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Kanpur News: ठेंगे पर नियम, कहीं भी लगा दे रहे होर्डिंग, बैनर
Sat, 10 Oct 2026 01:17 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sat, 10 Oct 2026 01:17 AM IST
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कानपुर देहात। जनपद में गलत तरीके से होर्डिंग, बैनर लगाए जा रहे हैं। इसके लिए लोग अनुमति लेना भी उचित नहीं समझ रहे हैं। ओवरब्रिज की दीवार, पेड़, बिजली के पोल कहीं भी होर्डिंग, बैनर लटका दिए जा रहे हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाले लकड़ी और लोहे के पाइप कई जगह टूट कर लटक रहे हैं, जो हादसे का कारण बन सकते हैं। कई बार लोग इनके तेज हवा से गिरने से घायल हो चुके हैं।
अकबरपुर नगर पंचायत जिला मुख्यालय का नगर है। नगर में धड़ल्ले से अवैध होर्डिंग लगाई जा रही हैं। होर्डिंग लगाने से पहले अनुमति लेना जरूरी है। इसके लिए तय शुल्क की व्यवस्था भी है। मगर व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही है। हालात ये हैं कि जिसका जहां मन चाह रहा है वहीं होर्डिंग लटका दे रहा है। इससे निकाय को मिलने वाला शुल्क भी डूब रहा है। नगर निकायों को आमदनी बढ़ सके इस पर जोर है। इसी को ध्यान में रखते हुए लगातार निकाय कारोबारी गतिविधि के जरिये आय बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। कई जगह किराये पर दुकानें उठाई जा रही हैं। वहीं हाट बाजार व अड्डा पड़ाव ठेके दिए जा रहे हैं। गृहकर व जलकर भी वसूला जाता है।
इसके साथ ही नगरीय क्षेत्र में परिवेश साफ-सुथरा रहे और अनुमति पर ही होर्डिंग, बैनर या पोस्टर लगाए जा सके इसके लिए अकबरपुर नगर पंचायत में नियम तय है। हालांकि लागू कराने में जिम्मेदारों की हिचक बरकरार है। कहीं भी होर्डिंग, बैनर लगाने से नगर की सुंदरता को ग्रहण लग रहा है। नियमानुसार, नगर पंचायत सीमा के भीतर किसी भी प्रकार का प्रचार बोर्ड या होर्डिंग लगाने से पहले संबंधित निकाय से अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके लिए एक तय शुल्क और प्रक्रिया की व्यवस्था भी बनाई गई है, जिससे निकाय को राजस्व की प्राप्ति होती है। हालांकि यह व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है।
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स्थानीय सुरेश कुमार व दीपक कहते हैं कि जिला मुख्यालय का नगर होने के बावजूद यहां नियम-कानून ताक पर हैं। निकाय प्रशासन की ढिलाई के कारण विज्ञापन माफिया और स्थानीय प्रचारक जहां मन करता है होर्डिंग या बैनर टांग देते हैं। कई बार ये होर्डिंग वाहन चालकों का ध्यान भंग करते हैं। कई बार होर्डिंग उखाड़ने का अभियान चलाया गया लेकिन कुछ दिन बाद फिर से अवैध होर्डिंग लग जाते हैं। इन्हें लगाने वालों के खिलाफ सख्त अभियान चलाने की जरूरत है। नियम तोड़ने वालों से अर्थदंड वसूला जाए तो नगर की सूरत बदल सकती है।
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बोले जिम्मेदार
