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चामुंडी पहाड़ियों पर दोपहर के समय सद्गुरु जग्गी वासुदेव को हुआ था ये ‘रहस्यमय एहसास’

Tue, 26 Sep 2017 10:24 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 26 Sep 2017 10:24 AM IST
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Sadguru Jaggi Vasudev Mysterious feeling in Chamundi hills
सदगुरु जग्गी वासुदेव चामुंडी पहाड़ियों में रहस्यमय भावनाएं

एक दोपहर सद्गुरु जग्गी वासुदेव चामुंडी पहाड़ियों पर चले गए और एक चट्टान पर बैठ गए। जब उनकी आंखें खुली थीं अचानक, वह शरीर के अनुभव से बाहर निकल गए उन्हें लगा कि वह अब अपने शरीर में नहीं हैं, बल्कि हर जगह फैल गए हैं, चट्टानों में, पेड़ों में, पृथ्वी पर।आगे की स्लाइड में पढ़ें, सद्गुरु जग्गी वासुदेव के बारे में

Sadguru Jaggi Vasudev Mysterious feeling in Chamundi hills
सदगुरु जग्गी वासुदेव चामुंडी पहाड़ियों में रहस्यमय भावनाएं

चामुंडी पहाड़ियों पर ऐसे ही तमाम ‘रहस्यमय एहसास’ के बाद सद्गुरु जग्गी वासुदेव की सोच पर्यावरण से सीधा जुड़ चुकी थी। जग्गी वासुदेव का जन्म 1957 में कर्नाटक राज्य के मैसूर शहर में हुआ था। उनके पिता डॉक्टर थे। बचपन से ही जग्गी वासुदेव को पर्यावरण से लगाव था। बचपन से ही, वासुदेव दूसरों की तुलना में  काफी अलग थे।

Sadguru Jaggi Vasudev Mysterious feeling in Chamundi hills
सदगुरु जग्गी वासुदेव चामुंडी पहाड़ियों में रहस्यमय भावनाएं

तेरह साल की उम्र में, उन्होंने श्रीराघवेंद्र राव (मल्लदिहल्ली स्वामी) के मार्गदर्शन में प्राणायाम और आसन जैसे योग प्रथा शुरू की थी। उन्होंने कर्नाटक के मैसूर विश्वविद्यालय से स्नातक किया। जब वासुदेव पच्चीस वर्ष के थे, तो उन्होंने एक असामान्य घटना देखी जो उन्हें  जीवन और भौतिक वस्तुओं दूर ले गया और त्याग की ओर ले गया।

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Sadguru Jaggi Vasudev Mysterious feeling in Chamundi hills
सदगुरु जग्गी वासुदेव चामुंडी पहाड़ियों में रहस्यमय भावनाएं
गंगा के साथ सेल्फी ली  
सदगुरु जग्गी वासुदेव ने कानपुर से लखनऊ जाते समय कानपुर के गंगा बैराज से गंगा के साथ सेल्फी ली। इसके साथ उन्होंने लिखा कि ग्लोरियस गंगा.... लेकिन ज्यादा ग्लोरियस साइट नहीं है।
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Sadguru Jaggi Vasudev Mysterious feeling in Chamundi hills
सदगुरु जग्गी वासुदेव चामुंडी पहाड़ियों में रहस्यमय भावनाएं
कानपुर में सदगुरु जग्गी वासुदेव से मिलने के बाद लोगों के विचार

 

नदियों का संरक्षण करने और प्रकृति को बचाने की जरूरत है। इसके लिए हम सभी को जागरूक होना पड़ेगा। सदगुरु जग्गी वासुदेव जी ने इस ओर क्रांतिकारी कदम बढ़ाया है इसलिए पीएसआईटी के सभी छात्र-छात्राएं, शिक्षक, कर्मचारी और प्रशासनिक अधिकारी सभी उनके साथ मिलकर उनके इस मुहिम को आगे बढ़ाएंगे। 
प्रणवीर सिंह, अध्यक्ष, पीएसआईटी, कानपुर
नदी और पर्यावरण को बचाने के लिए संस्थान का इको क्लब भी काम कर रहा है। हम अपने इस अभियान को जग्गी वासुदेव के अभियान के साथ जोड़कर आगे बढ़ाएंगे। 
शेफाली राज, प्रबंध निदेशक, पीएसआईटी, कानपुर
हम सभी को यह मालूम है कि नदी हमारे घर तक नहीं चलकर आएगी बल्कि हमें नदियों तक पहुंचना होगा। इसलिए हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम अपनी नदियों को बचाने के लिए कदम उठाएं। 
डॉ. गरिमा विलियम्स, शिक्षिक, पीएसआईटी
नदियों के लिए जागरुकता अभियान चलाना सराहनीय है। जग्गी वासुदेव ने कई ऐसी जानकारी दीं जो चौंकाने वाली हैं। हम उनके इस अभियान में उनके साथ हैं। 
 

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