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Kanpur News: कम उम्र में पित्त की थैली में हो रही पथरी का शोध से चलेगा पता
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कानपुर। 18 वर्ष से कम उम्र के लड़के-लड़कियों में बढ़ रही पित्त की थैली की पथरी की समस्या का कारण सर्जरी विभाग ढूंढेगा। इसकी शुरुआत सोमवार से हो गई। कक्षा-11 की 17 वर्षीय छात्रा को शोध के लिए पंजीकृत किया गया है। छात्रा को फरवरी से पेट में दर्द की समस्या है। जांच कराने पर पित्त की थैली में पथरी मिली। शोध के अगुवा सीनियर सर्जन डॉ. जीडी यादव ने बताया कि पथरी निकालकर उसके रसायनों की जांच की जाएगी। इससे कारण का पता चल सकेगा।
सोमवार को डॉ. यादव ने पत्रकारों को बताया कि पांच-छह साल से पित्त के थैली के रोगियों की संख्या बढ़ी है। हर महीने 20-25 रोगी ऐसे आते हैं, जिनकी उम्र 18 साल से कम होती है। पांच लोग ऐसी स्थिति में आते हैं, जिनका तुरंत ऑपरेशन करना पड़ता है। शुरुआती पथरी के रोगियों को दवा दी जाती है। इतनी कम उम्र में पथरी होना चिंता की बात है। इसका कारण जानने के लिए शोध की शुरुआत की गई है। यह भी देखा जाएगा कि शहर के रोगी अधिक हैं कि ग्रामीण इलाकों के।
पहले रोगी को पंजीकृत कर लिया गया है। बताया कि थैलीसीमिया से पीड़ित रोगियों को भी पित्त की थैली की पथरी की शिकायत होती है। ऐसे रोगियों को भी शोध में शामिल किया जाएगा। यह शोध दो साल चलेगा। हर रोगी की पथरी की केमिकल जांच होगी।
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सोमवार को डॉ. यादव ने पत्रकारों को बताया कि पांच-छह साल से पित्त के थैली के रोगियों की संख्या बढ़ी है। हर महीने 20-25 रोगी ऐसे आते हैं, जिनकी उम्र 18 साल से कम होती है। पांच लोग ऐसी स्थिति में आते हैं, जिनका तुरंत ऑपरेशन करना पड़ता है। शुरुआती पथरी के रोगियों को दवा दी जाती है। इतनी कम उम्र में पथरी होना चिंता की बात है। इसका कारण जानने के लिए शोध की शुरुआत की गई है। यह भी देखा जाएगा कि शहर के रोगी अधिक हैं कि ग्रामीण इलाकों के।
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पहले रोगी को पंजीकृत कर लिया गया है। बताया कि थैलीसीमिया से पीड़ित रोगियों को भी पित्त की थैली की पथरी की शिकायत होती है। ऐसे रोगियों को भी शोध में शामिल किया जाएगा। यह शोध दो साल चलेगा। हर रोगी की पथरी की केमिकल जांच होगी।
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