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पीडब्ल्यूडी में घपला: सड़क निर्माण में मशीनरी आई नहीं और ठेकेदार को कर दिया 95 लाख का भुगतान

Tue, 10 Dec 2024 11:32 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 10 Dec 2024 11:32 PM IST
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Scam in PWD: Machinery did not arrive for road construction and 95 lakh rupees were paid to the contractor
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
वर्ष 2010 में पीडब्ल्यूडी खंड-2 ने 19 करोड़ सात लाख रुपये की लागत से सड़क का निर्माण कराया। मशीनरी के नाम पर करीब 95 लाख रुपये भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया, जबकि इसमें न बिल वाउचर लगाया और न ही एनवाइस। प्रमुख अभियंता को जांच में अनियमितता मिली तो नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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वर्ष 2010 में बसपा शासन काल में बांदा से नरैनी राजमार्ग के चौड़ीकरण का कार्य कराया गया था। इसमें करीब 19 करोड़ सात लाख रुपये आवंटित किए गए थे। लोक निर्माण विभाग खंड-2 को सड़क बनाने का जिम्मा सौंपा गया था। इसमें जेई से लेकर एक्सईएन तक ने जमकर गोलमाल किया। प्रमुख अभियंता ने कहा है कि वर्ष 2010 में सड़क निर्माण में कुल लागत 19 करोड़ सात लाख रुपये आई थी। जनवरी 2010 में इसका निर्माण कराया गया। इस मार्ग के निर्माण में आई शिकायतों के आधार पर जांच की गई।
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शासनादेश के अनुसार ठेकेदार को मोबलाइजेशन एवं मशीनरी अग्रिम, विशेष रूप से कार्य के लिए जरूरी उपकरणों व मशीनरी के लिए स्वीकृत किया जा सकता है। साथ ही ठेकेदार को विशेष उद्देश्य से कार्य स्थल पर लाई गई नई मशीनरी के प्रमाण के संबंध में ऐसे उपकरणों व मशीनों की इनवाइस या बिल की प्रति लोक निर्माण विभाग को प्रस्तुत करना होता है।
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राज्य सड़क निधि के तहत स्वीकृत कार्य के अभिलेखों की जांच जून 2010 में कराई गई थी। इसमें पाया गया कि एक्सईएन ने ठेकेदार को मशीनरी के लिए अग्रिम भुगतान 95 लाख रुपये कर दिया था। नई मशीनरी वास्तव में खरीदी गई व कार्य स्थल पर लाई गई थी, इसे साबित करने के लिए कोई बीजक (बिल) नहीं दिया गया। प्रमुख अभियंता की जांच में यह अनियमितता मिली की 95 लाख रुपये का भुगतान बिना मशीनरी लाए ही कर दिया गया। उन्होंने अधिकारियों से नोटिस देकर जवाब मांगा है।

सड़कों को बनाने में मशीनरी का उपयोग किया जाता है और उसका भुगतान किया जाता है। कभी कभार बिल वाउचर ठेकेदार से बाद में लेकर प्रस्तुत किए जाते हैं। इस मामले में भी ऐसा हुआ होगा।- सुरेंद्र कुमार, अधीक्षण अभियंता, लोक निर्माण विभाग, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा

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