नगर में होर्डिंग, बैनर या एलईडी पर प्रचार यानी विज्ञापन के लिए नगर पंचायत से अनुमति लेना जरूरी है। इसके लिए नियम बनाया गया है। प्रतिदिन, मासिक या फिर वार्षिक शुल्क तय है। कई बार अभियान चलाकर होर्डिंग व बैनर आदि उखड़वाए गए हैं। जल्द फिर से अवैध होर्डिंग के खिलाफ अभियान चलेगा। अवैध होर्डिंग व बैनर आदि का शुल्क वसूलना ठीक नहीं है। इसके लिए नगर निकाय की ओर से कुछ स्थानों को चिह्नित किया है। यहां पोल आदि लगाने के लिए जरूरी बजट उपलब्ध नहीं होने से अड़चन है। स्थल तैयार होने के बाद इन स्थानों को छोड़कर अन्य जगह पर होर्डिंग या बैनर आदि लगाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी। इसके साथ ही अर्थदंड भी वसूला जाएगा। - आशीष कुमार, ईओ अकबरपुर
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ठेकेदार कर रहे कमाई
कानपुर शहर या फिर आसपास के जिले में विज्ञापन का काम करने वाले निजी एजेंसी के ठेकेदार अकबरपुर नगर व जिला मुख्यालय माती आदि में अवैध विज्ञापनों के जरिये कमाई कर रहे हैं। ये नगर पंचायत की अनुमति और शुल्क प्रक्रिया को दरकिनार किए हैं। नगर निकाय प्रशासन की खामोशी से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ढिलाई क्यों बरती जा रही है।
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नियम में होर्डिंग के किराए पर एक नजर
आकार (वर्ग फीट में) - मूल्य
6 गुणा 3 - 500 रुपये
3 गुणा 2 - 250 रुपये
3 गुणा 1/2- 150 रुपये
1 गुणा 1/2- 100 रुपये
1 गुणा 1 - 50 रुपये
नोट - चौराहा व तिराहा पर चार फीसदी अतिरिक्त शुल्क
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टेंट लगाकर प्रचार-प्रसार पर शुल्क 100 रुपये प्रतिदिन
जीप, कार, बस व टेंपो पर प्रचार में शुल्क 50 रुपये प्रतिदिन
साइकिल व रिक्शा पर शुल्क 20 रुपये प्रतिदिन
नगर पंचायत की एलईडी पर विज्ञापन शुल्क एक हजार प्रति माह प्रति एलईडी
नगर पंचायत में निजी एलईडी स्थापित कराने का शुल्क पांच हजार प्रति माह प्रति एलईडी
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नियम तोड़ने पर कार्रवाई का प्रावधान
अकबरपुर नगर निकाय के बनाए प्रचार-प्रसार के नियम को तोड़ने पर एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जा सकता है। बार-बार नियम तोड़ने पर प्रत्येक दिन 100 रुपये प्रतिदिन के अनुसार अर्थदंड लगाया जा सकता है।
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अकबरपुर नगर पंचायत जिला मुख्यालय का नगर है। नगर में धड़ल्ले से अवैध होर्डिंग लगाई जा रही हैं। होर्डिंग लगाने से पहले अनुमति लेना जरूरी है। इसके लिए तय शुल्क की व्यवस्था भी है। मगर व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही है। हालात ये हैं कि जिसका जहां मन चाह रहा है वहीं होर्डिंग लटका दे रहा है। इससे निकाय को मिलने वाला शुल्क भी डूब रहा है। नगर निकायों को आमदनी बढ़ सके इस पर जोर है। इसी को ध्यान में रखते हुए लगातार निकाय कारोबारी गतिविधि के जरिये आय बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। कई जगह किराये पर दुकानें उठाई जा रही हैं। वहीं हाट बाजार व अड्डा पड़ाव ठेके दिए जा रहे हैं। गृहकर व जलकर भी वसूला जाता है।
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इसके साथ ही नगरीय क्षेत्र में परिवेश साफ-सुथरा रहे और अनुमति पर ही होर्डिंग, बैनर या पोस्टर लगाए जा सके इसके लिए अकबरपुर नगर पंचायत में नियम तय है। हालांकि लागू कराने में जिम्मेदारों की हिचक बरकरार है। कहीं भी होर्डिंग, बैनर लगाने से नगर की सुंदरता को ग्रहण लग रहा है। नियमानुसार, नगर पंचायत सीमा के भीतर किसी भी प्रकार का प्रचार बोर्ड या होर्डिंग लगाने से पहले संबंधित निकाय से अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके लिए एक तय शुल्क और प्रक्रिया की व्यवस्था भी बनाई गई है, जिससे निकाय को राजस्व की प्राप्ति होती है। हालांकि यह व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है।
