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कानपुर: लाखों के गबन में सिंचाई विभाग का रिटायर्ड चपरासी गिरफ्तार
Tue, 03 Sep 2019 03:01 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 03 Sep 2019 03:01 PM IST
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रिटायर्ड चपरासी रामसनेही यादव
- फोटो : अमर उजाला
आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) कानपुर इकाई ने सोमवार को सिंचाई विभाग के रिटायर्ड चपरासी रामसनेही यादव को गिरफ्तार किया। आरोपी पर फर्जीवाड़ा कर नलकूप खंड प्रथम निराला नगर के सात कर्मचारियों के ग्रेज्युटी का 40.18 लाख रुपये गबन करने का आरोप है। इसमें विभाग के पूर्व वरिष्ठ लिपिक सहित पांच आरोपी पहले ही जेल जा चुके हैं।
ईओडब्ल्यू एसपी राम बाबू के मुताबिक 2010 में विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता पीके वर्मा ने एफआईआर दर्ज कराई थी। जांच में खुलासा हुआ था कि विभाग के पूर्व वरिष्ठ लिपिक आलोक प्रसाद सक्सेना ने गुजैनी निवासी विभाग के चपरासी रामसनेही यादव की मदद 2006 से 2009 के बीच सात कर्मचारियों के ग्रज्युटी की रकम फर्जीवाड़ा कर रिश्तेदारों के खाते में 40.18 लाख की चेकों का भुगतान करवा लिया।
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ईओडब्ल्यू एसपी राम बाबू के मुताबिक 2010 में विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता पीके वर्मा ने एफआईआर दर्ज कराई थी। जांच में खुलासा हुआ था कि विभाग के पूर्व वरिष्ठ लिपिक आलोक प्रसाद सक्सेना ने गुजैनी निवासी विभाग के चपरासी रामसनेही यादव की मदद 2006 से 2009 के बीच सात कर्मचारियों के ग्रज्युटी की रकम फर्जीवाड़ा कर रिश्तेदारों के खाते में 40.18 लाख की चेकों का भुगतान करवा लिया।
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इसमें आलोक प्रसाद के रिश्तेदार सरला सक्सेना, नीलम सक्सेना, सिम्मी सक्सेना, धर्मेंद्र सक्सेना शामिल थे। ये सभी आरोपी पहले ही जेल जा चुके हैं। चार्जशीट भी लग चुकी है। रामसनेही फरार था। करीब दस साल बाद अब उसे गिरफ्तार किया गया। कल उसे लखनऊ कोर्ट में पेश कर जेल भेजा जाएगा। राम सनेही मूलरूप से नबीपुर, अकबपुर (कानपुर देहात) का रहने वाला है।
सेवानिवृत्त भी नहीं हुए थे कर्मचारी
एसपी राम बाबू ने बताया कि इस गबन में चपरासी की भूमिका सबसे अहम थी। उसे लिपिक आलोक प्रसाद की करतूत पता थी यानी फर्जीवाड़ा में वह सीधेतौर पर शामिल था। विभाग से सातों कर्मचारियों के चेक उसी को दिए गए। उसने ये चेक आलोक को दे दिए। इसके बदले कुछ रकम उसे भी मिली। हैरानी की बात ये है कि जिन सात कर्मचारियों के ग्रेज्युटी का पैसा गबन किया गया, वह रिटायर्ड हुए ही नहीं थे।
सेवानिवृत्त भी नहीं हुए थे कर्मचारी
एसपी राम बाबू ने बताया कि इस गबन में चपरासी की भूमिका सबसे अहम थी। उसे लिपिक आलोक प्रसाद की करतूत पता थी यानी फर्जीवाड़ा में वह सीधेतौर पर शामिल था। विभाग से सातों कर्मचारियों के चेक उसी को दिए गए। उसने ये चेक आलोक को दे दिए। इसके बदले कुछ रकम उसे भी मिली। हैरानी की बात ये है कि जिन सात कर्मचारियों के ग्रेज्युटी का पैसा गबन किया गया, वह रिटायर्ड हुए ही नहीं थे।