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संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में करोड़ों का घोटाला, 10 साल जांच, चार इंजीनियरों समेत छह पर रिपोर्ट

Mon, 27 May 2019 12:37 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 27 May 2019 12:37 PM IST
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scam in Complete rural employment scheme
करोड़ाें का घोटाला (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Vishnu Sharma
जिले के विभिन्न ब्लॉकों में संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (एसजीआरवाई) के तहत हुए विकास कार्यों में करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला समाने आया है। यह घोटाला जिला पंचायत विभाग में हुआ है। इसमें किसी नेता या ठेकेदार का नाम सामने नहीं आया है, बल्कि तत्कालीन अभियंता, अवर अभियंता, अपर मुख्य अभियंता, अपर मुख्य अधिकारी और कैशियर ने घालमेल किया था।
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दस साल तक चली विजिलेंस की जांच में इन अफसरों की कारगुजारी का खुलासा हुआ। इस पर विजिलेंस विभाग के इंस्पेक्टर संजय कुमार दीक्षित ने आरोपियों के खिलाफ कोतवाली थाने में गबन, धोखाधड़ी, साजिश रचने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। शहर के ग्रामीण इलाकों के विकास और ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराने के लिए 2003-04 में संपूर्ण ग्रामीण विकास योजना शुरू की गई थी।
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जांच में सामने आया कि तीस फीसदी काम ही ग्रामीण मजदूरों से कराया गया

इस योजना के तहत जिला पंचायत विभाग को विकास कार्य कराना था। उस वक्त जिला पंचायत विभाग में राज कमल सक्सेना और विनोद कुमार माखीजा अभियंता थे। योगेंद्र कुमार द्विवेदी, चिरंतन त्रिपाठी अवर अभियंता, नरेश कुमार अपर मुख्य अधिकारी और रमाशंकर त्रिपाठी कैशियर थे। इन अफसरों ने नित्येश्वर आश्रम में तालाब की खुदाई के साथ ही ग्रामीण इलाकों में सड़क, पुलिया का निर्माण कराया था।

इंस्पेक्टर संजय कुमार दीक्षित की जांच में सामने आया कि तीस फीसदी काम ही ग्रामीण मजदूरों से कराया गया। 70 फीसदी काम जेसीबी समेत अन्य मशीनों से कराया गया। इसके बाद फर्जी मास्टर रोल तैयार किया गया, जिसमें मजदूरों के फर्जी नाम-पते डाले। फिर कैशियर से बिल पास कराकर करोड़ों रुपये हड़प लिए। 

 
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2009 में शासन ने सौंपी थी जांच, ये हुए नामजद

शासन ने घोटाले की जांच सन् 2009 में विजिलेंस विभाग को सौंपी थी। इस पर इंस्पेक्टर संजय कुमार ने मौके पर पहुंच कर सड़कों व तालाब का निरीक्षण किया। मजदूरों के नाम-पते को तस्दीक किया। पता चला कि आरोपियों ने मजदूरों के फर्जी हस्ताक्षर कर बिल तैयार कराकर उसे पास कराया था। कोतवाली प्रभारी के मुताबिक मामले की विवेचना के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इन कामों में हुआ खेल
तत्कालीन अवर अभियंता योगेंद्र कुमार द्विवेदी ने नित्येश्वर आश्रम में तालाब खुदाई, अवर अभियंता चिरतंन त्रिपाठी ने गजनेर से नंदना गनेशीपुर मार्ग पर मिट्टी डलवाने, खड़ंजा व पुलिया निर्माण, मंगलेश्वर मंदिर से रौतारा मगरासा मार्ग पर मिट्टी डलवाने व पुलिया का काम कराया था। तत्कालीन अवर अभियंता महेंद्र कुमार गर्ग ने खांगला देवी मंदिर, सगुनियापुरवा बंबा मार्ग पर मिट्टी डलवाने व पुलिया के काम में खेल किया था।

जिला पंचायत के तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी नरेश कुमार, अवर अभियंता योगेंद्र कुमार द्विवेदी, चिरंतन त्रिपाठी, महेंद्र कुमार गर्ग, तत्कालीन अभियंता राजकमल सक्सेना, विनोद कुमार मखीजा और कैशियर रमाशंकर त्रिपाठी।  
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