश नंदिनी शरण जी महाराज ने कहा कि जो लोग रोज-रोज ज्योतिष की रील देखते रहते हैं। छोटी-छोटी बातों की ज्योतिषीय जानकारी इंटरनेट पर खोजते हैं वे सावधान हो जाएं। उनकी यह प्रवृत्ति उन्हें मनोरोगी बना देगी।
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आईकास के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवनीत ने कहा कि आज की समस्या है कि जब कुछ अच्छा होता है तो बोलते हैं कि मैने किया, जब गलत हो जाता तो उसने किया। उन्होंने कहा कि ज्योतिष समाज के दिए दिशा दिखाने का काम करता है। आईकास के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश चिंतक ने कहा कि अक्सर लोग मानते हैं कि जन्म से प्रारंभ है, मृत्यु से अंत है। जीवन की यही परिभाषा है लेकिन सच यह है कि जीवन एक अनंत यात्रा है। व्यक्ति को सलाह दी जा सकती है कि अपने मस्तिष्क को थोड़ा पवित्र करो तो अधोगमन से बच सकते हो, ज्योतिष है ही इसके लिए। नौकरी कब मिलेगी, कब क्या होगा, इसके लिए एस्ट्रोलॉजी नहीं है। चिंतक ने कहा कि अगर ज्योतिष को आत्मा से जोड़े रखेंगे तो ज्योतिष के मर्म तक पहुंच सकते हैं। इस दौरान शशिशेखर त्रिपाठी, ज्योतिष वाचस्पति, नीरज जोशी ज्योतिष कलामणि, सुमनलता को कोविद उपाधि से सम्मानित किया गया।
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