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Sawan 2019: 125 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, सर्व सिद्धिदायक हैं सावन के चारों सोमवार
Wed, 17 Jul 2019 05:46 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 17 Jul 2019 05:46 PM IST
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सावन 2019
- फोटो : अमर उजाला
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भगवान शिव का प्रिय माह सावन आज से शुरू हो गया है। शास्त्रों के जानकारों की मानें तो इस बार 125 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है कि वज्र व विष कुंभ योग में सावन प्रवेश करेगा। सावन में चार सोमवार पड़ेंगे।
शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि हिंदू कलेंडर के पांचवें माह श्रावण यानी सावन माह में शिव अराधना का विशेष महत्व है। सावन का पहला दिन बुधवार है। सावन के चारों सोमवार सर्व सिद्धिदायक हैं। भक्तों ने पहले दिन ही कांवड़ यात्रा, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक की तैयारी की है। उन्होंने बताया कि शिव भक्ति के पीछे खास धार्मिक व ज्योतिष पहलू भी बताए गए है।
जहां धार्मिक दृष्टि से अहम काल चातुर्मास के चार माहों का पहला माह सावन होता है। पुराण प्रसंगों में अनेक शिव लीलाओं का संबंध इस माह में बताया गया है। शुभ घड़ी की शुरूआत 17 जुलाई से होगी। इन दिनों पूजन आदि होने से शिव भक्ति व पूजा आदि से संस्कारिक सुखों को देने वाला व हर दोष व कलह मिटाने वाला आशीर्वाद मिलता है।
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उन्होंने बताया कि 17 जुलाई को सूर्य प्रधान उत्तराषाढ़ा नक्षत्र से सावन माह की शुरूआत होगी। जो सभी के लिए फलदायी होगा। एक अगस्त को हरियाली अमावस्या मनाई जाएगी तो पांच को नाग पंचमी है। नागपंचमी पर चंद्र प्रधान हस्त नक्षत्र व त्रियोग का संयोग भी बन रहा है। उन्होंने बताया कि सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग यानी त्रियोग के संयोग में काल सर्प दोष निवारण के लिए पूजा कराना फलदायी होता है।
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शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि हिंदू कलेंडर के पांचवें माह श्रावण यानी सावन माह में शिव अराधना का विशेष महत्व है। सावन का पहला दिन बुधवार है। सावन के चारों सोमवार सर्व सिद्धिदायक हैं। भक्तों ने पहले दिन ही कांवड़ यात्रा, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक की तैयारी की है। उन्होंने बताया कि शिव भक्ति के पीछे खास धार्मिक व ज्योतिष पहलू भी बताए गए है।
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जहां धार्मिक दृष्टि से अहम काल चातुर्मास के चार माहों का पहला माह सावन होता है। पुराण प्रसंगों में अनेक शिव लीलाओं का संबंध इस माह में बताया गया है। शुभ घड़ी की शुरूआत 17 जुलाई से होगी। इन दिनों पूजन आदि होने से शिव भक्ति व पूजा आदि से संस्कारिक सुखों को देने वाला व हर दोष व कलह मिटाने वाला आशीर्वाद मिलता है।
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उन्होंने बताया कि 17 जुलाई को सूर्य प्रधान उत्तराषाढ़ा नक्षत्र से सावन माह की शुरूआत होगी। जो सभी के लिए फलदायी होगा। एक अगस्त को हरियाली अमावस्या मनाई जाएगी तो पांच को नाग पंचमी है। नागपंचमी पर चंद्र प्रधान हस्त नक्षत्र व त्रियोग का संयोग भी बन रहा है। उन्होंने बताया कि सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग यानी त्रियोग के संयोग में काल सर्प दोष निवारण के लिए पूजा कराना फलदायी होता है।
शिव मंदिरों में हुई साज सज्जा
सावन माह के विशेष आयोजनों के लिए भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिरों आदि में उनको सजाने आदि का काम शुरू हो गया है। सकाहा स्थित शिव मंदिर, बाबा विश्वनाथ मंदिर, शिव भोले मंदिर, तुरंत नाथ मंदिर आदि मंदिरों को दिन भर सजाया गया। मंदिरों में शिव प्रतिमाओं व शिवलिंग का शृंगार आदि भी किया गया।
यह है मान्यता
हिंदू धर्म में सावन या श्रावण महीने का खास महत्व है। इस माह भगवान शंकर की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि सावन में सोमवार को व्रत रखने और भगवान शंकर की पूजा करने वाले जातक को मनवांछित जीवनसाथी मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
विवाहित औरतें यदि सावन महीने में सोमवार का व्रत रखती हैं तो भोलेशंकर उन्हें सौभाग्य का वरदान देते हैं। बहुत से लोग सावन में आने वाले पहले सोमवार से ही 16 सोमवार व्रत की शुरुआत करते हैं। सावन महीने की एक बात और खास है कि इस महीने में मंगलवार का व्रत भगवान शिव की पत्नी देवी पार्वती के लिए किया जाता है। मंगलवार व्रत को मंगला गौरी व्रत कहा जाता है।
सावन माह के विशेष आयोजनों के लिए भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिरों आदि में उनको सजाने आदि का काम शुरू हो गया है। सकाहा स्थित शिव मंदिर, बाबा विश्वनाथ मंदिर, शिव भोले मंदिर, तुरंत नाथ मंदिर आदि मंदिरों को दिन भर सजाया गया। मंदिरों में शिव प्रतिमाओं व शिवलिंग का शृंगार आदि भी किया गया।
यह है मान्यता
हिंदू धर्म में सावन या श्रावण महीने का खास महत्व है। इस माह भगवान शंकर की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि सावन में सोमवार को व्रत रखने और भगवान शंकर की पूजा करने वाले जातक को मनवांछित जीवनसाथी मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
विवाहित औरतें यदि सावन महीने में सोमवार का व्रत रखती हैं तो भोलेशंकर उन्हें सौभाग्य का वरदान देते हैं। बहुत से लोग सावन में आने वाले पहले सोमवार से ही 16 सोमवार व्रत की शुरुआत करते हैं। सावन महीने की एक बात और खास है कि इस महीने में मंगलवार का व्रत भगवान शिव की पत्नी देवी पार्वती के लिए किया जाता है। मंगलवार व्रत को मंगला गौरी व्रत कहा जाता है।
यह पड़ेंगे महत्वपूर्ण त्योहार
दिनांक त्योहार
17 जुलाई ------ श्रावण मास शुरू, पहला दिन
22 जुलाई ------ सावन का पहला सोमवार
29 जुलाई ------ सावन का दूसरा सोमवार
5 अगस्त ------ सावन का तीसरा सोमवार
01 अगस्त ------ हरियाली अमावस्या
05 अगस्त ------ नाग पंचमी
12 अगस्त ------ चौथा सोमवार
15 अगस्त ------ रक्षा बंधन
दिनांक त्योहार
17 जुलाई ------ श्रावण मास शुरू, पहला दिन
22 जुलाई ------ सावन का पहला सोमवार
29 जुलाई ------ सावन का दूसरा सोमवार
5 अगस्त ------ सावन का तीसरा सोमवार
01 अगस्त ------ हरियाली अमावस्या
05 अगस्त ------ नाग पंचमी
12 अगस्त ------ चौथा सोमवार
15 अगस्त ------ रक्षा बंधन