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स्थानीय सुरेश कुमार व दीपक कहते हैं कि जिला मुख्यालय का नगर होने के बावजूद यहां नियम-कानून ताक पर हैं। निकाय प्रशासन की ढिलाई के कारण विज्ञापन माफिया और स्थानीय प्रचारक जहां मन करता है होर्डिंग या बैनर टांग देते हैं। कई बार ये होर्डिंग वाहन चालकों का ध्यान भंग करते हैं। कई बार होर्डिंग उखाड़ने का अभियान चलाया गया लेकिन कुछ दिन बाद फिर से अवैध होर्डिंग लग जाते हैं। इन्हें लगाने वालों के खिलाफ सख्त अभियान चलाने की जरूरत है। नियम तोड़ने वालों से अर्थदंड वसूला जाए तो नगर की सूरत बदल सकती है।
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बोले जिम्मेदार
नगर में होर्डिंग, बैनर या एलईडी पर प्रचार यानी विज्ञापन के लिए नगर पंचायत से अनुमति लेना जरूरी है। इसके लिए नियम बनाया गया है। प्रतिदिन, मासिक या फिर वार्षिक शुल्क तय है। कई बार अभियान चलाकर होर्डिंग व बैनर आदि उखड़वाए गए हैं। जल्द फिर से अवैध होर्डिंग के खिलाफ अभियान चलेगा। अवैध होर्डिंग व बैनर आदि का शुल्क वसूलना ठीक नहीं है। इसके लिए नगर निकाय की ओर से कुछ स्थानों को चिह्नित किया है। यहां पोल आदि लगाने के लिए जरूरी बजट उपलब्ध नहीं होने से अड़चन है। स्थल तैयार होने के बाद इन स्थानों को छोड़कर अन्य जगह पर होर्डिंग या बैनर आदि लगाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी। इसके साथ ही अर्थदंड भी वसूला जाएगा। - आशीष कुमार, ईओ अकबरपुर
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ठेकेदार कर रहे कमाई
कानपुर शहर या फिर आसपास के जिले में विज्ञापन का काम करने वाले निजी एजेंसी के ठेकेदार अकबरपुर नगर व जिला मुख्यालय माती आदि में अवैध विज्ञापनों के जरिये कमाई कर रहे हैं। ये नगर पंचायत की अनुमति और शुल्क प्रक्रिया को दरकिनार किए हैं। नगर निकाय प्रशासन की खामोशी से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ढिलाई क्यों बरती जा रही है।
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नियम में होर्डिंग के किराए पर एक नजर
आकार (वर्ग फीट में) - मूल्य
6 गुणा 3 - 500 रुपये
3 गुणा 2 - 250 रुपये
3 गुणा 1/2- 150 रुपये
1 गुणा 1/2- 100 रुपये
1 गुणा 1 - 50 रुपये
नोट - चौराहा व तिराहा पर चार फीसदी अतिरिक्त शुल्क
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टेंट लगाकर प्रचार-प्रसार पर शुल्क 100 रुपये प्रतिदिन
जीप, कार, बस व टेंपो पर प्रचार में शुल्क 50 रुपये प्रतिदिन
साइकिल व रिक्शा पर शुल्क 20 रुपये प्रतिदिन
नगर पंचायत की एलईडी पर विज्ञापन शुल्क एक हजार प्रति माह प्रति एलईडी
नगर पंचायत में निजी एलईडी स्थापित कराने का शुल्क पांच हजार प्रति माह प्रति एलईडी
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नियम तोड़ने पर कार्रवाई का प्रावधान
अकबरपुर नगर निकाय के बनाए प्रचार-प्रसार के नियम को तोड़ने पर एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जा सकता है। बार-बार नियम तोड़ने पर प्रत्येक दिन 100 रुपये प्रतिदिन के अनुसार अर्थदंड लगाया जा सकता है।