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विद्यालयों को लौटानी होगी फीस
अमर उजाला कानपुर
Updated Mon, 13 Jul 2015 01:15 AM IST
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शासकीय व निजी माध्यमिक विद्यालयों में सत्र परिवर्तन के नाम पर स्टूडेंटों से दो बार वसूली गई अप्रैल, मई और जून की फीस स्टूडेंट को वापस या समायोजित करनी होगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. अवध नरेश शर्मा ने विद्यालयों को यह आदेश जारी किए हैं।
उन्होंने कहा है कि किसी भी विद्यालय को दो बार फीस लेने का अधिकार नहीं है। विद्यालयों में पहुंचे शिक्षा निदेशक के इस आदेश ने खलबली मचा दी है। विद्यालय संचालकों का कहना है कि हमेशा की तरह फीस अलग अलग कई मदों में बैंक में जमा कर दी गई है। इसे निकालना बहुत मुश्किल है। हालांकि वे फीस आगे के महीनों में समायोजित करने पर विचार कर रहे हैं।
माध्यमिक शिक्षा में नियमानुसार अभी तक विद्यालयों का सत्र 1 जुलाई से 20 मई तक चलता था। विद्यालय गर्मी की छुट्टी से पहले जून की फीस भी जमा करा लेते थे। इससे जुलाई में पुन: या नए प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट जुलाई से फीस जमा करते थे। पर, 2015 में आए नए आदेश में कहा गया कि सत्र 1 अप्रैल से शुरू किया जाए।
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विद्यालयों ने इस आदेश को मानते हुए 1 अप्रैल से प्रवेश शुरू कर दिए और 1 अप्रैल को नया सत्र मानते हुए नए-पुराने दोनों स्टूडेंटों से अप्रैल, मई और जून की फीस जमा करा ली। चूंकि विद्यालय में पहले से पढ़ रहे स्टूडेंट पिछले सत्र के नियमों के अनुसार जून तक की फीस पहले ही जमा कर चुके थे, ऐसे में उनसे दोबारा अप्रैल, मई और जून की फीस जमा कराए जाने का विरोध शुरू हो गया।
अभिभावकों और शिक्षक संघों का विरोध लखनऊ तक पहुंच गया जिसे शिक्षा निदेशक ने संज्ञान में लिया और विद्यालयों को आदेश दिए कि जो छात्र विद्यालय में पहले से पढ़ रहे हैं और नई कक्षा में प्रवेश करने से पहले अप्रैल, मई और जून की फीस जमा कर चुके हैं, उनसे दोबारा इन तीन महीनों की फीस न जमा कराई जाए। जो विद्यालय यह फीस ले चुके हैं वह तत्काल फीस वापस करें।
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उन्होंने कहा है कि किसी भी विद्यालय को दो बार फीस लेने का अधिकार नहीं है। विद्यालयों में पहुंचे शिक्षा निदेशक के इस आदेश ने खलबली मचा दी है। विद्यालय संचालकों का कहना है कि हमेशा की तरह फीस अलग अलग कई मदों में बैंक में जमा कर दी गई है। इसे निकालना बहुत मुश्किल है। हालांकि वे फीस आगे के महीनों में समायोजित करने पर विचार कर रहे हैं।
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माध्यमिक शिक्षा में नियमानुसार अभी तक विद्यालयों का सत्र 1 जुलाई से 20 मई तक चलता था। विद्यालय गर्मी की छुट्टी से पहले जून की फीस भी जमा करा लेते थे। इससे जुलाई में पुन: या नए प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट जुलाई से फीस जमा करते थे। पर, 2015 में आए नए आदेश में कहा गया कि सत्र 1 अप्रैल से शुरू किया जाए।
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विद्यालयों ने इस आदेश को मानते हुए 1 अप्रैल से प्रवेश शुरू कर दिए और 1 अप्रैल को नया सत्र मानते हुए नए-पुराने दोनों स्टूडेंटों से अप्रैल, मई और जून की फीस जमा करा ली। चूंकि विद्यालय में पहले से पढ़ रहे स्टूडेंट पिछले सत्र के नियमों के अनुसार जून तक की फीस पहले ही जमा कर चुके थे, ऐसे में उनसे दोबारा अप्रैल, मई और जून की फीस जमा कराए जाने का विरोध शुरू हो गया।
अभिभावकों और शिक्षक संघों का विरोध लखनऊ तक पहुंच गया जिसे शिक्षा निदेशक ने संज्ञान में लिया और विद्यालयों को आदेश दिए कि जो छात्र विद्यालय में पहले से पढ़ रहे हैं और नई कक्षा में प्रवेश करने से पहले अप्रैल, मई और जून की फीस जमा कर चुके हैं, उनसे दोबारा इन तीन महीनों की फीस न जमा कराई जाए। जो विद्यालय यह फीस ले चुके हैं वह तत्काल फीस वापस करें।