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उन्नाव के संतोष को मिला विद्या वाचस्पति सम्मान, तीस साल से पर्यावरण के क्षेत्र में कर रहे हैं काम
Tue, 15 Oct 2019 02:39 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 15 Oct 2019 02:39 PM IST
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उन्नाव के संतोष को महाराष्ट्र में मिला विद्या वाचस्पति सम्मान
- फोटो : अमर उजाला
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विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ ने उन्नाव के सिविल लाइंस निवासी संतोष कुमार बाजपेयी को विद्या वाचस्पति सम्मान से विभूषित किया है। महाराष्ट्र के सेवाग्राम आश्रम में आयोजित हुए दो दिवसीय कार्यक्रम में उन्हें पर्यावरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर सम्मानित किया गया।
मौजूदा समय में प्रयागराज में आईटीआई लीगल आफीसर के पद पर कार्यरत संतोष बाजपेयी जीवन बचाओ आंदोलन के माध्यम से देश कीप्रत्येक ग्राम पंचायत में संस्कार स्मृति वाटिका तैयार करने की मुहिम चला रहे हैं। तीस वर्षों से पर्यावरण संवर्धन के क्षेत्र में वह सक्रिय हैं।
संतोष बाजपेयी देश की कई पत्र पत्रिकाओं के लिए भी पर्यावरण से संबंधित लेख लिखते हैं। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार 2002 में उन्हें इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र पुरस्कार भी दिया था। महाराष्ट्र में 12 व 13 अक्तूबर को आयोजित कार्यक्रम में विद्यापीठ के कुलाधिपति डॉ. सुमन जी भाई, कुलपति तेज नारायण कुशवाहा, कुलसचिव देवेंद्र नाथ साह ने संतोष बाजपेयी को पुरस्कार प्रदान किया।
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शादी पर वर-वधू से लगवाते हैं परिणय पौधा
संतोष बाजपेई की शादी वर्ष 2001 में हुई थी। पत्नी अनुपम को भी पर्यावरण से लगाव है। शादी के बाद उन्होंने कई पौधे लगाए हैं। इसके अलावा इस प्रक्रिया को उन्होंने अभियान बनाया। अब वह शादियों में जाकर वर-वधू को फलदार पौधे देते हैं। पौधे लगाने और रखरखाव की जिम्मेदारी दंपति की होती है। हर तीन महीने पर दंपति को उस पौधे के साथ सेल्फी खींचकर संस्था को भेजनी होती है। यह दंपति अपने परिचितों और रिश्तेदारों की शादी में परिणय पौधा लगवाते हैं।
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मौजूदा समय में प्रयागराज में आईटीआई लीगल आफीसर के पद पर कार्यरत संतोष बाजपेयी जीवन बचाओ आंदोलन के माध्यम से देश कीप्रत्येक ग्राम पंचायत में संस्कार स्मृति वाटिका तैयार करने की मुहिम चला रहे हैं। तीस वर्षों से पर्यावरण संवर्धन के क्षेत्र में वह सक्रिय हैं।
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संतोष बाजपेयी देश की कई पत्र पत्रिकाओं के लिए भी पर्यावरण से संबंधित लेख लिखते हैं। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार 2002 में उन्हें इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र पुरस्कार भी दिया था। महाराष्ट्र में 12 व 13 अक्तूबर को आयोजित कार्यक्रम में विद्यापीठ के कुलाधिपति डॉ. सुमन जी भाई, कुलपति तेज नारायण कुशवाहा, कुलसचिव देवेंद्र नाथ साह ने संतोष बाजपेयी को पुरस्कार प्रदान किया।
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शादी पर वर-वधू से लगवाते हैं परिणय पौधा
संतोष बाजपेई की शादी वर्ष 2001 में हुई थी। पत्नी अनुपम को भी पर्यावरण से लगाव है। शादी के बाद उन्होंने कई पौधे लगाए हैं। इसके अलावा इस प्रक्रिया को उन्होंने अभियान बनाया। अब वह शादियों में जाकर वर-वधू को फलदार पौधे देते हैं। पौधे लगाने और रखरखाव की जिम्मेदारी दंपति की होती है। हर तीन महीने पर दंपति को उस पौधे के साथ सेल्फी खींचकर संस्था को भेजनी होती है। यह दंपति अपने परिचितों और रिश्तेदारों की शादी में परिणय पौधा लगवाते हैं।