UP: पासपोर्ट पर धब्बा, राष्ट्रीय खिलाड़ी सपना के सपने को धक्का, अमौसी एयरपोर्ट पर अधिकारियों ने फ्लाइट में नहीं चढ़ने दिया
मालदीव में तीन जुलाई से होने वाली अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में माल रोड कुरसवां निवासी सिलाई कारीगर अशोक कश्यप की बेटी सपना का चयन हुआ है। सपना ने बताया कि 16 दिसंबर 2016 को पासपोर्ट बनवाया था, तबसे वह अलमारी में रखा है। पासपोर्ट के पहले पन्ने में एक धब्बा लग गया है। इस कारण अधिकारियों ने फ्लाइट पर चढ़ने नहीं दिया।
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पासपोर्ट पर लगे छोटे से धब्बे के कारण भारतीय हैंडबॉल टीम की महिला खिलाड़ी का अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेलने का सपना पूरा होते नहीं दिख रहा है। 25 जून को लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट से उसे दिल्ली और फिर दिल्ली से टीम के साथ मालदीव जाना था पर अमौसी एयरपोर्ट अधिकारियों ने पासपोर्ट में धब्बा होने की वजह से फ्लाइट में चढ़ने की इजाजत नहीं दी।
मालदीव में तीन जुलाई से होने वाली अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में माल रोड कुरसवां निवासी सिलाई कारीगर अशोक कश्यप की बेटी सपना का चयन हुआ है। सपना ने बताया कि 16 दिसंबर 2016 को पासपोर्ट बनवाया था, तबसे वह अलमारी में रखा है। पता नहीं कैसे पासपोर्ट के पहले पन्ने में एक धब्बा लग गया है। इस कारण अधिकारियों ने फ्लाइट पर चढ़ने नहीं दिया।
पासपोर्ट ऑफिस में भी संपर्क किया है पर वहां से कोई सहायता नहीं मिली। उन्होंने बताया कि भारतीय हैंडबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि यदि एक जुलाई तक मैं मालदीव पहुंच जाऊं तो मुझे टीम में जगह दे दी जाएगी। अब पासपोर्ट ऑफिस जाकर तत्काल पासपोर्ट बनवाने की कोशिश करूंगी।
2019 में जूनियर बालिका टीम में हुआ था चयन
2019 में सपना का चयन जूनियर बालिका भारतीय हैंडबॉल टीम में हुआ था। प्रतियोगिता के दो दिन पहले वह सीढ़ियों पर फिसल गई थी, इस कारण पैर फैक्चर हो गया था और वह प्रतियोगिता में शामिल नहीं हो पाई थी। इसके बाद सपना का चयन गुजरात के गांधी नगर स्थित साई हॉस्टल में हो गया था। अब इस वर्ष उनका चयन सीनियर भारतीय हैंडबॉल टीम में हुआ।
उधार लेकर पिता ने बेटी को बनाया काबिल
सपना के पिता अशोक ने बताया कि बेटी को बचपन से ही हैंडबॉल खेल में काफी रुचि थी। उसकी मेहनत और लगन को देखकर कभी भी पैसे की कमी उसकी राह में आने न दी। प्रशिक्षण समेत अन्य चीजों के लिए कई लोगों से उधार लेना पड़ा पर भारतीय टीम में चयनित होकर सपना ने गर्व से मेरा सिर ऊंचा कर दिया। लेकिन अब सिस्टम के खेल ने सारे सपनों पर पानी फेर दिया है।